उत्तर प्रदेश के लिए यह गर्व का क्षण है। एटा जिले स्थित पटना पक्षी विहार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त रामसर साइट घोषित कर दिया गया है। इसके साथ ही यह उत्तर प्रदेश का 11वां वेटलैंड बन गया है, जिसे रामसर कन्वेंशन के तहत शामिल किया गया है। इस घोषणा की जानकारी केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से साझा की।
रामसर साइट की मान्यता मिलने के बाद पटना पक्षी विहार ने न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश के पर्यावरण संरक्षण प्रयासों में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश को वेटलैंड संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करती है।
जैव विविधता का अनमोल खजाना है पटना पक्षी विहार
पटना पक्षी विहार मीठे पानी का दलदली क्षेत्र है, जहां घास के मैदान, वन क्षेत्र और जलाशय एक साथ देखने को मिलते हैं। इन विविध भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां उच्च स्तर की जैव विविधता पाई जाती है। अब तक यहां 178 प्रजातियों के पक्षी, 252 प्रजातियों की वनस्पतियां, तथा मगरमच्छ जैसे जलीय जीवों की मौजूदगी दर्ज की जा चुकी है। सर्दियों के मौसम में यह विहार प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल बन जाता है, जिससे इसका पारिस्थितिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

धार्मिक और प्रकृति पर्यटन का संगम
पटना पक्षी विहार केवल जैव विविधता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक पर्यटन का भी एक प्रमुख केंद्र है। यहां स्थित प्राचीन शिव मंदिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बड़ी संख्या में आकर्षित करता है। यही वजह है कि यह स्थल प्रकृति और आस्था, दोनों का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है।
रामसर साइट का दर्जा मिलने से यहां ईको-टूरिज्म को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे।

वेटलैंड संरक्षण में उत्तर प्रदेश की मजबूत भूमिका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पटना पक्षी विहार को रामसर साइट घोषित किए जाने पर प्रसन्नता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह मान्यता जैव विविधता के संरक्षण और महत्वपूर्ण इकोसिस्टम की रक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री @narendramodi ने उत्तर प्रदेश के एटा में पटना #BirdSanctuary और गुजरात के कच्छ में छारी-धंध को रामसर साइट्स की लिस्ट में शामिल किए जाने पर खुशी जताई।#RamsarSites | #Wetland | @moefcc #PatnaBirdSanctuary #Etah #UttarPradesh#ChhariDhand #Kutch #Gujarat pic.twitter.com/MmR7r6yaHq
— आकाशवाणी समाचार (@AIRNewsHindi) January 31, 2026
गौरतलब है कि वर्ष 2014 में देश में केवल 26 रामसर स्थल थे, जो अब बढ़कर 98 हो चुके हैं। यह वृद्धि भारत की पर्यावरणीय नीतियों और संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाती है। उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन चुका है, जहां वेटलैंड संरक्षण के लिए ग्राम स्तर पर समितियां गठित की गई हैं। इससे स्थानीय सहभागिता को बढ़ावा मिला है और संरक्षण को जमीनी स्तर पर मजबूती मिली है।
विश्व वेटलैंड्स दिवस पर नेचर एंड बर्ड फेस्टिवल
विश्व वेटलैंड्स दिवस के अवसर पर 2 फरवरी 2026 को एटा स्थित महावीर स्वामी पक्षी विहार में नेचर एंड बर्ड फेस्टिवल का आयोजन किया जाएगा। इस फेस्टिवल का उद्देश्य वेटलैंड्स और पक्षियों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना, ग्राम स्तरीय सहभागिता को प्रोत्साहित करना और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देना है। यह आयोजन न केवल प्रकृति संरक्षण को मजबूती देगा, बल्कि उत्तर प्रदेश को पर्यावरणीय पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने में भी सहायक होगा।
दो नए भारतीय आर्द्रभूमि रामसर नेटवर्क में शामिल हुए
भारत ने अपने रामसर नेटवर्क में दो और आर्द्रभूमियों को शामिल किया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने उत्तर प्रदेश में पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात में छारी-ढांड आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व को… pic.twitter.com/8AamqEisUr
— डीडी न्यूज़ (@DDNewsHindi) January 31, 2026
पहले से शामिल हैं ये रामसर साइट
उत्तर प्रदेश में पहले से शामिल रामसर साइटों में आगरा का सूर सरोवर, उन्नाव का नवाबगंज पक्षी विहार, गोंडा का पार्वती अरगा, मैनपुरी का समान पक्षी विहार, रायबरेली का समसपुर पक्षी विहार, हरदोई का सांडी पक्षी विहार, इटावा की सरसई नावर झील, ऊपरी गंगा (ब्रज घाट से नरौरा तक), हैदरपुर वेटलैंड और बखिरा पक्षी विहार शामिल हैं।