News Channel TRP Ban: भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टेलीविजन मीडिया जगत को लेकर एक बड़ा और कड़ा फैसला सुनाया है। मंत्रालय ने News Channel की TRP Ban की अवधि को अगले चार हफ्तों के लिए और बढ़ा दिया है। ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वह फिलहाल न्यूज चैनलों का रेटिंग डेटा सार्वजनिक न करे। यह निर्णय पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी युद्ध और तनावपूर्ण स्थितियों के बीच न्यूज चैनलों द्वारा की जा रही 'सनसनीखेज' रिपोर्टिंग पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लिया गया है।
सनसनीखेज खबरों पर लगाम लगाने की कोशिश
सरकार का मानना है कि टीआरपी की रेस में आगे निकलने के लिए कई न्यूज चैनल अपुष्ट और डराने वाली खबरें प्रसारित कर रहे हैं। News Channel की TRP Ban का मुख्य उद्देश्य आम जनता के बीच फैल रहे भ्रम और डर को रोकना है। खासकर उन परिवारों के लिए यह स्थिति अधिक चिंताजनक हो जाती है जिनके रिश्तेदार प्रभावित युद्ध क्षेत्रों में रह रहे हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि रेटिंग बंद होने से चैनलों के बीच नंबर-1 बनने की अंधी दौड़ थमेगी और वे जिम्मेदार पत्रकारिता की ओर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
विज्ञापनों और राजस्व पर पड़ेगा सीधा असर
न्यूज इंडस्ट्री के लिए टीआरपी ऑक्सीजन की तरह काम करती है। News Channel की TRP Ban होने से चैनलों के विज्ञापन बाजार (Ad Market) पर गहरा असर पड़ने की संभावना है, क्योंकि विज्ञापनों की दरें सीधे तौर पर रेटिंग से जुड़ी होती हैं। यह पहली बार नहीं है जब ऐसा हुआ है; इससे पहले 6 मार्च 2026 को भी चार हफ्तों के लिए रोक लगाई गई थी, जिसे अब मौजूदा संवेदनशीलता को देखते हुए आगे बढ़ा दिया गया है। साल 2020 में भी टीआरपी घोटाले के आरोपों के बाद रेटिंग्स को लंबे समय तक रोका गया था।
BARC और सरकार का रुख
BARC भारत में टीवी दर्शकों की संख्या मापने वाली एकमात्र अधिकृत संस्था है। सरकार का तर्क है कि जनहित सर्वोपरि है और मीडिया को समाज के प्रति अपनी जवाबदेही समझनी चाहिए। News Channel की TRP Ban के माध्यम से सरकार यह संदेश देना चाहती है कि संकट के समय में रेटिंग से अधिक महत्वपूर्ण ‘सटीक और विश्वसनीय’ जानकारी साझा करना है।
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