सावधान बैंक! अब ग्राहकों को ‘चूना’ लगाया तो जेब होगी ढीली; जुलाई से लागू होगा RBI का सख्त नियम, पूरा पैसा और हर्जाना भी देना होगा

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नई दिल्ली: अगर आप भी बैंक जाते हैं और वहां के कर्मचारी आपको बातों में उलझाकर लोन के साथ इंश्योरेंस या फिक्स्ड डिपॉजिट के नाम पर म्युचुअल फंड जैसे थर्ड पार्टी उत्पाद थमा देते हैं, तो यह खबर आपके लिए बड़ी राहत लेकर आई है। बैंकों द्वारा ग्राहकों को गुमराह कर वित्तीय उत्पाद बेचने यानी ‘मिस-सेलिंग’ के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब आर-पार के मूड में है। आरबीआई एक ऐसा कड़ा कानून लाने जा रहा है, जिससे न केवल बैंक की मनमानी रुकेगी, बल्कि पीड़ित ग्राहक को उसका एक-एक पैसा वापस मिलेगा।

30 दिन के अंदर शिकायत और रिफंड की गारंटी

आरबीआई के नए मसौदे के मुताबिक, यह नियम आगामी जुलाई से लागू होने की संभावना है। नए कानून के तहत अगर किसी ग्राहक को लगता है कि उसे भ्रामक जानकारी देकर कोई उत्पाद बेचा गया है, तो वह बैंक में इसकी शिकायत दर्ज करा सकेगा। सबसे अहम बात यह है कि अगर शिकायत सही पाई जाती है, तो बैंक को ग्राहक का पूरा पैसा वापस करना होगा और उस उत्पाद (पॉलिसी या फंड) को तुरंत रद्द करना होगा। इतना ही नहीं, अगर उस गलत निवेश की वजह से ग्राहक को कोई वित्तीय नुकसान हुआ है, तो बैंक को उस नुकसान की भरपाई भी हर्जाने के तौर पर करनी होगी।

कर्मचारियों के ‘इंसेंटिव’ पर भी चलेगी कैंची

अक्सर देखा जाता है कि बैंक कर्मचारी अपना टारगेट पूरा करने और मोटा कमीशन या ‘इंसेंटिव’ पाने के चक्कर में ग्राहकों को गलत स्कीम बेच देते हैं। आरबीआई ने अब इस जड़ पर ही प्रहार किया है। नए नियमों के अनुसार, अगर किसी उत्पाद की बिक्री में मिस-सेलिंग पाई जाती है, तो बैंक उस कर्मचारी को मिलने वाले किसी भी प्रकार के इंसेंटिव पर रोक लगाएगा। साथ ही, अब बैंक अपने मुख्य उत्पादों (जैसे लोन) के साथ किसी थर्ड पार्टी उत्पाद को ‘टाई-अप’ या जबरन जोड़कर नहीं बेच सकेंगे।

फीडबैक मैकेनिज्म: 30 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बैंकों को अब बिक्री के बाद भी जवाबदेह बनाया गया है। उत्पाद बेचने के 30 दिनों के भीतर बैंक को ग्राहक से फीडबैक लेना होगा कि वह उस स्कीम से कितना संतुष्ट है और क्या उसे पूरी जानकारी दी गई थी। इस फीडबैक के आधार पर हर छह महीने में एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। बैंकों के लिए यह इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि थर्ड पार्टी उत्पादों से उनकी कमाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। उदाहरण के तौर पर, एसबीआई ने वित्त वर्ष 2024-25 में कमीशन से ही ₹4522 करोड़ की भारी-भरकम कमाई की है।

सरकार और वित्त मंत्री की सख्ती का असर

मिस-सेलिंग के खिलाफ यह मोर्चा तब खुला है जब खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने बैंकों को चेतावनी दी थी कि उनका मुख्य काम ‘जमा लेना और उधार देना’ है, न कि बीमा एजेंट बनकर ग्राहकों को लूटना। छोटे शहरों के कम जानकार जमाकर्ता अक्सर इन बैंकों का आसान शिकार बनते हैं, जिन्हें ‘ज्यादा मुनाफे’ का लालच देकर गलत जगह निवेश करा दिया जाता है। आरबीआई के इस कदम से बैंकिंग सेक्टर में जवाबदेही बढ़ेगी और आम आदमी की मेहनत की कमाई सुरक्षित रहेगी।

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