Shamli में फिल्म डायरेक्टर और उसकी पत्नी गिरफ्तार, 41 लोगों के साथ 1.77 करोड़ रुपये की ठगी का मामला

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Shamli जिले में साइबर क्राइम पुलिस ने फिल्म डायरेक्टर हिमांक प्रशांत कनव और उनकी पत्नी सुरभि भार्गव को गिरफ्तार किया है। हिमांक मुंबई के आजाद नगर के रहने वाले हैं और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से पढ़ाई पूरी करने के बाद शॉर्ट फिल्मों का निर्देशन करते थे। उनकी मुलाकात राघव नामक व्यक्ति से हुई, जिसने शॉर्ट फिल्म के लिए फाइनेंसर की मदद मांगी। सुरभि भार्गव शामली के गगन विहार की रहने वाली हैं। आरोपियों ने पंजाब नेशनल बैंक, शामली में 'हिमांक प्रशांत केमिस्ट नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड' का अकाउंट खुलवाया और 8 अप्रैल 2024 को एक दिन में लगभग 98.38 लाख रुपये विभिन्न राज्यों से ट्रांसफर किए। आरोपियों ने 41 लोगों से कुल 1.77 करोड़ रुपये की ठगी की। फर्जी प्रोजेक्ट और मुनाफे का झांसा देकर स्थानीय और बाहरी सहयोगियों के माध्यम से पैसा हड़पने का यह मामला सामने आया। पुलिस जांच कर रही है। पुलिस ने मुंबई के फिल्म उद्योग से जुड़े एक पति-पत्नी जोड़ी को गिरफ्तार किया है। यह मामला न केवल शामली बल्कि पूरे देश में ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों पर चेतावनी का संकेत है।

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गिरफ्तारी की पूरी जानकारी

शामली थाना साइबर क्राइम ने मुंबई के फिल्म डायरेक्टर हिमांक प्रशांत कनव और उनकी पत्नी सुरभि भार्गव को गिरफ्तार किया। आरोप है कि यह जोड़ी मिलकर 41 व्यक्तियों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुकी थी। ठगी का तरीका अत्यंत संगठित और योजनाबद्ध था।

पुलिस के अनुसार, पीड़ितों ने अलग-अलग राज्यों से शिकायत दर्ज कराई। पीएनबी बैंक खाते में जमा रकम का उपयोग कर ठगी की गई थी। अब पुलिस मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान और भूमिका की भी जांच कर रही है, जिसमें हर्षित (दिल्ली), राघव (दिल्ली) और रिहान (बिहार) शामिल हैं।

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आरोपी और उनका नेटवर्क

हिमांक प्रशांत कनव, मूल रूप से पंजाब निवासी, मुंबई में एडवर्टाइजमेंट इंडस्ट्री में कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में काम कर चुके हैं। वहीं उनकी पत्नी सुरभि भार्गव, शामली की निवासी हैं।

पुलिस पूछताछ में हिमांक ने बताया कि उन्होंने अपने काम के दौरान राघव से संपर्क किया, जो शॉर्ट फिल्म्स डायरेक्ट करता है। राघव के परिचित हर्षित उर्फ ऋतिक से दिल्ली में मुलाकात हुई। हर्षित ने हिमांक को बताया कि उनके पास कुछ बड़े निवेशक और वित्तीय लिंक हैं, जिन्हें करंट अकाउंट की आवश्यकता थी, जिसमें करोड़ों रुपये का लेन-देन किया जाएगा और इसके बदले अच्छे कमीशन का ऑफर दिया जाएगा।

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ठगी का तरीका

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह शॉर्ट फिल्म प्रोजेक्ट्स के बहाने निवेशकों को आकर्षित करता था। इसके तहत निम्नलिखित तरीके अपनाए गए:

  1. फिल्म प्रोजेक्ट का झांसा: आरोपी शॉर्ट फिल्म बनाने का वादा करके निवेशकों से संपर्क करता।

  2. बैंक खाते का दुरुपयोग: पीड़ितों से रकम लेने के बाद, इसे Bank खातों के माध्यम से निकाल लिया जाता।

  3. संगठित नेटवर्क: अलग-अलग राज्यों में बैठे लोग, जैसे दिल्ली और बिहार के लोग, इस गिरोह में शामिल थे और उन्होंने रकम का ट्रांजेक्शन सुनिश्चित किया।

  4. कमीशन का लालच: पीड़ितों को अधिक लाभ का लालच देकर पैसे की मांग की जाती।

पुलिस का कहना है कि यह मामला साइबर क्राइम का एक बड़ा उदाहरण है, जिसमें न केवल तकनीकी कौशल बल्कि लोगों को भ्रमित करने की कला भी शामिल थी।

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