वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के तहत सरकार ने एक महत्वाकांक्षी पोर्टल ‘उम्मीद’ शुरू किया, जिसका उद्देश्य देश भर में वक्फ संपत्तियों का उचित प्रबंधन और पंजीकरण करना है। यह पोर्टल 6 जून 2025 को लॉन्च हुआ था और इसका उद्देश्य सभी वक्फ संपत्तियों का जियो-टैगिंग और डिजिटल लिस्ट तैयार करना था। इसके तहत वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की समयसीमा छह महीने थी, जो 5 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रही है।
हालांकि इस पोर्टल पर पंजीकरण की आखिरी तारीख के करीब आते-आते कई तकनीकी समस्याओं, पुराने दस्तावेजों की कमी और अपर्याप्त समय के कारण बड़ी संख्या में वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण नहीं हो सका। इससे संबंधित पक्षों और सांसदों ने पोर्टल की मियाद बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से इस संभावना को खारिज कर दिया है।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार (5 दिसंबर) को बयान दिया कि सरकार पोर्टल की मियाद बढ़ाने पर विचार नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि 5 दिसंबर के बाद जो लोग वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण नहीं करा पाएंगे, उन्हें सजा का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन मुत्तवलियों (वक्फ का देखभाल करने वाले) को तीन महीने तक जुर्माना या कठोर सजा से राहत दी जाएगी, जो पंजीकरण करने की कोशिश करने के बावजूद किसी कारणवश सफल नहीं हो सके।
इससे पहले, केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पोर्टल पर अब तक 1.51 लाख वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण हो चुका था। उन्होंने यह भी बताया कि जो लोग पंजीकरण नहीं करा पाए हैं, वे वक्फ न्यायाधिकरण का रुख कर सकते हैं।
वक्फ संपत्तियां धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। ये संपत्तियां न केवल धार्मिक कार्यों के लिए उपयोग होती हैं, बल्कि सामाजिक कल्याण कार्यों में भी योगदान देती हैं। वक्फ संपत्तियों के प्रभावी प्रबंधन से समाज के विभिन्न वर्गों को लाभ हो सकता है।
इस संदर्भ में उम्मीद पोर्टल का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता बढ़ाना और उनकी उचित निगरानी सुनिश्चित करना है। यह पोर्टल वक्फ संपत्तियों की पहचान, लोकेशन और स्थिति का सही डेटा प्रदान करेगा, जिससे उनकी बेहतर देखभाल और विकास संभव हो सकेगा।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने यह भी कहा कि सरकार अपने लोगों को अधिकतम राहत देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, लेकिन कुछ चीजें कानून से बंधी होती हैं। संसद द्वारा वक्फ संशोधन अधिनियम पारित किया गया है, और उसके तहत इस कानून में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्य सरकारों को भी वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण में मदद करनी चाहिए, और कुछ राज्यों ने इस मामले में अच्छा प्रदर्शन किया है।
कर्नाटक, पंजाब और अन्य कुछ राज्यों ने पंजीकरण में अच्छा प्रदर्शन किया है, और इन राज्यों के कार्यों से अन्य राज्य भी प्रेरणा ले सकते हैं। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया कि अब तक वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण में कई समस्याएं सामने आईं हैं, जिनमें से प्रमुख तकनीकी खामियां और दस्तावेजों की कमी हैं।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही आदेश दिया था कि पंजीकरण की समयसीमा 5 दिसंबर के बाद बढ़ाई नहीं जाएगी। कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, समय सीमा के बाद कोई राहत नहीं दी जा सकती। हालांकि, न्यायाधिकरण को इस अवधि को छह महीने तक बढ़ाने का अधिकार दिया गया है, लेकिन इस मामले में केंद्र सरकार ने समय सीमा बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया है।
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