उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने के लिए एक अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती (स्क्रीनिंग परीक्षा) नियमावली-2025’ को स्वीकृति दे दी गई है। इस फैसले के तहत अब समूह ‘क’ और ‘ख’ के विशेषज्ञ पदों पर सिर्फ साक्षात्कार के आधार पर नहीं, बल्कि लिखित परीक्षा के माध्यम से भर्ती होगी। इसमें लिखित परीक्षा को 75 प्रतिशत व साक्षात्कार को 25 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस बदलाव से मेरिट अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगी।
अब तक विशेषज्ञ पदों पर नियुक्ति के लिए केवल इंटरव्यू आयोजित किया जाता था, जिससे चयन प्रक्रिया पर अक्सर सवाल उठते थे। लेकिन नई नियमावली लागू होने के बाद उम्मीदवारों को पहले लिखित परीक्षा देनी होगी। इस परीक्षा में दो पेपर होंगे — एक सामान्य ज्ञान पर आधारित और दूसरा संबंधित विषय के विशेषज्ञ ज्ञान से जुड़ा होगा। इस प्रणाली से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि चयन केवल योग्यता और ज्ञान के आधार पर हो। आयोग के सूत्रों के मुताबिक, यह बदलाव लंबे समय से विचाराधीन था और अब इसे औपचारिक मंजूरी मिल गई है।
सूत्रों के अनुसार, आयोग पहले लिखित परीक्षा और साक्षात्कार को बराबर महत्व देने का पक्षधर था, लेकिन उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में तय किया गया कि लिखित परीक्षा का वजन बढ़ाया जाए। इसके बाद नियमावली में संशोधन कर 75:25 का अनुपात तय किया गया। योगी सरकार का मानना है कि यह सुधार न केवल चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगा, बल्कि युवाओं में विश्वास भी बढ़ाएगा कि भर्ती में किसी तरह का पक्षपात नहीं होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे राज्य में प्रतिभाशाली युवाओं को समान अवसर मिलेगा और चयन प्रक्रिया और अधिक प्रतिस्पर्धात्मक बनेगी।
इन प्रस्तावों को भी मिली स्वीकृति
कैबिनेट की इस बैठक में अन्य अहम प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। प्रदेश में धान, गेहूं और मोटे अनाजों की सरकारी खरीद के लिए ई-पाप मशीनों की स्थापना को हरी झंडी दी गई है। इसके अलावा नैपियर घास की जड़ें उपलब्ध कराने और गो-आश्रय स्थलों की भूमि पर हरा चारा उत्पादन से जुड़ी योजनाओं को भी स्वीकृति दी गई। साथ ही शीरा वर्ष 2025-26 के लिए नई नीति को मंजूरी दी गई है। सरकार का कहना है कि इन सभी फैसलों से न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि कृषि और रोजगार क्षेत्र में भी सुधार देखने को मिलेगा।
