PM Modi की राज्यसभा में हुंकार: मिडिल ईस्ट संकट के बीच ‘आत्मनिर्भर भारत’ का नया रोडमैप

PM Modi

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पश्चिम एशिया में पिछले कुछ हफ्तों से जो हालात बने हुए हैं, उसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। युद्ध की वजह से न सिर्फ मानवीय संकट खड़ा हुआ है, बल्कि ग्लोबल इकोनॉमी और सप्लाई चेन पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है। मंगलवार को संसद के उच्च सदन में PM Modi ने इसी मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि हम इन बदलती परिस्थितियों से अनजान नहीं हैं और भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों को लेकर पूरी तरह सजग है। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है।

पश्चिम एशिया संकट और भारत की चिंता

पीएम मोदी ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे इस युद्ध को अब तीन सप्ताह से ज्यादा का समय बीत चुका है। यह इलाका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का केंद्र है, इसलिए वहां की अस्थिरता का सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ता है। प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि इस स्थिति ने दुनिया के सामने एक गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। हमारे लिए सबसे बड़ी चिंता व्यापारिक रास्तों को लेकर है, क्योंकि यहीं से पेट्रोल, डीजल, गैस और खाद (फर्टिलाइजर) जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई होती है।

पीएम मोदी का मंत्र: किसी एक स्रोत पर निर्भरता खत्म करना

इस संकट के बीच PM Modi ने एक बहुत ही व्यावहारिक समाधान पेश किया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की प्राथमिकता यह है कि ईंधन के लिए हम किसी एक देश या एक ही स्रोत पर निर्भर न रहें। पहले हम अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सिर्फ 27 देशों से आयात करते थे, लेकिन अब भारत ने अपने विकल्पों को बढ़ाकर 41 देशों तक पहुंचा दिया है।

इसे ‘एनर्जी इंपोर्ट का डायवर्सिफिकेशन’ कहा जाता है। इसका फायदा यह है कि अगर किसी एक क्षेत्र में युद्ध या तनाव होता है, तो हम दूसरे देशों से अपनी जरूरतें पूरी कर सकते हैं। इसके अलावा, सरकार अब घरेलू स्तर पर भी पीएनजी (PNG) और एलपीजी (LPG) के उत्पादन और नेटवर्क को और मजबूत कर रही है।

कच्चे तेल का सुरक्षित भंडार और हमारी तैयारी

युद्ध के समय में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि अगर सप्लाई अचानक रुक जाए तो क्या होगा? इस पर PM Modi ने देश को भरोसा दिलाया कि भारत ने पिछले 11 वर्षों में अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (कच्चे तेल के भंडार) को बहुत मजबूत किया है। देश में लगभग 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का रिजर्व तैयार किया जा चुका है और 65 लाख मीट्रिक टन के अतिरिक्त भंडार पर काम चल रहा है। हमारी तेल कंपनियां भी अपनी तरफ से पर्याप्त स्टॉक रखती हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत के पास क्रूड ऑयल की निरंतर सप्लाई के लिए पर्याप्त इंतजाम हैं, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है।

आत्मनिर्भर भारत: विदेशी जहाजों पर निर्भरता कम करने की पहल

एक चौंकाने वाला तथ्य यह है कि भारत का 90 प्रतिशत से ज्यादा तेल विदेशी जहाजों के जरिए आता है। संकट के समय विदेशी कंपनियां अक्सर अपने जहाजों को जोखिम वाले इलाकों में भेजने से कतराती हैं। PM Modi ने कहा कि इस स्थिति को बदलने के लिए सरकार ने 70,000 करोड़ रुपये का एक बड़ा अभियान शुरू किया है, जिसके तहत ‘मेड इन इंडिया’ जहाज बनाए जाएंगे। हम सिर्फ जहाज बनाने ही नहीं, बल्कि उनकी मरम्मत (मेंटेनेंस) और ब्रेकिंग की सुविधाओं में भी खुद को सक्षम बना रहे हैं। यह कदम हमें वैश्विक संकटों के दौरान दूसरों के भरोसे रहने से बचाएगा।

डिफेंस और दवाइयों के मामले में बढ़ती मजबूती

ऊर्जा के साथ-साथ PM Modi ने डिफेंस और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि आज भारत अपनी जरूरत के ज्यादातर हथियार खुद बना रहा है। यही नहीं, दवाओं के लिए जरूरी कच्चे माल यानी API (Active Pharmaceutical Ingredient) के लिए भी हम पहले दूसरे देशों पर बहुत ज्यादा निर्भर थे, लेकिन अब देश में ही इसका एक बड़ा इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है। रेयर अर्थ मिनरल्स, जो आधुनिक तकनीक के लिए बहुत जरूरी हैं, उनके मामले में भी विदेशी निर्भरता को कम करने के लिए कड़े फैसले लिए जा रहे हैं।

भविष्य की चुनौतियां और सरकार की रणनीति

अंत में, PM Modi ने देशवासियों से आह्वान किया कि हमें हर चुनौती के लिए मानसिक और रणनीतिक रूप से तैयार रहना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि इस युद्ध के दुष्प्रभाव लंबे समय तक रह सकते हैं क्योंकि हालात पल-पल बदल रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी विश्वास दिलाया कि सरकार पूरी तरह सतर्क है और देश की जनता का हित उनके लिए सबसे ऊपर है। सरकार की रणनीति यही है कि हम हर क्षेत्र में इतने मजबूत हो जाएं कि दुनिया की किसी भी उठापटक का हमारे विकास पर कम से कम असर पड़े।

प्रधानमंत्री का यह संबोधन न केवल मौजूदा संकट पर भारत के रुख को स्पष्ट करता है, बल्कि भविष्य की एक मजबूत तस्वीर भी पेश करता है। ऊर्जा सुरक्षा से लेकर आत्मनिर्भरता तक, सरकार के कदम यह बताते हैं कि हम अब केवल परिस्थितियों के शांत होने का इंतजार नहीं कर रहे, बल्कि खुद को इतना सक्षम बना रहे हैं कि कोई भी संकट हमें रोक न सके।

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