UP में 2025-26 के खरीफ विपणन वर्ष के दौरान धान खरीद को लेकर योगी सरकार की नीतियों का असर साफ तौर पर देखा जा रहा है। प्रदेश सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीद को किसान हितों से जोड़ते हुए न केवल खरीद प्रक्रिया को तेज किया है, बल्कि भुगतान व्यवस्था को भी पारदर्शी और समयबद्ध बना दिया है। इस वर्ष धान खरीद में किसानों की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो सरकार द्वारा अपनाई गई नीतियों की सफलता को दर्शाता है।
किसानों की बढ़ी भागीदारी और ऑनलाइन केंद्रों का प्रभाव
ताजा आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में अब तक 4,09,444 किसान धान खरीद प्रक्रिया से सीधे जुड़े हैं, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 3,73,840 थी। इस वृद्धि का मुख्य कारण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा स्थापित भरोसा और सरल प्रक्रियाएं हैं। किसानों के लिए एक ऑनलाइन केंद्रों का नेटवर्क स्थापित किया गया है, जिससे वे अपने नजदीकी केंद्रों पर अपनी उपज बेच सकते हैं। इससे बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई है, और किसानों को बेहतर सुविधा और समयबद्ध भुगतान मिल रहा है।
2025-26 में धान की खरीद और सरकार की कार्यप्रणाली
वर्तमान विपणन वर्ष में, 25,02,149.60 मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है, जो पिछले वर्षों की तुलना में बहुत बेहतर है। सरकार ने न केवल खरीद प्रक्रिया को सरल किया है, बल्कि डिस्पैच व्यवस्था को भी प्राथमिकता दी है। किसानों को उनकी उपज का भुगतान शीघ्र और सही तरीके से किया जा रहा है। अब तक 5,569.97 करोड़ रुपए का भुगतान किसानों को किया जा चुका है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि सरकार ने भुगतान व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाया है।
ऑनलाइन खरीद केंद्रों का विस्तार
धान खरीद को और सुगम बनाने के लिए प्रदेश में 4,743 ऑनलाइन खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं। यह केंद्र पिछले वर्ष के 4,347 केंद्रों की तुलना में अधिक हैं, जिससे किसानों को उनके घर के नजदीक ही उपज बेचने की सुविधा मिल रही है। इन ऑनलाइन केंद्रों ने खरीदी की प्रक्रिया को तेज किया है और किसान को सीधे तौर पर लाभ पहुंचाया है।
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किसान पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया में सुधार
धान के लिए इस वर्ष 19 दिसंबर 2025 तक कुल 8,82,988 किसानों का पंजीकरण किया गया है, जिनमें से 6,68,698 किसानों का सत्यापन पूरा हो चुका है। पिछले वर्ष इसी अवधि में 7,13,600 किसानों का पंजीकरण और 6,10,135 किसानों का सत्यापन किया गया था। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि इस वर्ष न केवल पंजीकरण की संख्या बढ़ी है, बल्कि सत्यापन की प्रक्रिया भी तेज हुई है।
बाजरा और ज्वार की खरीद में भी वृद्धि
इस वर्ष प्रदेश में बाजरा की खरीद में भी वृद्धि देखी गई है। अब तक 1,72,109.30 मीट्रिक टन बाजरा खरीदी गई है, जो पिछले वर्ष 81,058.91 मीट्रिक टन थी। इस वर्ष 41,568 किसानों ने बाजरा बेचा, जो पिछले वर्ष 15,096 किसानों से कहीं अधिक है। इसी तरह, ज्वार की खरीद में भी वृद्धि देखी गई है, और ज्वार के 82 ऑनलाइन क्रय केंद्रों के माध्यम से किसानों को अपनी फसल बेचने का अवसर मिला है।
ज्वार किसानों को भी समय पर भुगतान
ज्वार के 7,814 किसानों ने अपनी फसल को सरकारी खरीद प्रणाली के तहत बेचा, जो पिछले वर्ष के 7,282 किसानों से अधिक है। अब तक इन किसानों को 91.49 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। इससे यह स्पष्ट होता है कि योगी सरकार किसानों के लिए अपने वादों को निभा रही है और उनकी समस्याओं का समाधान समय पर कर रही है।