पश्चिम बंगाल में SIR का मुद्दा पहले से ही राजनीतिक माहौल को गरमाए हुए है। इसी बीच विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित विधायक और अल्पसंख्यक समुदाय के प्रभावशाली नेता हुमायूं कबीर ने सोमवार, 22 दिसंबर 2025 को अपनी नई राजनीतिक पार्टी के गठन का ऐलान कर दिया।
हुमायूं कबीर ने अपनी पार्टी का नाम जनता उन्नयन पार्टी रखा है। उनके इस कदम को बंगाल की राजनीति में बड़ा सियासी संकेत माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब विधानसभा चुनाव में अब छह महीने से भी कम का वक्त बचा है।
क्या TMC को मात दे पाएंगे हुमायूं कबीर?
हुमायूं कबीर की ओर से यह बड़ा फैसला मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी शैली की मस्जिद की नींव रखने के आरोपों के बाद TMC से निलंबन के कुछ ही दिनों के भीतर आया है।
बेलडांगा में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए कबीर ने साफ कहा कि उनका लक्ष्य आगामी विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर करना है।
उनके इस ऐलान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या हुमायूं कबीर बंगाल में मुस्लिम वोट बैंक को विभाजित करने में कामयाब हो पाएंगे। यदि ऐसा हुआ, तो यह TMC के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
क्या मुस्लिम वोटरों को एकजुट कर पाएंगे कबीर?
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में लंबे समय से TMC को सत्ता में बनाए रखने में मुस्लिम वोटरों की अहम भूमिका रही है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TMC से असंतुष्ट मुस्लिम मतदाताओं का एक वर्ग हुमायूं कबीर की नई पार्टी की ओर आकर्षित हो सकता है।
बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण और एक नए राजनीतिक मोर्चे के गठन की उनकी घोषणा ने असंतोष झेल रहे मुस्लिम समुदाय में उम्मीद की एक नई किरण दिखाई है। ऐसे में TMC की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि पहले से ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) उसे कड़ी चुनौती दे रही है।
हुमायूं कबीर का चुनावी एजेंडा
हुमायूं कबीर ने 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए अपनी पार्टी की ओर से 8 उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि वे खुद बेलडांगा और रेजिनगर सीट से चुनाव लड़ेंगे। गौरतलब है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में इन दोनों सीटों पर TMC ने जीत दर्ज की थी।
पार्टी का घोषणापत्र जारी करते हुए कबीर ने कहा कि वे अपने चुनाव चिन्ह के रूप में ‘मेज’ को पहली पसंद रखेंगे, जिस पर उन्होंने 2016 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। वहीं दो गुलाब उनकी दूसरी पसंद होगी।
हुमायूं कबीर का उतार-चढ़ाव भरा राजनीतिक सफर
हुमायूं कबीर का राजनीतिक करियर कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा है।
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2015 में ममता बनर्जी की आलोचना और अभिषेक बनर्जी को लेकर आरोपों के चलते उन्हें TMC से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया।
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2016 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने रेजिनगर सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा, लेकिन कांग्रेस से हार गए।
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इसके बाद वे कांग्रेस में शामिल हुए और फिर 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में चले गए, जहां से उन्हें मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया।
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बाद में उन्होंने TMC में वापसी की और 2021 में भरतपुर सीट से विधायक चुने गए।
अब एक बार फिर नई पार्टी के साथ मैदान में उतरकर हुमायूं कबीर ने बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे दी है।







