Dudhwa National Park का पर्यटन सत्र शुरू, वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने किया शुभारंभ

Dudhwa National Park का पर्यटन सत्र शुरू, वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने किया शुभारंभ

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लखीमपुर खीरी, 1 नवंबर 2025: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित विश्वप्रसिद्ध दुधवा नेशनल पार्क (Dudhwa National Park) का पर्यटन सत्र आज से औपचारिक रूप से शुरू हो गया। इस अवसर पर राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर 2025-26 के पर्यटन सत्र का शुभारंभ किया।

डॉ. सक्सेना ने कहा कि इस वर्ष दुधवा पार्क को पूरी तरह पर्यटकों के लिए तैयार किया गया है। यहां सफारी, इको-टूरिज्म, और एडवेंचर गतिविधियों को नए स्वरूप में विकसित किया गया है, ताकि पर्यटक न केवल वन्यजीवों का दर्शन कर सकें, बल्कि प्राकृतिक सुंदरता का आनंद भी उठा सकें।

Dudhwa National Park: जैव विविधता का खजाना

हिमालय की तराई में स्थित दुधवा नेशनल पार्क (Dudhwa National Park) उत्तर प्रदेश का प्रमुख वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र है। यह पार्क अपने बाघों, बारहसिंघों, हाथियों, गैंडे और दुर्लभ पक्षियों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। घने साल के जंगलों और दलदली घास के मैदानों से घिरे इस क्षेत्र में 1,200 से अधिक पौधों की प्रजातियाँ और सैकड़ों प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं।

वन विभाग के अनुसार, इस बार पार्क में विशेष रूप से टाइगर ट्रैकिंग जोन और बर्ड वॉचिंग पॉइंट विकसित किए गए हैं। पर्यटक अब जंगल सफारी, बोटिंग और नेचर ट्रेल्स का आनंद ले सकेंगे।

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पर्यटकों के लिए नई सुविधाएं

दुधवा पार्क प्रशासन ने इस वर्ष पर्यटकों की सुविधा के लिए ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल, आधुनिक इको हट्स, और बेहतर सड़क नेटवर्क की व्यवस्था की है। पार्क के भीतर सफारी मार्गों को पुनः मरम्मत कर सुरक्षित बनाया गया है। इसके साथ ही जंगल कैंपिंग, नेचर वॉक और ग्रामीण पर्यटन को भी बढ़ावा देने की योजना तैयार की गई है।

वन मंत्री ने बताया कि इस वर्ष पार्क में अपेक्षाकृत अधिक विदेशी पर्यटकों के आने की संभावना है। उन्होंने कहा कि “दुधवा न केवल वन्यजीव प्रेमियों के लिए, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और ग्रामीण जीवन का संगम देखने के इच्छुक हर व्यक्ति के लिए आकर्षण का केंद्र है।”

Dudhwa National Park का वैश्विक महत्व

दुधवा नेशनल पार्क 1977 में टाइगर रिजर्व के रूप में घोषित किया गया था और यह प्रोजेक्ट टाइगर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां की जैव विविधता न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे भारत के पारिस्थितिक संतुलन में योगदान देती है।

भारत-नेपाल सीमा से सटे इस पार्क का विस्तार लगभग 490 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें किशनपुर व कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य भी शामिल हैं। दुधवा क्षेत्र गंगा-घाघरा के बीच स्थित तराई बेल्ट का हिस्सा है, जो विश्व के सबसे उपजाऊ और जैव विविध इलाकों में गिना जाता है।

स्थानीय समुदाय की भागीदारी

वन विभाग ने इस वर्ष स्थानीय ग्रामीणों को भी पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की योजना बनाई है। पार्क प्रशासन के अनुसार, “इको-गाइड्स, होमस्टे और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।”

रिपोर्ट - मों. शकील

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