देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले वीरों की कहानियाँ अक्सर हमें गौरवान्वित करती हैं, लेकिन उनके पीछे का गम भी उतना ही गहरा होता है। सुल्तानपुर के मझना गांव के रहने वाले 26 साल के जांबाज जवान Akhilesh Shukla अब हमारे बीच नहीं रहे। जम्मू के कुपवाड़ा में सर्च ऑपरेशन के दौरान घायल हुए अखिलेश ने दिल्ली के अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। शुक्रवार को जब उनका पार्थिव शरीर उनके गांव पहुंचा, तो हर आंख नम थी और माहौल देशभक्ति के नारों से गूंज रहा था।

इकलौते बेटे की शहादत से परिवार टूटा, पर गर्व भी है
अखिलेश शुक्ला उर्फ शुभम अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। उनके पिता कृष्ण शुक्ल खुद सेना में सूबेदार पद से रिटायर हुए हैं, इसलिए देश सेवा का जज्बा उनके खून में था। Akhilesh Shukla की बड़ी बहन दिल्ली पुलिस में हैं, जबकि छोटी बहन प्रयागराज में सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही हैं। महज तीन साल पहले सेना की 33 वर्कशॉप EME कोर में भर्ती हुए अखिलेश की तैनाती इन दिनों जम्मू के कुपवाड़ा में थी। परिवार को क्या पता था कि जिस बेटे को उन्होंने 25 मार्च को हंसते-हंसते ड्यूटी पर विदा किया था, वह अब तिरंगे में लिपटकर वापस आएगा।

सर्च ऑपरेशन के दौरान लगी थी गोली
यह घटना 28 मार्च की रात की है। कुपवाड़ा के जंगलों में सेना का एक सर्च ऑपरेशन चल रहा था, जिसमें Akhilesh Shukla भी शामिल थे। इसी अभियान के दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत दिल्ली के आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन बुधवार की दोपहर उनकी हालत अचानक बिगड़ी और उन्होंने वीरगति प्राप्त की। सेना ने जब फोन पर पिता को यह दुखद खबर दी, तो पूरे इलाके में मातम छा गया।

सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई
शुक्रवार को जब शहीद Akhilesh Shukla का पार्थिव शरीर राजकीय सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव लाया गया, तो हुजूम उमड़ पड़ा। अयोध्या से आए डोगरा रेजिमेंट के जवानों ने उन्हें कंधा दिया। अंतिम संस्कार के दौरान बंदूकों की गूंज और बिगुल की धुन के बीच सेना ने अपने साथी को सलामी दी। पिता ने अपने इकलौते बेटे को मुखाग्नि दी, जिसे देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति का दिल भर आया। पूरे रास्ते ‘अखिलेश शुक्ला अमर रहें’ के नारे लगते रहे।

युवाओं ने निकाली भव्य बाइक रैली
गांव के इस लाल की शहादत ने स्थानीय युवाओं में भी जोश भर दिया। Akhilesh Shukla को श्रद्धांजलि देने के लिए सैकड़ों युवाओं ने तिरंगे के साथ एक विशाल बाइक रैली निकाली। सड़कों पर निकले युवाओं ने ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष से पूरे सुल्तानपुर को गुंजायमान कर दिया। यह रैली केवल एक विदाई नहीं थी, बल्कि शहीद के बलिदान के प्रति समाज का सम्मान था।
शहीद Akhilesh Shukla का जाना पूरे सुल्तानपुर और देश के लिए एक बड़ी क्षति है। वह अपने घर की खुशियों के साथ-साथ देश की सीमाओं की रक्षा की जिम्मेदारी भी निभा रहे थे। ऐसे वीर सपूतों की शहादत हमें याद दिलाती है कि हमारी शांति और सुरक्षा के लिए सीमा पर तैनात जवान कितनी बड़ी कीमत चुकाते हैं। अखिलेश की शहादत और उनके परिवार का धैर्य आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
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