उत्तर प्रदेश में अप्रैल के महीने में भी कुदरत के तेवर बदले-बदले नजर आ रहे हैं। मंगलवार की दोपहर और रात को UP के कई हिस्सों में हुई झमाझम बारिश ने जहां आम लोगों को गर्मी से राहत दी और मौसम खुशनुमा बना दिया, वहीं राज्य के किसानों के लिए यह बारिश किसी आफत से कम साबित नहीं हुई। खेतों में खड़ी सोने जैसी गेहूं की फसल इस बेमौसम बरसात की वजह से जमीन पर बिछ गई है, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं।
UP के कई जिलों के लिए मौसम विभाग का ऑरेंज अलर्ट
मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने UP में अगले 48 घंटों के लिए भारी चेतावनी जारी की है। विभाग के मुताबिक, 8 और 9 अप्रैल को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी, ओलावृष्टि और बिजली गिरने (वज्रपात) की संभावना है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस दौरान हवाओं की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। ऐसी तेज हवाएं पकी हुई गेहूं की फसल के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती हैं।
पश्चिमी और पूर्वी UP में दिखेगा सबसे ज्यादा असर
आईएमडी की रिपोर्ट के अनुसार, वैसे तो पूरे UP में बारिश और वज्रपात का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन पश्चिमी UP के जिलों में इसका असर सबसे अधिक देखने को मिल सकता है। आगरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, बागपत, हापुड़ और सहारनपुर जैसे जिलों में भारी बारिश और ओले गिरने के आसार जताए गए हैं। इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश और अवध के इलाकों में भी बादल गरजने और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है।
किसानों की मेहनत पर फिर रहा पानी
इस समय UP के लगभग सभी इलाकों में गेहूं की फसल या तो कटाई के लिए पूरी तरह तैयार है या फिर कई जगहों पर कटाई का काम शुरू हो चुका है। किसानों का कहना है कि गेहूं के दाने इस समय भारी हो चुके हैं, ऐसे में जरा सी भी बारिश या तेज हवा फसल को गिरा देती है। अगर ओले गिरते हैं, तो दाने झड़ जाएंगे और फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। कई महीनों की मेहनत और लागत डूबने के डर से UP का अन्नदाता अब आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठा है।
राजस्थान में भी दिखा वेदर सिस्टम का प्रभाव
सिर्फ UP ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य राजस्थान में भी नए वेदर सिस्टम ने तबाही मचाई है। जयपुर, नागौर और टोंक समेत 10 से ज्यादा जिलों में मंगलवार को ओलावृष्टि और बारिश दर्ज की गई। फलोदी में तो रिकॉर्ड 42.2 मिमी बारिश हुई है। राजस्थान में 8 अप्रैल तक इस सिस्टम का असर रहेगा, जिसके बाद 10 अप्रैल से तापमान में बढ़ोतरी होने की संभावना है। वहां भी मंडियों को बंद रखना पड़ा है और फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
UP प्रशासन की अपील: रहें सतर्क
खराब मौसम को देखते हुए सरकार और मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें। आंधी और बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास शरण न लें। किसानों को सलाह दी गई है कि अगर संभव हो तो कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर ढक कर रखें। UP के मुख्यमंत्री ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे फसलों के नुकसान का जायजा लें ताकि प्रभावित किसानों को समय पर राहत पहुंचाई जा सके।
मौसम का यह बदलाव एक तरफ खुशनुमा अहसास करा रहा है, तो दूसरी तरफ यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका है। बेमौसम बारिश ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि खेती पूरी तरह से प्रकृति पर निर्भर है। अब सबकी निगाहें 9 अप्रैल के बाद होने वाले सुधार पर टिकी हैं। अगर UP में मौसम जल्द साफ नहीं हुआ, तो इस साल गेहूं के उत्पादन पर इसका सीधा और नकारात्मक असर पड़ना तय है।
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