सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, आस्था और अदम्य स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक है। यह वह तीर्थ है, जिसने इतिहास के सबसे क्रूर विदेशी आक्रमणों को झेला, बार-बार ध्वस्त हुआ, लेकिन हर बार पहले से अधिक वैभव और गौरव के साथ पुनः खड़ा हुआ। वर्ष 2026 सोमनाथ मंदिर के इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव है , जब इस पवित्र ज्योतिर्लिंग पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष और इसके पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक भावपूर्ण पोस्ट और विस्तृत लेख साझा करते हुए सोमनाथ को भारत माता की उन करोड़ों वीर संतानों के स्वाभिमान और अदम्य साहस की गाथा बताया, जिनके लिए अपनी संस्कृति और सभ्यता सर्वोपरि रही है।
“जय सोमनाथ”: पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “वर्ष 2026 में आस्था की हमारी तीर्थस्थली सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं। बार-बार हुए हमलों के बावजूद हमारा सोमनाथ मंदिर आज भी अडिग खड़ा है।”
उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल पत्थरों की संरचना नहीं, बल्कि उन अनगिनत बलिदानों की स्मृति है, जिन्होंने पीढ़ी-दर-पीढ़ी इसे जीवित रखा। पीएम मोदी के अनुसार, मिटाने की मानसिकता रखने वाले इतिहास के गर्त में चले गए, लेकिन सोमनाथ आज भी भारत के विश्वास का मजबूत आधार बनकर खड़ा है।
जय सोमनाथ!
वर्ष 2026 में आस्था की हमारी तीर्थस्थली सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं। बार-बार हुए हमलों के बावजूद हमारा सोमनाथ मंदिर आज भी अडिग खड़ा है! सोमनाथ दरअसल भारत माता की उन करोड़ों वीर संतानों के स्वाभिमान और अदम्य साहस की गाथा है,…
— Narendra Modi (@narendramodi) January 5, 2026
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान
गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान रखता है। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम की पंक्ति “सौराष्ट्रे सोमनाथं च…” से ही ज्योतिर्लिंगों का वर्णन शुरू होता है। यह तथ्य ही इस धाम की सभ्यतागत और आध्यात्मिक महत्ता को दर्शाता है।
पीएम मोदी ने अपने लेख में लिखा कि सोमनाथ शब्द सुनते ही मन और हृदय में गर्व और आस्था की भावना जागृत हो जाती है। यह मंदिर भारत के पश्चिमी तट पर स्थित होकर भी पूरे राष्ट्र की चेतना से जुड़ा हुआ है।
सोमनाथ केवल पत्थर और शिल्प नहीं है—यह भारत के सभ्यतागत इतिहास का जीवंत प्रतीक है।
सन् 1026 ईस्वी में महमूद ग़ज़नी ने सोमनाथ पर आक्रमण किया, केवल एक मंदिर को नष्ट करने के लिए नहीं, बल्कि आस्था को अपमानित करने के उद्देश्य से। बाद की शताब्दियों में, अलाउद्दीन खिलजी से लेकर औरंगज़ेब… pic.twitter.com/jzHwsdNg6B
— डीडी न्यूज़ (@DDNewsHindi) January 5, 2026
1026 का आक्रमण और हजार वर्षों का संघर्ष
जनवरी 1026 में गजनी के महमूद द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किया गया आक्रमण भारतीय इतिहास की सबसे पीड़ादायक घटनाओं में से एक माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे आस्था और सभ्यता के एक महान प्रतीक को नष्ट करने का हिंसक और बर्बर प्रयास बताया। हालांकि यह आक्रमण मंदिर को तोड़ सका, लेकिन भारतीय चेतना, विश्वास और संस्कृति को समाप्त नहीं कर सका।
पीएम मोदी के शब्दों में, “यह ऐसा दुख है, जिसकी पीड़ा इतने समय बाद भी महसूस होती है। फिर भी, एक हजार वर्ष बाद आज भी यह मंदिर पूरे गौरव के साथ खड़ा है।”
विध्वंस से पुनर्निर्माण तक की कहानी
सोमनाथ की कहानी केवल विनाश की नहीं, बल्कि संघर्ष, बलिदान और पुनर्निर्माण की प्रेरक गाथा है। इतिहास गवाह है कि इस मंदिर पर सैकड़ों बार आक्रमण हुए, लेकिन हर बार यह अपने ही खंडहरों से पुनः खड़ा हुआ, पहले की तरह सशक्त, पहले की तरह जीवंत।
मंदिर का वर्तमान स्वरूप वर्ष 1951 में आकार ले सका। संयोग से वर्ष 2026 न केवल आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने का वर्ष है, बल्कि पुनर्निर्माण के 75 वर्ष भी इसी साल पूरे होंगे।

सरदार पटेल और डॉ. राजेंद्र प्रसाद की भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया। आज़ादी के बाद सोमनाथ के पुनर्निर्माण का पवित्र दायित्व सरदार पटेल ने अपने हाथों में लिया। 1947 में दीवाली के समय उनकी सोमनाथ यात्रा ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया और उन्होंने वहीं यह संकल्प लिया कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण होगा।
11 मई 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। डॉ. राजेंद्र प्रसाद अडिग रहे और उसी निर्णय ने एक नया इतिहास रच दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने के.एम. मुंशी के योगदान को भी याद किया और कहा कि उनके बिना सोमनाथ का उल्लेख अधूरा है। सरदार पटेल के साथ खड़े होकर उन्होंने सांस्कृतिक पुनर्जागरण को मजबूती दी। उनकी पुस्तक ‘सोमनाथ: द श्राइन इटरनल’ को प्रधानमंत्री ने अवश्य पढ़ने योग्य बताया।
सोमनाथ: आज भी हर क्षेत्र के लोगों के जोड़ता
पीएम मोदी ने लिखा कि अनादि काल से सोमनाथ जीवन के हर क्षेत्र के लोगों को जोड़ता आया है। जैन परंपरा के आचार्य हेमचंद्राचार्य से लेकर आज के श्रद्धालुओं तक, सोमनाथ सभी को आत्मिक शांति और ठहराव का अनुभव कराता है।
उन्होंने कहा कि सोमनाथ आज भी विश्व को यह संदेश देता है कि आस्था को न मिटाया जा सकता है, न झुकाया जा सकता है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को सोमनाथ मंदिर जाएंगे और सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में भाग लेंगे। 8 से 11 जनवरी तक मंदिर परिसर में कई आध्यात्मिक और सामाजिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
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