नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान आज लोकसभा में प्रश्नकाल उस समय गर्मा गया जब केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देश की खाद्य सुरक्षा और कृषि विकास पर अपनी बात रखी। ‘किसान पुत्र’ के रूप में पहचाने जाने वाले शिवराज सिंह ने एक ओर जहाँ भारतीय किसानों की मेहनत से बने रिकॉर्ड उत्पादन के आंकड़े पेश किए, वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल की ममता सरकार और कांग्रेस के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दो टूक कहा कि बंगाल सरकार की उदासीनता के कारण वहां के गरीब किसान केंद्र की लाभकारी योजनाओं से वंचित रह रहे हैं।
“PL-480 के मोहताज थे, आज दुनिया को खिला रहे हैं”
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सदन को जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन लगभग 357 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने अतीत की याद दिलाते हुए कहा कि एक समय था जब भारत को ‘PL-480’ के तहत आयातित घटिया गेहूं पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन आज हालात बदल चुके हैं।
कृषि मंत्री ने गर्व से बताया कि भारत ने 150 मिलियन टन से अधिक चावल उत्पादन के साथ चीन को पछाड़कर दुनिया में पहला स्थान हासिल कर लिया है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, “आज देश के गोदाम गेहूं और चावल से इतने भरे पड़े हैं कि सरकार को चिंता इस बात की है कि इन्हें रखें कहाँ? पूरी दुनिया आज भारत के किसानों और हमारी नीतियों की सराहना कर रही है।”
बंगाल सरकार पर बरसे शिवराज: “योजनाएं लागू नहीं कर रही ममता दीदी”
भाषण के दौरान शिवराज सिंह चौहान का रुख तब कड़ा हो गया जब उन्होंने पश्चिम बंगाल का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं को बंगाल सरकार ठीक ढंग से लागू नहीं कर रही है। उन्होंने कहा, “यह बेहद दुखद है कि राजनीतिक द्वेष के कारण पश्चिम बंगाल के गरीब किसान उन लाभों से वंचित हैं जो देश के अन्य राज्यों के किसानों को मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी का लक्ष्य भारत को दुनिया का ‘फूड बास्केट’ बनाना है, लेकिन राज्यों की ऐसी उदासीनता विकास में बाधक है।”
प्राकृतिक खेती: “मिट्टी का स्वास्थ्य बचाना हमारी जिम्मेदारी”
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों पर निशाना साधते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पिछली सरकारों ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से होने वाले नुकसान पर कभी ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि इससे न केवल मिट्टी खराब हुई, बल्कि इंसानों में बीमारियाँ भी बढ़ीं।
प्राकृतिक खेती मिशन का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया:
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गंगा के किनारे क्रांति: गंगा जैसी पवित्र नदियों के किनारों पर 5 किलोमीटर तक के क्षेत्र में रासायनिक मुक्त खेती को प्राथमिकता दी जा रही है।
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1 करोड़ किसानों को प्रशिक्षण: देशभर में एक करोड़ से ज्यादा किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए तैयार किया गया है।
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लागत कम, उत्पादन ज्यादा: मंत्री ने दावा किया कि देसी गाय के गोबर, गोमूत्र और स्थानीय वनस्पतियों से बने ‘घनजीवामृत’ और ‘नीमास्त्र’ के उपयोग से उत्पादन घटता नहीं, बल्कि बढ़ता है।
दालों और बागवानी में भी नए कीर्तिमान
कृषि मंत्री ने आंकड़ों के जरिए बताया कि ‘सेल्फ-रिलायंस इन पल्सेज मिशन’ के तहत दालों का उत्पादन 19 मिलियन टन से बढ़कर 25-26 मिलियन टन तक पहुंच गया है। वहीं बागवानी (फल-सब्जी) उत्पादन भी 369 मिलियन टन के पार चला गया है, जो किसानों के लिए अतिरिक्त आय का सबसे बड़ा जरिया बन रहा है। उन्होंने कहा कि 2014-15 के मुकाबले खाद्यान्न उत्पादन में करीब 42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो हरित क्रांति की रफ्तार से भी तेज है।
विश्व बंधु बनेगा भारत
शिवराज सिंह चौहान ने सदन में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी का विजन भारत को केवल आत्मनिर्भर बनाना नहीं, बल्कि “फूड बास्केट ऑफ द वर्ल्ड” बनाना है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को दोहराते हुए कहा कि रिकॉर्ड उत्पादन और मजबूत भंडारण क्षमता के साथ भारत वैश्विक खाद्य सुरक्षा में अपनी बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
