भारत में संसद का Winter Session हर साल महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाओं का हिस्सा होता है। 2025 का यह सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है और इसमें कई मुद्दों पर चर्चा की संभावना जताई जा रही है। विपक्षी दलों ने कुछ प्रमुख मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग की है, जबकि सरकार इस सत्र में अपने सुधार एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इस बार सत्र के दौरान 13 महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश किया जाएगा, जिनमें असैन्य परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने और आर्थिक सुधारों से जुड़ी नीतियाँ शामिल हैं।
Parliament Winter Session 2025: विपक्ष की प्रमुख मांगें
संसद के Winter Session के दौरान विपक्षी दलों ने कई अहम मुद्दों पर चर्चा की मांग की है। विपक्ष ने खास तौर पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), दिल्ली आत्मघाती बम धमाके और दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की बढ़ती स्थिति पर तत्काल चर्चा की अपील की है। इन मुद्दों को लेकर विपक्ष सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
तरुण गोगोई, कांग्रेस संसदीय दल के उपनेता ने कहा कि एसआईआर के माध्यम से वोट चोरी की जा रही है और लाखों मतदाताओं के नाम सूची से गायब हो गए हैं। यह आरोप बिहार के बाद उन राज्यों में भी लग रहे हैं जहां एसआईआर प्रक्रिया लागू की गई है। विपक्ष ने इसे एक गंभीर मुद्दा बताते हुए संसद में चर्चा की मांग की है।
इसके अलावा, दिल्ली में हुए आत्मघाती बम धमाके और दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति भी विपक्ष के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार इन मुद्दों पर गंभीर कदम उठाने में नाकाम रही है।
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सर्वदलीय बैठक में क्या हुआ?
संसद सत्र से पहले रविवार को आयोजित सर्वदलीय बैठक में 36 दलों के 50 से अधिक नेताओं ने हिस्सा लिया। इस बैठक में सरकार ने विपक्ष से सत्र के सुचारू संचालन में सहयोग की अपील की। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, किरेन रिजिजू और अर्जुन राम मेघवाल ने बैठक में भाग लिया, जबकि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसकी अध्यक्षता की।
सर्वदलीय बैठक में सरकार ने अपने विकास कार्यों की प्राथमिकताओं को रखा और विपक्ष से इस सत्र के दौरान मुद्दों पर संविधान सम्मत चर्चा की उम्मीद जताई। दूसरी ओर, विपक्ष ने एसआईआर, दिल्ली धमाका और प्रदूषण जैसे मामलों पर चर्चा की मांग की।
सरकार के प्रस्तावित 13 विधेयक
सरकार ने शीतकालीन सत्र में 13 महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने की योजना बनाई है, जिनमें से कई आर्थिक और सामाजिक सुधारों से जुड़ी नीतियों को लागू करने का प्रयास किया जाएगा। इनमें कुछ प्रमुख विधेयक निम्नलिखित हैं:
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जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) बिल
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इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (संशोधन) बिल
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मणिपुर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (दूसरा संशोधन) बिल
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रिपीलिंग एंड अमेंडिंग बिल
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एटॉमिक एनर्जी बिल
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कॉर्पोरेट लॉज (संशोधन) बिल
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सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड बिल
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इंश्योरेंस लॉज (संशोधन) बिल
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आर्बिट्रेशन एंड कंसीलिएशन (संशोधन) बिल
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हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया बिल
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सेंट्रल एक्साइज (अमेंडमेंट) बिल
- हेल्थ सिक्योरिटी और नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल एवं एस. नेशनल हाईवे (संशोधन) बिलइन विधेयकों का उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर करना और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सुधार लाना है। विशेष रूप से, असैन्य परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने की योजना से भारतीय ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव की संभावना है।
विपक्ष के आरोप और सरकार का रुख
विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह संविधान सम्मत तरीके से मुद्दों पर चर्चा कराने में विफल रही है। विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा कि सरकार ने प्रदूषण और फिदायीन हमले के मामलों पर गंभीर कार्रवाई नहीं की। वहीं, सरकार ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि वह संविधान के तहत सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष से सहयोग की अपील की है।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “सरकार संविधान और नियमों के तहत सभी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार है। कई अहम विधेयक पेश होने हैं। हम विपक्ष से अनुरोध करते हैं कि इन्हें पारित कराने में वह सहयोग करें।”
आर्थिक सुधार और विपक्ष का विरोध
संसद का शीतकालीन सत्र इस बार आर्थिक सुधारों पर विशेष ध्यान देने का अवसर है। सरकार ने पहले ही संकेत दिए हैं कि वह इस सत्र में सुधारों को प्राथमिकता देगी, खासकर उन विधेयकों को लेकर जो अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के उद्देश्य से पेश किए गए हैं। विपक्ष ने आरोप लगाया कि विधानसभाओं से पास विधेयकों को राज्यपाल रोके हुए हैं। विपक्ष के शासन वाले राज्यों का पैसा भी रोका जा रहा।







