बरेली नगर निगम ने शहर के कोहाड़ापीर इलाके में रहने वाले और वहां से गुजरने वाले लोगों के लिए एक बड़ी खबर है। अगर आप इस रास्ते से अक्सर निकलते हैं, तो आपने देखा होगा कि सड़कों के किनारे दुकानों की वजह से ट्रैफिक कितना धीमा रहता है। अब नगर निगम ने इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की तैयारी पूरी कर ली है। शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।
बरेली के कोहाड़ा पीर इलाके में वक्फ संपत्ति पर अतिक्रमण के खिलाफ नगर निगम ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है । कब्रिस्तान की जमीन के बाहर बनी करीब 80 दुकानों को नोटिस देकर 7 दिन में हटाने के निर्देश दिए गए हैं। सर्वे में 7 से 15 फीट तक अवैध कब्जा पाया गया। कार्रवाई के डर से कई दुकानदार खुद ही निर्माण हटा रहे हैं। कोहाड़ा पीर से कुदेशिया रोड तक कुल 386 अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं, जिन पर समय सीमा के बाद बुलडोजर कार्रवाई होगी।

मॉडल रोड की राह में रोड़ा
दरअसल, सीएम ग्रिड योजना के तहत कोहाड़ापीर से कुदेशिया फाटक और प्रेमनगर धर्मकांटा तक एक शानदार मॉडल रोड बनाई जानी है। इस रोड की कुल लंबाई करीब 2.4 किलोमीटर होगी। लेकिन इस प्रोजेक्ट के बीच में कोहाड़ापीर कब्रिस्तान की बाउंड्री के बाहर बनी 80 अवैध दुकानें बाधा डाल रही हैं। सर्वे में पाया गया कि ये दुकानें वक्फ संपत्ति के नाम पर अतिक्रमण कर बनाई गई हैं, जिससे मुख्य सड़क काफी संकरी हो गई है।

सात दिन का मिला समय
इस मामले पर कार्रवाई करते हुए नगर निगम ने सख्त कदम उठाए हैं। अधिकारियों ने इन 80 दुकानों को चिह्नित कर लिया है और मुतवल्ली को नोटिस जारी कर दिया है। नोटिस में साफ तौर पर कहा गया है कि सात दिन के भीतर इन दुकानों को खाली कर दिया जाए। अगर ऐसा नहीं होता है, तो प्रशासन खुद बुलडोजर चलाकर इन अवैध निर्माणों को ढहा देगा। शनिवार को टीम ने कई भवनों पर लाल निशान भी लगाए हैं, जिससे वहां हड़कंप की स्थिति है।

जनता की सुविधा प्राथमिकता
नगर निगम के अधिशासी अभियंता ने स्पष्ट किया है कि यह सब कुछ जनहित में किया जा रहा है। मॉडल रोड बनने से न केवल शहर की सूरत बदलेगी, बल्कि रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम से भी लोगों को राहत मिलेगी। विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उन्हें खुद निर्माण गिराना पड़ा, तो उसका खर्च भी अतिक्रमण करने वालों से ही वसूला जाएगा।
शहर के विकास के लिए अतिक्रमण हटाना एक जरूरी कदम है। नगर निगम की इस कार्रवाई से भले ही कुछ समय के लिए स्थानीय व्यापारियों को परेशानी हो, लेकिन लंबे समय में यह पूरे शहर के लिए फायदेमंद साबित होगा। अब देखना यह है कि सात दिन की मोहलत के बाद स्थिति क्या रुख लेती है।
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