मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की तृतीय हिंदी सलाहकार समिति की हुई बैठक सम्पन्न

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नई दिल्ली। विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) की अध्यक्षता में आज मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की तृतीय संयुक्त हिंदी सलाहकार समिति की बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई। बैठक में समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सभी सदस्यों का मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा स्वागत किया गया।

बैठक के दौरान मंत्रालय के दोनों विभागों—मत्स्यपालन विभाग और पशुपालन एवं डेयरी विभाग—की ओर से राजभाषा हिंदी के कार्यान्वयन से संबंधित प्रगति और प्रयासों पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। समिति के सदस्यों ने प्रस्तुत की गई उपलब्धियों की सराहना की और हिंदी के प्रयोग को और अधिक सशक्त बनाने पर बल दिया।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह और राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल ने संयुक्त रूप से पशुपालन एवं डेयरी विभाग तथा मत्स्यपालन विभाग की हिंदी पत्रिकाओं—सुरभि, मत्स्य भारती, मत्स्य कीर्ति—के साथ-साथ विभागीय शब्दावली का विमोचन किया।

“हिंदी एक सशक्त भाषा है”

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि हिंदी एक सशक्त और समृद्ध भाषा है तथा हमें हीन भावना से ऊपर उठकर सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में इसका अधिक से अधिक प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदी के व्यापक उपयोग से ही इसे और आगे बढ़ाया जा सकता है।

“घर से शुरू हो हिंदी का प्रयोग”

राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल ने कहा कि हिंदी की बेहतरी के लिए इसका प्रयोग हमें अपने घर से ही शुरू करना होगा। तभी आने वाली पीढ़ी को हिंदी की वास्तविक महत्ता का बोध हो सकेगा और भाषा की निरंतरता बनी रहेगी।

मंत्रालय के दोनों मंत्रियों ने मत्स्यपालन विभाग और पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा किए गए बेहतर राजभाषा कार्यान्वयन के लिए संबंधित अधिकारियों को बधाई दी। साथ ही उन्होंने मंत्रालय के दैनिक कार्यालयी कार्यों में राजभाषा हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग की अपील की।

कार्यसूची पर हुए विस्तृत विचार-विमर्श के दौरान समिति के सदस्यों ने राजभाषा हिंदी के कार्यान्वयन हेतु किए गए प्रयासों की सराहना की। सदस्यों ने मंत्रालय में हिंदी के प्रयोग को और प्रोत्साहित करने तथा निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपने सुझाव और विचार साझा किए। विशेष रूप से गैर-सरकारी सदस्यों ने पिछली बैठक की तुलना में दोनों विभागों में हिंदी के प्रयोग की दिशा में हुई उल्लेखनीय प्रगति की प्रशंसा की।

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