मेरठ के मवाना थाना क्षेत्र में पुलिस ने नकली NCERT किताबों के बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। मेरठ के मवाना पुलिस द्वारा 03 शातिर अभियुक्त राहुल यादव, राहुल राणा और बाबर को गिरफ्तार किया गया, उनके कब्जे से नकली NCERT की पुस्तकों की बड़ी खेप व घटना में प्रयुक्त 02 वाहन बरामद किए हैं। सीओ मवाना पंकज लवानिया ने बताया कि थाना मवाना पुलिस द्वारा ग्राम कुड़ी कमालपुर नहर पुल पर चेकिंग के दौरान 02 वाहनों से NCERT की लगभग 2,000 नकली पुस्तकें बरामद की है।
गिरफ्तार अभियुक्तों की निशानदेही पर ग्राम मटौरा स्थित गोदाम से करीब 11,000 अतिरिक्त नकली पुस्तकें भी बरामद की गयी। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि ये पुस्तकें अवैध रूप से छापकर बाजार में सप्लाई की जा रही थीं। विशेषज्ञ टीम द्वारा बरामद पुस्तकों की कीमत लगभग 15 लाख रुपये आंकी गई है। इस संबंध में थाना मवाना पर काॅपीराइट एक्ट के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कर विधिक कार्यवाही की जा रही है।
शुक्रवार रात एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने शिक्षा के नाम पर चल रहे एक बड़े काले कारोबार का पर्दाफाश हुआ है। ताज्जुब की बात यह है कि ये किताबें कक्षा 1 से लेकर 12वीं तक के छात्रों के लिए थीं, जिन्हें असली बताकर बाजार में खपाने की तैयारी थी।

चेकिंग के दौरान खुली पोल
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब एसपी देहात अभिजीत कुमार को सूचना मिली कि मवाना क्षेत्र में नकली किताबों की सप्लाई होने वाली है। पुलिस ने जाल बिछाया और कुड़ी कमालपुर नहर पुल पर चेकिंग शुरू कर दी। इसी दौरान एक कार और टाटा मैजिक को रोका गया। जब इनकी तलाशी ली गई, तो पुलिस के होश उड़ गए। इन गाड़ियों में NCERT की करीब 2000 किताबें भरी हुई थीं। पुलिस ने तुरंत कार सवार राहुल राणा, हर्ष और टाटा मैजिक में मौजूद बाबर और राहुल यादव को हिरासत में ले लिया।
गोदाम में मिला किताबों का जखीरा
पकड़े गए आरोपियों से जब सख्ती से पूछताछ की गई, तो उन्होंने एक बड़े राज से पर्दा उठाया। उन्होंने बताया कि मवाना के मटौरा गांव में एक गोदाम बनाया गया है, जहां इन किताबों को छिपाकर रखा जाता है। पुलिस ने जब उस गोदाम पर छापेमारी की, तो वहां 11 हजार और नकली किताबें मिलीं। यानी कुल मिलाकर 13 हजार किताबें पुलिस के हाथ लगीं। जांच के लिए NCERT की विशेषज्ञ टीम को भी मौके पर बुलाया गया, जिन्होंने पुष्टि की कि ये सभी किताबें पूरी तरह से नकली हैं।

कहाँ होने वाली थी सप्लाई?
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे इन फर्जी पुस्तकों को मोदीनगर और अल्मोड़ा के पुस्तक भंडारों में सप्लाई करने जा रहे थे। मेरठ और पश्चिमी यूपी में NCERT की नकली किताबों का धंधा कोई नया नहीं है। इससे पहले भी कई बड़े नामों पर कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन कुछ समय शांत रहने के बाद ये लोग दोबारा सक्रिय हो जाते हैं। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन किताबों की छपाई कहाँ हो रही थी और इस नेटवर्क के पीछे और कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं।

नकली किताबों की पहचान और असर
नकली NCERT किताबें न केवल सरकार को राजस्व का नुकसान पहुँचाती हैं, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ करती हैं। अक्सर इन किताबों में छपाई की गलतियां होती हैं और पन्नों की क्वालिटी भी बेहद खराब होती है। फिलहाल पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ मवाना थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया है। गिरफ्तार किए गए लोग मेरठ, बुलंदशहर और मवाना के रहने वाले हैं। पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि शिक्षा के क्षेत्र में ऐसा फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सीओ मवाना Pankaj Lawania के अनुसार, ग्राम कुड़ी कमालपुर नहर पुल पर चेकिंग के दौरान दो वाहनों से लगभग 2,000 नकली किताबें बरामद हुईं। इसके बाद आरोपियों की निशानदेही पर ग्राम मटौरा स्थित गोदाम से करीब 11,000 अतिरिक्त नकली पुस्तकें बरामद की गईं।
मेरठ पुलिस की इस मुस्तैदी ने हजारों छात्रों को ठगे जाने से बचा लिया है। NCERT की किताबों की बढ़ती मांग का फायदा उठाकर ये जालसाज अपनी जेबें भर रहे थे। अगर आप भी अपने बच्चों के लिए किताबें खरीद रहे हैं, तो हमेशा अधिकृत विक्रेताओं से ही लें और होलोग्राम व छपाई की जांच जरूर करें। पुलिस की यह कार्रवाई इस अवैध धंधे पर एक बड़ी चोट है।
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