ट्रंप का परमाणु हथियारों पर चौंकाने वाला बयान: अमेरिका दुनिया को 150 बार तबाह कर सकता है

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक सुरक्षा को लेकर चर्चा में आग लगा दी है। उन्होंने हाल ही में कहा कि अमेरिका के पास दुनिया को 150 बार तबाह करने के लिए पर्याप्त परमाणु हथियार हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें परमाणु परीक्षण करने की आवश्यकता महसूस हो रही है। ट्रंप के इस बयान ने न केवल दुनिया के प्रमुख देशों को चौंकाया, बल्कि वैश्विक स्तर पर चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। ट्रंप का कहना है कि रूस और चीन की बढ़ती परमाणु महत्वाकांक्षाएं अमेरिका को परमाणु परीक्षण की ओर प्रेरित कर रही हैं।

एक हालिया इंटरव्यू में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्होंने परमाणु परीक्षण का आदेश तब दिया, जब उन्हें लगा कि अमेरिका अकेला ऐसा देश नहीं रह सकता, जो परमाणु परीक्षण नहीं कर रहा हो। उन्होंने कहा कि रूस और उत्तर कोरिया सहित कई देश सक्रिय रूप से परीक्षण कर रहे हैं और अमेरिका को पीछे नहीं रहना चाहिए। इस आदेश के कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने दक्षिण कोरिया में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी। उनके इस कदम को दुनियाभर में सुरक्षा विशेषज्ञों ने गंभीर रूप से देखा है और माना जा रहा है कि इससे परमाणु हथियारों की नई होड़ शुरू हो सकती है।

ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि अमेरिका के पास इतनी विशाल परमाणु शक्ति है कि पूरी दुनिया को 150 बार तबाह किया जा सकता है। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से इस बारे में बातचीत का भी जिक्र किया। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वे नहीं चाहते कि अमेरिका इकलौता ऐसा देश बने, जो परमाणु परीक्षण में पीछे रह जाए। उनके अनुसार, वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रयासों के बावजूद वर्तमान समय में परमाणु परीक्षण अपरिहार्य हो गया है।

अमेरिका ने आखिरी बार 1992 में ऑपरेशन जूलियन के तहत परमाणु परीक्षण किया था। इस बीच, रूस और अमेरिका द्वारा किए जा रहे परमाणु हथियार परीक्षण ऐसे समय में हो रहे हैं जब यूक्रेन युद्ध को लेकर दोनों देशों में तनाव बढ़ा हुआ है। ये दोनों देश सीटीबीटी (Comprehensive Nuclear-Test-Ban Treaty) के हस्ताक्षरकर्ता हैं। इस संधि पर कुल 187 देशों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इस्राइल जैसे देश शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप का यह बयान अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर नए तनाव पैदा कर सकता है और वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों की दौड़ को बढ़ावा दे सकता है।

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