Hapur में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े जासूसी नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने धौलाना क्षेत्र के अजीम राणा और मेरठ निवासी आज़ाद राजपूत को गिरफ्तार किया है।
जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी सोशल मीडिया के जरिए ISI समर्थित अपराधी शहजाद भट्टी के संपर्क में थे। आरोपी दिल्ली के रमेश नगर मेट्रो स्टेशन और आसपास के सनातन मंदिरों की फोटो, वीडियो और लोकेशन साझा कर रहे थे। इसके अलावा ग्रेटर नोएडा के बिसरख स्थित रावण मंदिर की जानकारी भी भेजी गई थी।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह गतिविधियां देश विरोधी साजिश के तहत की जा रही थीं। पुलिस के अनुसार, आरोपी दिसंबर 2025 से इस नेटवर्क से जुड़े थे और 19 फरवरी 2026 को रेकी कर जानकारी भेजी थी। ये कहा जा सकता है कि सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में एक बड़ी अनहोनी टल गई है। यूपी एटीएस और धौलाना पुलिस ने मिलकर एक ऐसे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है जो सरहद पार बैठे अपने आकाओं के इशारे पर हमारे धार्मिक स्थलों और मेट्रो स्टेशनों को निशाना बनाने की फिराक में था। आइए जानते हैं कि आखिर ये पूरी साजिश क्या थी और कैसे पुलिस ने इन संदिग्धों को दबोचा।

सोशल मीडिया के जरिए बिछाया गया जाल
पुलिस की गिरफ्त में आए अजीम राणा और आजाद राजपूत पिछले काफी समय से संदिग्ध गतिविधियों में शामिल थे। जांच में पता चला है कि ये दोनों दिसंबर 2025 से ही पाकिस्तान के गैंगस्टर शहजाद भट्टी के संपर्क में थे। ताज्जुब की बात यह है कि यह पूरा संपर्क इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए हो रहा था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस पूरे खेल के पीछे ISI का दिमाग काम कर रहा था, जो इन युवाओं को बरगलाकर देश के खिलाफ इस्तेमाल कर रही थी।
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दिल्ली और नोएडा के मंदिरों की रेकी
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने जो खुलासे किए हैं, वे काफी डराने वाले हैं। अजीम दिल्ली के एक मॉल में काम करता था और आजाद गुरुग्राम की एक फैक्ट्री में ठेकेदार था। अपने काम की आड़ में इन दोनों ने दिल्ली के रमेश नगर मेट्रो स्टेशन, वहां के सनातन मंदिर और नोएडा के बिसरख स्थित रावण मंदिर की रेकी की थी। इन्होंने इन जगहों के फोटो और वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेजे थे। पुलिस को अंदेशा है कि ISI इन वीडियो का इस्तेमाल किसी बड़े हमले की प्लानिंग के लिए करना चाहती थी।
खुफिया एजेंसियों का बढ़ा शिकंजा
गिरफ्तारी के बाद अब इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और एटीएस की टीमें इन दोनों से कड़ी पूछताछ कर रही हैं। आरोपियों ने माना है कि वे नियमित रूप से अपने हैंडलर्स को लोकेशन और फोटो भेज रहे थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह से इन दोनों को ट्रेनिंग दी गई और इन्हें टारगेट बताए गए, उससे साफ पता चलता है कि यह एक सोची-समझी साजिश थी जिसमें ISI समर्थित मॉड्यूल का हाथ हो सकता है। अब पुलिस इनके मोबाइल डेटा को खंगाल रही है ताकि इनके स्थानीय संपर्कों का पता लगाया जा सके।

सुरक्षा घेरा और जांच की गंभीरता
हापुड़ के एसपी कुंवर ज्ञानंजय सिंह ने बताया कि यह नेटवर्क न केवल धार्मिक स्थलों बल्कि रिहायशी कॉलोनियों की जानकारी भी साझा कर रहा था। ISI अक्सर इस तरह के ‘स्लीपर सेल’ का इस्तेमाल करती है जो सामान्य जिंदगी जीते हुए देश के खिलाफ जानकारियां जुटाते हैं। फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस की कस्टडी में हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उन्हें इस काम के लिए कितनी फंडिंग मिली थी। सुरक्षा के लिहाज से दिल्ली और नोएडा के चिन्हित इलाकों में भी चौकसी बढ़ा दी गई है।
ISI की इस नई चाल को समय रहते नाकाम कर दिया गया है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय हमें कितना सावधान रहने की जरूरत है। अगर हमें अपने आसपास कोई भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि दिखे, तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को देनी चाहिए। सतर्क रहकर ही हम ISI जैसे संगठनों के मंसूबों को मिट्टी में मिला सकते हैं और अपने देश को सुरक्षित रख सकते हैं।
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