लखनऊ में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर मुस्तैदी दिखाते हुए एक बड़े खतरे को टाल दिया है। UP ATS (उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ता) ने गुरुवार को राजधानी लखनऊ से चार संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया, जिनके इरादे देश की शांति और सुरक्षा को भंग करने के थे। शुक्रवार को इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए एटीएस ने बताया कि ये आरोपी पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलर्स के इशारे पर भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में धमाके करने की फिराक में थे।
अगर समय रहते UP ATS इन तक नहीं पहुंचती, तो शायद 2 अप्रैल की तारीख लखनऊ के इतिहास में एक काले दिन के रूप में दर्ज हो सकती थी। इन गिरफ्तारियों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने की कोशिशें सीमा पार से लगातार जारी हैं।
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लखनऊ रेलवे स्टेशन था आतंकियों के निशाने पर
UP ATS की जांच में जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है, वह यह कि इन आतंकियों का मुख्य टारगेट लखनऊ रेलवे स्टेशन था। ये लोग स्टेशन के पास मौजूद रेलवे सिग्नल बॉक्स और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाना चाहते थे। इनका मकसद सिर्फ तोड़फोड़ करना नहीं था, बल्कि एक बड़ा विस्फोट कर भारी जनहानि करना था।
एटीएस के मुताबिक, इन आतंकियों ने 2 अप्रैल को धमाका करने की पूरी प्लानिंग कर ली थी ताकि पूरे देश में दहशत और अस्थिरता का माहौल पैदा किया जा सके। आरोपियों ने लखनऊ के अलावा गाजियाबाद और अलीगढ़ जैसे शहरों में भी कई महत्वपूर्ण जगहों की रेकी की थी। वे इन जगहों की वीडियो रिपोर्ट और गूगल लोकेशन पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को भेजते थे, ताकि वहां से फाइनल सिग्नल मिलने पर तबाही मचाई जा सके।
पाकिस्तान से जुड़ रहे थे आतंक के तार
गिरफ्तार किए गए आतंकियों की पहचान साकिब उर्फ डेविल, विकास गहलावत, लोकेश और अरबाब के रूप में हुई है। इस गिरोह का सरगना साकिब है, जो मूल रूप से मेरठ के अगवानपुर गांव का रहने वाला है। ताज्जुब की बात यह है कि साकिब पेशे से एक नाई का काम करता था, लेकिन डिजिटल दुनिया में वह पूरी तरह से कट्टरपंथ के जाल में फंस चुका था।
UP ATS ने खुलासा किया कि साकिब टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और सिग्नल जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए विदेशी नंबरों और पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में आया था। इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल बेहद सुरक्षित और गुप्त तरीके से बातचीत करने के लिए किया जा रहा था। साकिब ने ही अपने गांव के अरबाब और फिर सोशल मीडिया के जरिए गौतमबुद्ध नगर के विकास और लोकेश को इस नेटवर्क का हिस्सा बनाया। ये सभी आरोपी थोड़े से पैसों के लालच और कट्टरपंथी विचारधारा के प्रभाव में आकर देश के खिलाफ साजिश रचने लगे थे।
QR कोड के जरिए होती थी टेरर फंडिंग
पूछताछ के दौरान एक और डिजिटल साजिश का पर्दाफाश हुआ है। UP ATS ने बताया कि ये आतंकी छोटी-मोटी आगजनी की घटनाओं को अंजाम देते थे और फिर उसका वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेजते थे। यह उनके ‘काम का सबूत’ होता था। इसके बदले में पाकिस्तानी हैंडलर्स उन्हें किसी बैंक खाते के बजाय सीधे QR कोड के माध्यम से पैसे भेजते थे। इस तरीके का इस्तेमाल इसलिए किया जाता था ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचा जा सके।
इन आतंकियों के पास से एक केमिकल से भरा कैन, 7 मोबाइल फोन, 24 भड़काऊ पंपलेट और आधार कार्ड बरामद हुए हैं। बरामद मोबाइल फोन से कई ऐसे डिजिटल सबूत मिले हैं, जो इनके पाकिस्तान कनेक्शन की पुष्टि करते हैं। एटीएस अब इन फोन्स के डेटा को रिकवर कर रही है ताकि यह पता चल सके कि इनके साथ और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।
कट्टरपंथी विचारधारा का फैलाया जा रहा था जहर
UP ATS की जांच में यह भी साफ हुआ है कि पाकिस्तानी हैंडलर्स इन युवाओं को उकसाने के लिए धर्म और कट्टरपंथी संगठनों के नाम का इस्तेमाल करते थे। उन्हें ऐसे ग्रुप्स में जोड़ा गया था जहां लगातार हिंसा और नफरत भरे संदेश भेजे जाते थे। इनका असली मकसद समाज में भय, अविश्वास और सांप्रदायिक तनाव पैदा करना था, जिससे देश की आंतरिक शांति को चोट पहुंचाई जा सके।
साकिब और उसके साथियों को जिस तरह से तैयार किया गया था, वह दिखाता है कि सीमा पार बैठे आतंकी संगठन अब तकनीक का सहारा लेकर घर बैठे ही स्लीपर सेल तैयार कर रहे हैं। हालांकि, UP ATS की सतर्कता ने इन सभी मंसूबों पर पानी फेर दिया है।
राजधानी में हुई यह बड़ी कार्रवाई सुरक्षा की दृष्टि से एक बड़ी कामयाबी है। UP ATS ने समय रहते इन चारों को दबोचकर न केवल लखनऊ बल्कि देश के अन्य हिस्सों को भी लहूलुहान होने से बचा लिया है। यह घटना हर नागरिक के लिए एक चेतावनी भी है कि सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान व्यक्ति या संदिग्ध गतिविधियों से दूरी बनाए रखें। फिलहाल, एटीएस इन आरोपियों से कड़ी पूछताछ कर रही है और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
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