Varanasi में देश की पहली हाइड्रोजन वाटर टैक्सी की शुरुआत हो गई है। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुरुवार को काशी के नमो घाट से इस क्रूज को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर मंत्री ने इसे प्रधानमंत्री की 'मेक इन इंडिया' योजना और हरित परिवहन के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में बड़ी उपलब्धि बताया। इसके साथ ही वाराणसी हाइड्रोजन क्रूज चलाने वाला देश का पहला शहर बन गया।
हाइड्रोजन वाटर टैक्सी की खासियत
-
यह वाटर टैक्सी एक साथ 50 यात्रियों को सफर करने की सुविधा देती है।
-
प्रति व्यक्ति किराया 500 रुपये निर्धारित किया गया है।
-
यह टैक्सी दिन में 7 फेरे लगाएगी।
-
फिलहाल, यह वाटर टैक्सी नमो घाट से रविदास घाट तक चलेगी, लेकिन भविष्य में इसे अस्सी घाट से मार्कण्डेय धाम तक भी चलाने की योजना है।
-
इसका संचालन भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के तहत जलसा क्रूज लाइन द्वारा किया जाएगा।


परिवहन में बदलाव और ऊर्जा बचत
हाइड्रोजन वाटर टैक्सी ईंधन की बचत के साथ अधिक दूरी तय करने में सक्षम होगी। इसका ट्रायल काशी में शुरू किया गया है, और अगर यह सफल रहा, तो इसे अन्य शहरों में भी शुरू किया जाएगा। यह परियोजना गंगा नदी के किनारे यात्रा करने वाले पर्यटकों के लिए एक पर्यावरण-friendly विकल्प प्रस्तुत करती है और देश में हरित परिवहन के क्षेत्र में एक नई पहल को दर्शाती है।
ग्रीन हाइड्रोजन क्या है?
ग्रीन हाइड्रोजन एक ऐसा स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है, जिसका उपयोग वाहनों में किया जाता है और यह न तो ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न करता है, न ही वायु प्रदूषण। यह ऊर्जा स्रोत पर्यावरण के लिए बहुत फायदेमंद है, क्योंकि इसे बनाने के लिए पानी से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अलग किया जाता है।
इस प्रक्रिया में इलेक्ट्रोलाइजर का इस्तेमाल किया जाता है, जो रिन्यूएबल ऊर्जा स्रोत जैसे सोलर और विंड एनर्जी से हाइड्रोजन को उत्पन्न करता है। ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग ट्रांसपोर्ट, केमिकल, आयरन इंडस्ट्री समेत कई अन्य क्षेत्रों में किया जा सकता है, जिससे यह ऊर्जा का एक बहुत ही साफ और स्थिर विकल्प बनता है।
यह भी पढ़ें : अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में टीएमसी सांसद पर E-Cigarette पीने का आरोप लगाया
