संभल ज़िले के चंदौसी तहसील क्षेत्र में प्रशासन ने सरकारी भूमि पर अवैध निर्माणों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। यह मामला नरौली कस्बे के पास का है, जहाँ राजस्व विभाग की टीम ने जांच के दौरान लगभग 5 बीघा ग्राम समाज की जमीन पर मदरसा जिया उल उलूम और 12 मकानों का निर्माण पाया है। प्रशासन ने मौके पर पहुँचकर सभी अवैध निर्माणों पर लाल निशान लगाते हुए 15 दिनों के भीतर हटाने का नोटिस जारी कर दिया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में ये निर्माण नहीं हटाए गए, तो बुलडोजर से कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, यह जमीन राजस्व रिकॉर्ड में ग्राम सभा की संपत्ति के रूप में दर्ज है और किसी भी व्यक्ति या संस्था को इस पर निर्माण की अनुमति नहीं दी गई थी। तहसीलदार चंदौसी रवि सोनकर के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने मौके पर जाकर माप-जोख की और दस्तावेजों की जांच की। टीम ने पाया कि जमीन पर न केवल मदरसा का निर्माण हुआ है बल्कि उसके आसपास कई पक्के मकान भी बनाए गए हैं, जिनमें कुछ परिवार वर्षों से रह रहे हैं।
प्रशासनिक जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि इन निर्माणों के लिए न तो कोई लीज दी गई और न ही ग्राम सभा या राजस्व विभाग की अनुमति ली गई। इस कारण यह निर्माण पूरी तरह अवैध घोषित किए गए हैं। तहसील प्रशासन ने इस पर कार्रवाई करते हुए सभी अतिक्रमणकारियों को चेतावनी दी है कि वे स्वेच्छा से निर्माण हटाएँ, अन्यथा बलपूर्वक कार्रवाई की जाएगी।
राजस्व विभाग की इस कार्रवाई से पूरे इलाके में हलचल मच गई है। कई स्थानीय लोग इस कदम का समर्थन कर रहे हैं और इसे सरकारी संपत्ति की रक्षा के लिए सही दिशा में उठाया गया कदम बता रहे हैं। वहीं, कुछ स्थानीय निवासियों ने दावा किया है कि वे वर्षों से वहाँ रह रहे हैं और उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि जमीन सरकारी है। इस पर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, और सरकारी भूमि पर कब्जा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
तहसीलदार रवि सोनकर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि “राजस्व टीम की जांच में यह बात सामने आई है कि मदरसा और मकानों का निर्माण ग्राम सभा की भूमि पर हुआ है। सभी को 15 दिनों का समय दिया गया है। यदि इस अवधि में निर्माण नहीं हटाए गए तो राजस्व और पुलिस टीम बुलडोजर के माध्यम से अतिक्रमण हटाएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराना प्राथमिकता में है और इस दिशा में चंदौसी प्रशासन सख्त है।
स्थानीय निवासी सुलेमान ने बताया कि “यहां मदरसा कई वर्षों से चल रहा है और आस-पास लोग भी रह रहे हैं, लेकिन प्रशासन की जांच के बाद पहली बार पता चला कि यह सरकारी ज़मीन है। अब प्रशासन ने जो नोटिस दिया है, उसके बाद लोग डरे हुए हैं।” एक अन्य निवासी ने कहा कि प्रशासन को पहले सर्वे करना चाहिए था ताकि जिनके पास वैध कागज हैं उन्हें परेशान न किया जाए।
राजस्व विभाग ने इस कार्रवाई में पारदर्शिता बरतने के लिए वीडियोग्राफी भी कराई है ताकि आगे किसी प्रकार का विवाद न हो। सूत्रों के मुताबिक, यह मामला अब ज़िला प्रशासन के उच्च अधिकारियों तक पहुँच गया है और राजस्व परिषद को भी इसकी रिपोर्ट भेजी जाएगी।
प्रशासन का यह सख्त रवैया प्रदेश में चल रही “सरकारी भूमि मुक्त अभियान” नीति के तहत है। योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा हाल के वर्षों में ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है। राज्य के कई जिलों में इस तरह की कार्रवाई पहले भी की जा चुकी है, जहाँ सरकारी या ग्राम समाज की जमीनों को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया। संभल में भी इसी नीति के तहत प्रशासन ने यह बड़ा कदम उठाया है।
जानकारों के अनुसार, मदरसा जिया उल उलूम और मकानों पर बुलडोजर चलाने से पहले प्रशासन कानूनी प्रक्रिया पूरी करेगा। जिन लोगों ने नोटिस प्राप्त किया है, वे चाहे तो आपत्ति दर्ज करा सकते हैं, लेकिन यदि जमीन पर उनका स्वामित्व प्रमाणित नहीं हुआ तो निर्माण ध्वस्त कर दिए जाएंगे।
इस कार्रवाई के बाद प्रशासन ने आसपास के अन्य क्षेत्रों में भी सरकारी जमीनों का सर्वे शुरू कर दिया है, ताकि भविष्य में ऐसे अतिक्रमण न हो सकें। तहसील प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि ग्राम सभा की भूमि पर कब्जा करने वालों की सूची तैयार की जा रही है और उनके खिलाफ राजस्व कोड की धाराओं में मुकदमे दर्ज किए जाएंगे।
इस कार्रवाई से एक बार फिर स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश सरकार और प्रशासन अवैध निर्माणों और अतिक्रमण के खिलाफ पूरी तरह गंभीर है। यह कदम न केवल सरकारी संपत्ति की रक्षा करेगा बल्कि आने वाले समय में अतिक्रमणकर्ताओं के लिए एक मिसाल भी बनेगा।
रिपोर्ट: नितिन सागर, संभल







