मथुरा के छाता क्षेत्र में Farsa Wale Baba चंद्रशेखर की मौत के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। आक्रोशित भीड़ ने दिल्ली हाईवे जाम कर पथराव किया, जिससे कई पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त हुए और पुलिसकर्मी घायल हो गए। मथुरा में हुई घटना को लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने बताया कि रात करीब 3 से 4 बजे के बीच चंद्रशेखर उर्फ फरसा बाबा ने एक संदिग्ध वाहन को रोका था। घने कोहरे के कारण पीछे से आए राजस्थान नंबर के ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। जांच में कंटेनर में किराने का सामान मिला है और गोतस्करी की पुष्टि नहीं हुई। घटना के बाद कुछ लोगों ने जाम और पथराव किया, जिसे पुलिस ने नियंत्रित कर लिया। मामले में आगे की कार्रवाई जारी है। इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख़्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को कड़ा एक्शन लेने का निर्देश देते हुए कहा कि 'ज़िम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो, आरोपियों को भी बख़्शा नहीं जाएगा'।

तड़के सुबह की वो घटना जिसने सबको झकझोर दिया
आज मथुरा से एक बहुत ही दुखद और तनावपूर्ण खबर सामने आई है। कान्हा की नगरी में ‘फरसा वाले बाबा’ के नाम से मशहूर साधु चंद्रशेखर सिंह की एक सड़क हादसे में जान चली गई। शनिवार तड़के हुई इस घटना के बाद पूरे इलाके में माहौल इतना बिगड़ गया कि दिल्ली-मथुरा हाईवे घंटों तक रणक्षेत्र बना रहा। हजारों की भीड़, पथराव, आंसू गैस के गोले और पुलिस की लाठीचार्ज—आज मथुरा ने वो सब देखा जो कोई नहीं चाहता था। चलिए समझते हैं कि आखिर पूरी बात क्या थी और क्यों फरसा वाले बाबा की मौत पर इतना बड़ा विवाद खड़ा हो गया।
यह पूरा मामला शनिवार तड़के करीब 4 बजे का है। बरसाना के आजनौंख गांव में गोशाला चलाने वाले Farsa Wale Baba कोसीकलां के कोटवन थाना क्षेत्र में एक ट्रक की चपेट में आ गए। बाबा की मौके पर ही मौत हो गई, लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए। जैसे ही बाबा की मौत की खबर फैली, उनके अनुयायी और स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए। गुस्सा इतना ज्यादा था कि लोगों ने बाबा का शव सड़क पर रखकर दिल्ली-मथुरा हाईवे जाम कर दिया।
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क्या वाकई गोतस्करों ने बाबा को कुचला?
इस पूरी घटना में दो अलग-अलग कहानियां यानी थ्योरी सामने आ रही हैं। Farsa Wale Baba के साथ मौजूद उनके शिष्यों का दावा है कि बाबा को सूचना मिली थी कि एक ट्रक में गोवंश भरकर ले जाया जा रहा है। बाबा ने अपनी बाइक से उस ट्रक का करीब 7 किलोमीटर तक पीछा किया। नवीपुर गांव के पास उन्होंने ट्रक को ओवरटेक करके अपनी बाइक सामने खड़ी कर दी ताकि उसे रोका जा सके। शिष्यों का आरोप है कि गोतस्करों ने ट्रक रोकने के बजाय उसकी रफ्तार बढ़ा दी और बाबा को कुचलते हुए भाग निकले।
पुलिस की थ्योरी और कोहरे का हवाला
दूसरी तरफ, मथुरा पुलिस इस मामले को एक सड़क हादसा बता रही है। पुलिस का कहना है कि Farsa Wale Baba शक के आधार पर एक कंटेनर को रोककर उसकी चेकिंग कर रहे थे। उस समय इलाके में घना कोहरा था। इसी बीच पीछे से आ रहे एक दूसरे ट्रक ने खड़े हुए कंटेनर को टक्कर मार दी और बाबा उसकी चपेट में आ गए। पुलिस ने यह भी साफ किया कि जिस कंटेनर की चेकिंग हो रही थी, उसमें गोवंश नहीं बल्कि किराने का सामान भरा था। इस हादसे में दूसरे ट्रक का चालक भी चोटिल हुआ है।

हाईवे पर घंटों चला पथराव और लाठीचार्ज
जब पुलिस जाम खुलवाने और Farsa Wale Baba का शव कब्जे में लेने पहुंची, तो भीड़ बेकाबू हो गई। लोगों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की 5-6 गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए और जमकर नारेबाजी की। स्थिति इतनी खराब हो गई कि पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े। प्रदर्शनकारी लगातार मांग कर रहे थे कि दोषियों का तुरंत एनकाउंटर किया जाए।
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प्रशासन के आश्वासन के बाद शांत हुआ मामला
काफी जद्दोजहद के बाद, ग्रामीण Farsa Wale Baba का शव लेकर अपनी गोशाला पहुंचे। वहां प्रशासन और ग्रामीणों के बीच लंबी बातचीत हुई। ग्रामीणों ने मांग रखी कि बाबा का स्मारक बनाया जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। प्रशासन से ठोस आश्वासन मिलने के बाद ही बाबा का अंतिम संस्कार किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस घटना का संज्ञान लिया है और अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मामले की गहराई से जांच हो और जो भी दोषी हो, उसे बख्शा न जाए।
आस्था और कानून के बीच का संघर्ष
Farsa Wale Baba इलाके में अपनी गोसेवा और सख्त मिजाज के लिए जाने जाते थे। उनकी मौत ने एक बार फिर गोसेवा और सुरक्षा से जुड़े संवेदशनशील मुद्दों को हवा दे दी है। पुलिस का कहना है कि भ्रामक सूचनाओं की वजह से माहौल ज्यादा बिगड़ा, जबकि अनुयायियों का मानना है कि बाबा ने गायों की रक्षा के लिए अपनी जान दी है। फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन तनाव अभी भी महसूस किया जा सकता है।
मथुरा की यह घटना हमें बताती है कि कैसे एक छोटी सी अफवाह या गलतफहमी बड़े बवाल का रूप ले सकती है। Farsa Wale Baba की मौत का सच जो भी हो, लेकिन इस हंगामे में जो सरकारी संपत्ति का नुकसान हुआ और पुलिसकर्मी घायल हुए, वह चिंताजनक है। कानून को हाथ में लेना कभी भी समाधान नहीं होता। अब सबकी नजरें पुलिस की जांच पर टिकी हैं कि क्या यह वाकई एक हादसा था या इसके पीछे कोई गहरी साजिश थी।
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