औरास में परिवहन विभाग का एक्शन: मानक पूरे न होने पर स्कूल बसें जब्त, वाहन मालिकों में हड़कंप

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उत्तर प्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार और प्रशासन बेहद सख्त हैं, लेकिन इसके बावजूद कई स्कूल और वाहन मालिक नियमों को ताक पर रखकर बच्चों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। परिवहन विभाग द्वारा औरास थाना क्षेत्र में चलाए गए इस सघन चेकिंग अभियान के दौरान कुल 06 वाहनों पर कड़ी वैधानिक कार्यवाही की गई है।

स्कूल वाहनों पर चला प्रशासन का हंटर

उन्नाव परिवहन विभाग की पीटीओ (PTO) शाहपर किदवई के नेतृत्व में चली इस कार्रवाई में सबसे ज्यादा गाज स्कूली वाहनों पर गिरी। चेकिंग के दौरान पाया गया कि कई वाहन बिना वैध दस्तावेजों के सड़कों पर दौड़ रहे थे। विभाग द्वारा जब्त किए गए इन वाहनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाली एक बड़ी बस और तीन अन्य स्कूली वाहन शामिल हैं, जो बिना वैध प्रपत्रों के बच्चों को ले जा रहे थे। इसके अलावा, नियमों का उल्लंघन करने पर एक वैगनआर कार और एक मारुति वैन को भी सीज किया गया है। इन सभी छह वाहनों को नियमानुसार औरास थाने में खड़ा करा दिया गया है। पीटीओ शाहपर किदवई के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान के दौरान थाना औरास के प्रभारी संजीव कुशवाहा भी अपनी टीम के साथ मौके पर मुस्तैद रहे। जब्त किए गए वाहनों में मुख्य रूप से कुंवर आसिफ अली मांटेसरी स्कूल की गाड़ियां शामिल हैं।

आधे घंटे तक थमा रहा यातायात, मचा हड़कंप

परिवहन विभाग की इस अचानक हुई कार्रवाई से वाहन चालकों और मालिकों में अफरा-तफरी का माहौल रहा। चेकिंग के दौरान सड़क पर करीब आधे घंटे तक यातायात भी प्रभावित हुआ। जो वाहन चालक नियमों की अनदेखी कर रहे थे, वे कार्रवाई के डर से रास्ता बदलते नजर आए। वर्तमान में जब्त किए गए वाहनों के मालिक कागजात पूरे करने और अपनी गाड़ियों को छुड़ाने के लिए भाग-दौड़ कर रहे हैं।

पीटीओ की दो-टूक: “बिना कागजात नहीं छूटेंगी गाड़ियां”

पीटीओ शाहपर किदवई ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी सूरत में नियमों से समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने मीडिया को बताया कि जब्त की गई गाड़ियों को तभी छोड़ा जाएगा जब उनके सभी प्रपत्र (Documents) नियमानुसार पूरे पाए जाएंगे। सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी गाड़ियों के मामले में ज़रा भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

फैक्ट चेक: स्कूल बस के लिए क्या हैं जरूरी नियम?

अगर आप भी अपने बच्चे को स्कूल वैन या बस से भेजते हैं, तो इन नियमों का पता होना जरूरी है:

  1. फिटनेस सर्टिफिकेट: गाड़ी सड़क पर चलने लायक है या नहीं, इसका प्रमाण पत्र।

  2. स्पीड गवर्नर: बस की रफ़्तार एक तय सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए।

  3. चालक का वेरिफिकेशन: ड्राइवर का लाइसेंस और उसका अनुभव अनिवार्य है।

  4. इमरजेंसी गेट और फायर एक्सटिंग्विशर: हर स्कूली वाहन में इनका होना अनिवार्य है।

नियमों का पालन करना हर नागरिक और संस्था की जिम्मेदारी है। औरास में हुई यह कार्रवाई स्वागत योग्य है क्योंकि यह बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी है।

UP School Vahini Guide: क्या आपका बच्चा सुरक्षित है? जानें स्कूल बसों और वैन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के कड़े नियम

उत्तर प्रदेश में हर साल लाखों बच्चे स्कूल बसों और वैन के जरिए घर से स्कूल का सफर तय करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि जिस वाहन में आपका बच्चा जा रहा है, वह कितना सुरक्षित है? उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘उत्तर प्रदेश स्कूल वाहिनी नियमावली’ तैयार की है। हाल ही में औरास और अन्य क्षेत्रों में हुई परिवहन विभाग की कार्रवाई इसी नियमावली को सख्ती से लागू करने का हिस्सा है।

1. वाहन की पहचान और बाहरी बनावट

नियमावली के अनुसार, किसी भी स्कूली वाहन (बस या वैन) को दूर से देखकर पहचाना जाना चाहिए। इसके लिए कुछ नियम तय हैं:

  • रंग: स्कूल बस का रंग अनिवार्य रूप से चमकीला पीला (Golden Yellow) होना चाहिए।

  • लिखावट: वाहन के आगे और पीछे मोटे अक्षरों में ‘School Bus’ या ‘On School Duty’ लिखा होना अनिवार्य है।

  • संपर्क विवरण: बस के पीछे स्कूल का नाम, पता और टेलीफोन नंबर साफ़-साफ़ लिखा होना चाहिए। साथ ही, परिवहन विभाग का हेल्पलाइन नंबर और पुलिस का नंबर भी अंकित होना चाहिए।

2. सुरक्षा उपकरण: जो बचा सकते हैं जान

सड़क सुरक्षा के लिहाज से उत्तर प्रदेश सरकार ने निम्नलिखित उपकरणों को हर स्कूली वाहन में अनिवार्य किया है:

  • स्पीड गवर्नर (Speed Governor): स्कूल बस की रफ़्तार 40 किमी/घंटा से अधिक नहीं हो सकती। इसके लिए गाड़ी में स्पीड कंट्रोलर लगा होना चाहिए।

  • फायर एक्सटिंग्विशर (Fire Extinguisher): आग से बचाव के लिए हर बस में चालू हालत में अग्निशमन यंत्र होना चाहिए।

  • फर्स्ट एड बॉक्स: प्राथमिक चिकित्सा किट जिसमें दवाइयां और पट्टियां हों, हमेशा उपलब्ध होनी चाहिए।

  • इमरजेंसी एग्जिट (Emergency Exit): बस में पीछे की तरफ या साइड में एक आपातकालीन द्वार होना चाहिए जो आसानी से खुल सके।

3. ड्राइवर और स्टाफ के लिए कड़े मानक

गाड़ी चाहे कितनी भी आधुनिक हो, उसे चलाने वाला व्यक्ति सबसे महत्वपूर्ण है। नियमावली के अनुसार:

  • अनुभव: ड्राइवर के पास भारी वाहन चलाने का कम से कम 5 साल का अनुभव होना चाहिए।

  • रिकॉर्ड: ड्राइवर का पिछला रिकॉर्ड साफ़ होना चाहिए। यदि उस पर पिछले एक साल में ओवरस्पीडिंग या खतरनाक ड्राइविंग के लिए 2 से ज्यादा चालान हुए हैं, तो वह स्कूल बस नहीं चला सकता।

  • यूनिफॉर्म: ड्राइवर और कंडक्टर का वर्दी में होना और नेम प्लेट लगाना अनिवार्य है।

  • महिला अटेंडेंट: यदि बस में लड़कियां सफर कर रही हैं, तो बस में एक महिला अटेंडेंट या आया का होना अनिवार्य है।

4. वाहन के भीतर की व्यवस्था

बच्चों के आराम और सुरक्षा के लिए बस के अंदर भी कुछ मानक तय किए गए हैं:

  • खिड़कियां: बस की खिड़कियों में ग्रिल (लोहे की जाली) लगी होनी चाहिए ताकि बच्चे हाथ या सिर बाहर न निकाल सकें।

  • सीटें: सीटों के नीचे बस्ता (School Bag) रखने के लिए जगह होनी चाहिए ताकि गलियारा (Aisle) खाली रहे।

  • दरवाजे: बस के दरवाजे ऐसे होने चाहिए जो सुरक्षित तरीके से बंद हो सकें। चलते समय दरवाजा खुला रखना कानूनी अपराध है।

5. माता-पिता के लिए ‘चेकलिस्ट’ (Parents Responsibility)

केवल स्कूल या सरकार के भरोसे बैठना पर्याप्त नहीं है। एक अभिभावक के रूप में आप इन बातों की जांच जरूर करें:

  1. ओवरलोडिंग: क्या वैन या बस में क्षमता से ज्यादा बच्चे बैठाए जा रहे हैं? (नियम के अनुसार, बच्चों की संख्या पासिंग क्षमता से ज्यादा नहीं होनी चाहिए)।

  2. ड्राइवर का व्यवहार: क्या ड्राइवर गाड़ी चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल करता है या नशे में होता है?

  3. दस्तावेज: क्या गाड़ी का फिटनेस सर्टिफिकेट और इंश्योरेंस वैध है? (आप mParivahan ऐप पर गाड़ी का नंबर डालकर यह चेक कर सकते हैं)।

  4. स्पीड: क्या ड्राइवर बहुत तेज़ गाड़ी चलाता है?

6. शिकायत कहाँ करें?

यदि आपको लगता है कि कोई स्कूल वाहन नियमों का उल्लंघन कर रहा है, तो आप चुप न रहें। आप इन माध्यमों से शिकायत कर सकते हैं:

  • परिवहन विभाग हेल्पलाइन: 1800-1800-151

  • पुलिस सहायता: 112

  • संबंधित स्कूल प्रबंधन: स्कूल के प्रिंसिपल को लिखित शिकायत दें।

फैक्ट चेक: क्या प्राइवेट वैन सुरक्षित हैं?

अक्सर लोग पैसे बचाने के चक्कर में प्राइवेट मारुति वैन या ऑटो में बच्चों को भेजते हैं। ध्यान रहे, उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘डग्गामार’ या बिना परमिट वाली वैन में बच्चों को ले जाना प्रतिबंधित किया है। ऐसी गाड़ियों में गैस किट (LPG/CNG) का अवैध इस्तेमाल अक्सर हादसों का कारण बनता है। हमेशा स्कूल द्वारा अधिकृत और आरटीओ (RTO) से प्रमाणित वाहन का ही चुनाव करें।

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