ईरान-इज़राइल युद्ध का दलाल स्ट्रीट पर प्रहार: सेंसेक्स 1048 अंक टूटा, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से निवेशकों के डूबे अरबों रुपये

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों सहित भारतीय शेयर बाजार की नींव हिला दी है। सोमवार को कारोबारी सत्र के दौरान दलाल स्ट्रीट पर जबरदस्त बिकवाली का दबाव देखा गया, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय स्टॉक इंडेक्स लाल निशान पर बंद हुए। हालांकि, बाजार ने शुरुआती घंटों की भारी गिरावट के बाद निचले स्तरों से कुछ हद तक उबरने की कोशिश की, लेकिन निवेशकों के बीच व्याप्त अनिश्चितता ने बढ़त को सीमित रखा।

दिन का कारोबार खत्म होने पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,048.34 अंक यानी 1.29 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ 80,238.85 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 312.95 अंक यानी 1.24 प्रतिशत फिसलकर 24,865.70 पर सिमट गया। बाजार की इस गिरावट ने निवेशकों की संपत्ति को बड़ा नुकसान पहुँचाया है, क्योंकि ईरान के सुप्रीम लीडर की हत्या और उसके बाद की सैन्य कार्यवाहियों ने वैश्विक स्तर पर जोखिम की स्थिति पैदा कर दी है।

इंडिया VIX में 25% का उछाल: निवेशकों के बीच बढ़ा जोखिम का डर

बाजार में व्याप्त अस्थिरता का सबसे सटीक पैमाना माना जाने वाला ‘इंडिया VIX’ (Volatility Index) आज क्लोजिंग के समय 25 प्रतिशत तक ऊपर पहुंच गया। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार, इंडिया VIX में आया यह उछाल मार्केट पार्टिसिपेंट्स के बीच बढ़ती अनिश्चितता और जोखिम से बचने (Risk Aversion) की प्रवृत्ति का स्पष्ट संकेत है। वित्त की भाषा में वोलैटिलिटी को कीमतों में बदलाव की दर और परिमाण के रूप में देखा जाता है, जिसे सीधे तौर पर निवेश के जोखिम से जोड़ा जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने न केवल भारतीय बल्कि वैश्विक बाजारों को भी अस्थिर कर दिया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भारतीय रुपये (INR) की कमजोरी तेल आपूर्ति में संभावित रुकावटों की चिंताओं को दर्शाती है। इससे भारत में महंगाई का दबाव बढ़ने और राजकोषीय स्थिति (Fiscal) पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। विशेष रूप से एनर्जी और केमिकल जैसे सेक्टर, जो कच्चे तेल पर निर्भर हैं, उनके मार्जिन पर निकट भविष्य में भारी दबाव देखा जा सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में 7.5% की तेजी, 72 डॉलर के पार पहुंचे दाम

युद्ध की खबरों के बीच वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराने का डर सताने लगा है। सोमवार को रिपोर्ट फाइल किए जाने तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में WTI क्रूड फ्यूचर्स 7.5 प्रतिशत की भारी बढ़त के साथ 72 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहे थे। कोटक सिक्योरिटीज के फंडामेंटल रिसर्च के वीपी सुमित पोखरना का कहना है कि संयुक्त राज्य अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमतें शॉर्ट टर्म में ऊंचे स्तर पर ही बनी रहने की उम्मीद है।

क्रिसिल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर सेहुल भट्ट ने भारत की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट के ताजा घटनाक्रम से कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की कीमतों और खरीद का जोखिम बढ़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल और 50% से अधिक एलएनजी आयात करता है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में मामूली बढ़ोत्तरी भी भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकती है।

विदेशी निवेशकों की निकासी और भविष्य की रणनीति

बाजार के जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली की रफ्तार तेज हो गई है। निवेशक वर्तमान में पारंपरिक सुरक्षित ठिकानों (Safe-haven Assets) जैसे सोना और डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं और बाजार में स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत चौहान ने एक सकारात्मक पहलू की ओर इशारा करते हुए कहा कि मौजूदा मार्केट टेक्सचर कमजोर जरूर है, लेकिन यह ‘ओवरसोल्ड’ स्थिति में पहुंच गया है। ऐसे में मौजूदा स्तरों से एक टेक्निकल बाउंस-बैक (सुधार) की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता है।

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