उत्तर भारत के विशाल भूभाग में प्रकृति का मिजाज अचानक बदल गया है। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और ऊपरी हवा में बने चक्रवाती परिसंचरण के संयुक्त प्रभाव से देश के उत्तरी हिस्सों में भारी तबाही और अस्थिरता की स्थिति बनी हुई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि अगले कुछ दिनों तक उत्तर भारत के राज्यों में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं, गरज के साथ बौछारें और ओलावृष्टि का दौर जारी रहेगा। इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में देखने को मिल रहा है।
पश्चिमी विक्षोभ का असर और वैज्ञानिक कारण
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान में एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान और उसके आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय है। इसके साथ ही, उत्तर भारत के ऊपर उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम (Subtropical Western Jet Stream) लगातार सक्रिय बनी हुई है। इन मौसमी प्रणालियों के मिलने से वायुमंडल में भारी हलचल पैदा हुई है। विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे पहाड़ी इलाकों में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है, जहाँ 64.5 से 115.5 मिमी तक भारी वर्षा होने का अनुमान है। इन क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन (Landslides) का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे यातायात और सामान्य जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
उत्तर भारत के मैदानी राज्यों में ओलावृष्टि का कहर
मैदानी इलाकों की बात करें तो राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में मौसम ने शनिवार से ही करवट ले ली है। राजस्थान के जयपुर, अजमेर, बीकानेर और कोटा डिवीजनों में शनिवार दोपहर बाद तेज आंधी के साथ ओले गिरे, जिससे खेतों में सफेद चादर बिछ गई। उत्तर भारत के किसानों के लिए यह स्थिति किसी आपदा से कम नहीं है, क्योंकि इस समय गेहूं और अन्य रबी की फसलें पककर तैयार हैं। ओलावृष्टि और तेज हवाओं के कारण फसलें खेतों में बिछ गई हैं, जिससे पैदावार और गुणवत्ता दोनों पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। 6 अप्रैल की दोपहर से एक और नया और शक्तिशाली विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जो संकट को और बढ़ा सकता है।
तापमान में गिरावट और स्वास्थ्य पर असर
मौसम के इस अचानक यू-टर्न से उत्तर भारत के तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। जहाँ कुछ दिन पहले तक हल्की गर्मी का अहसास होने लगा था, वहीं अब फिर से वातावरण में ठंडक घुल गई है। पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर में न्यूनतम तापमान 16.2 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया है। हालाँकि, इसके विपरीत पश्चिम बंगाल जैसे पूर्वी हिस्सों में अभी भी उमस भरी गर्मी का प्रकोप जारी है। उत्तर भारत में तापमान की यह अस्थिरता स्वास्थ्य के लिहाज से भी चुनौतीपूर्ण है, जिससे सर्दी-जुकाम और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
दक्षिण भारत तक पहुंचा मौसम का प्रभाव
यह मौसमी बदलाव केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं है। दक्षिण भारत के केरल और माहे में भी भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है। यहाँ भी गरज के साथ तेज बौछारें पड़ने की संभावना है, जिससे स्थानीय स्तर पर जलभराव की स्थिति बन सकती है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि उत्तर से दक्षिण तक वायुमंडल में नमी का प्रवाह बढ़ रहा है, जो अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर बारिश का कारण बनेगा।
सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
आने वाले संकट को देखते हुए उत्तर भारत के प्रशासन और मौसम विभाग ने आम जनता के लिए एडवाइजरी जारी की है:
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आंधी और बिजली कड़कने के दौरान खुले स्थानों या पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें।
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बिजली गिरने की स्थिति में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग सीमित करें।
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किसान भाई कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखें और सिंचाई को फिलहाल टाल दें।
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तेज हवाओं के दौरान वाहनों को मजबूत छत के नीचे पार्क करें ताकि ओलों से नुकसान न हो।
उत्तर भारत में अगले 48 से 72 घंटे मौसम के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। प्रकृति के इस बदलते रूप ने जहाँ एक ओर गर्मी से राहत दी है, वहीं दूसरी ओर अन्नदाता के लिए नई मुसीबतें खड़ी कर दी हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह नुकसान का त्वरित आकलन करे और प्रभावित किसानों को राहत पहुँचाने के लिए तैयार रहे।
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