उत्तर प्रदेश में चल रही यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 की शुचिता और पारदर्शिता को लेकर प्रशासन बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है। परीक्षा केंद्रों पर नकल रोकने और व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद रखने के लिए तैनात किए गए अधिकारियों पर अब गाज गिरनी शुरू हो गई है। ताजा मामला ड्यूटी में बड़ी लापरवाही का है, जहां निरीक्षण के दौरान एक-दो नहीं बल्कि पूरे 19 स्टैटिक मजिस्ट्रेट अपनी ड्यूटी से नदारत पाए गए।
इस घोर लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल प्रभाव से कड़ा कदम उठाया है। प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त खलबली मच गई जब डीएम ने इन सभी 19 मजिस्ट्रेटों के वेतन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। शासन की ओर से साफ संदेश दिया गया है कि परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण और संवेदनशील प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

निरीक्षण में खुली पोल: गायब मिले जिम्मेदार अधिकारी
बोर्ड परीक्षाओं को सकुशल संपन्न कराने के लिए प्रत्येक केंद्र पर स्टैटिक मजिस्ट्रेटों की तैनाती की गई है। इनकी जिम्मेदारी प्रश्नपत्रों के रखरखाव से लेकर परीक्षा के दौरान केंद्र की गतिविधियों पर नजर रखने की होती है। जिलाधिकारी जब खुद केंद्रों का हाल जानने निकले और अपनी टीम से रिपोर्ट मांगी, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। कई केंद्रों पर तैनात संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगने की नौबत आ गई क्योंकि वे अपने निर्धारित स्थान पर मौजूद ही नहीं थे।
वेतन रोकने के साथ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि केवल वेतन रोकना ही काफी नहीं है। सभी दोषी मजिस्ट्रेटों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक जवाब न मिलने पर आगे की कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।