उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने प्रदेश के तीन बड़े मदरसों की मान्यता निलंबित कर दी है। इनमें लखनऊ के मड़ियांव स्थित मदरसा हनफिया जियाउल कुरान, आजमगढ़ के मुबारकपुर स्थित मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम और संतकबीरनगर के खलीलाबाद स्थित कुल्लियातुल बनातिर रजविया एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी शामिल हैं। परिषद की ओर से यह कार्रवाई विस्तृत जांच और निरीक्षण के बाद की गई है।
जांच के बाद हुई सख्त कार्रवाई
उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही ने बताया कि तीनों मदरसों की विधिवत जांच कराई गई थी। जांच में यह सामने आया कि मदरसों का संचालन नियमावली के विपरीत किया जा रहा था। कई मामलों में मदरसा बोर्ड को गुमराह किया गया, जबकि कुछ स्थानों पर गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं भी पाई गईं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर परिषद ने मदरसों की मान्यता निलंबित करने का निर्णय लिया।

स्वीकृत स्थान पर संचालित नहीं मिला लखनऊ का मदरसा
लखनऊ के मड़ियांव क्षेत्र में स्थित मदरसा हनफिया जियाउल कुरान को लेकर जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रजिस्ट्रार अंजना सिरोही के अनुसार, यह मदरसा परिषद द्वारा स्वीकृत स्थान पर संचालित नहीं पाया गया। निरीक्षण के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि जिस भवन में मदरसे के संचालन का दावा किया गया था, वह पहले से ही बेसिक शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त प्राथमिक अथवा जूनियर हाईस्कूल का परिसर है।
इसके अतिरिक्त मदरसे से संबंधित भूमि और भवन को लेकर न्यायालय में वाद भी विचाराधीन है, जिसकी जानकारी परिषद को पहले नहीं दी गई थी। यह स्थिति मदरसा मान्यता नियमों का सीधा उल्लंघन मानी गई।
निरीक्षण में सामने आईं गंभीर कमियां
निरीक्षण के दौरान मदरसा हनफिया जियाउल कुरान में कई बुनियादी खामियां पाई गईं। कक्षाओं की व्यवस्था, कमरों का आकार, वेंटिलेशन और सुरक्षा मानकों में गंभीर कमी दर्ज की गई। साथ ही मदरसा प्रबंधन ओनरशिप से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। परिषद के अनुसार, मदरसा यह भी सिद्ध नहीं कर पाया कि उसका संचालन निर्धारित मानकों के अनुरूप किया जा रहा है।
ब्रिटेन में रहकर वेतन लेने का मामला उजागर
आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर स्थित 78 वर्ष पुराने मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम की मान्यता भी निलंबित कर दी गई है। मदरसा बोर्ड की जांच में यहां तैनात सहायक शिक्षक शमसुल हुदा खान से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया। जांच में पाया गया कि शमसुल हुदा ब्रिटेन की नागरिकता ले चुके हैं और वर्ष 2007 से वहीं निवास कर रहे हैं।
इसके बावजूद उन्होंने मदरसे से नियमित वेतन, सेवानिवृत्ति लाभ, पेंशन, जीपीएफ और अन्य देयों का लाभ लिया। जांच में उनकी 5 वर्ष 7 माह 3 दिन की अनियमित अनुपस्थिति दर्ज की गई, साथ ही नियमों के विरुद्ध 502 दिन का चिकित्सीय अवकाश भी स्वीकृत पाया गया। परिषद के अनुसार, यह पूरा मामला राजकोष को वित्तीय क्षति पहुंचाने वाले संगठित कृत्य की श्रेणी में आता है।
संतकबीरनगर के मदरसे पर भी गिरी गाज
संतकबीरनगर जिले के खलीलाबाद स्थित कुल्लियातुल बनातिर रजविया एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी द्वारा संचालित मदरसे पर भी कार्रवाई की गई है। मदरसा बोर्ड की जांच में यहां भी नियमावली को ताक पर रखकर संचालन किए जाने की पुष्टि हुई। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी इस मदरसे की मान्यता निलंबित की जा चुकी है, बावजूद इसके सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए।
सुनवाई के अवसर के बाद भी नहीं मिला संतोषजनक जवाब
मदरसा बोर्ड के अनुसार, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत सभी मदरसा प्रबंधन और प्रधानाचार्यों को कई बार सुनवाई का अवसर दिया गया। लेकिन संबंधित मदरसा संचालक परिषद के समक्ष संतोषजनक जवाब और ठोस प्रमाण प्रस्तुत करने में असफल रहे। इसके बाद उत्तर प्रदेश अशासकीय अरबी एवं फारसी मदरसा मान्यता, प्रशासन एवं सेवा विनियमावली 2016 के अंतर्गत कार्रवाई की गई।







