नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी निजी कंपनी Reliance Industries ने न्यू और रिन्यूएबल एनर्जी बिजनेस को और सशक्त बनाने के लिए बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। कंपनी ने अपनी 16 स्टेप-डाउन सब्सिडियरी कंपनियों को खत्म करते हुए उन्हें Reliance New Energy Limited (RNEL) में मर्ज कर दिया है। यह विलय 21 जनवरी 2026 से प्रभावी हो गया है।
इन 16 कंपनियों का काम मुख्य रूप से ग्रीन हाइड्रोजन, हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर प्रोडक्शन, फ्यूल सेल मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी स्टोरेज और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उभरते एनर्जी सेगमेंट में था। अब ये सभी इकाइयां एक ही छत के नीचे आकर रिलायंस के न्यू एनर्जी विजन को गति देंगी।
किन कंपनियों का हुआ विलय
रिलायंस ने जिन कंपनियों को RNEL में मर्ज किया है, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
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रिलायंस पावर इलेक्ट्रॉनिक्स
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रिलायंस इलेक्ट्रोलाइजर मैन्युफैक्चरिंग
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रिलायंस ग्रीन हाइड्रोजन एंड ग्रीन केमिकल्स
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रिलायंस न्यू एनर्जी स्टोरेज
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रिलायंस हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइसिस
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रिलायंस हाइड्रोजन फ्यूल सेल
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रिलायंस कार्बन फाइबर सिलेंडर
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कच्छ न्यू एनर्जी प्रोजेक्ट्स
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कलंबोली ईस्ट और नॉर्थ थर्ड इंफ्रा
सहित कुल 16 कंपनियां, जो पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन हाइड्रोजन, एनर्जी स्टोरेज और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़ी थीं।
यह फैसला कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के पश्चिमी क्षेत्रीय रीजनल डायरेक्टर के आदेश के बाद लागू किया गया।
मुकेश अंबानी का विजन
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने Q3 नतीजों की घोषणा के दौरान कहा था कि रिलायंस अब AI और न्यू एनर्जी के क्षेत्र में वैल्यू क्रिएशन के नए दौर में प्रवेश कर रही है।
उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि रिलायंस इन युग बदलने वाली टेक्नोलॉजी में अग्रणी भूमिका निभाएगा और भारत व दुनिया के लिए बड़े पैमाने पर सस्टेनेबल समाधान देगा।”
बैटरी और एनर्जी स्टोरेज पर फोकस
रिलायंस न्यू एनर्जी के तहत बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को भी तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है। कंपनी बैटरी सेल से लेकर बैटरी पैक और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) तक पूरा इकोसिस्टम विकसित कर रही है।
रिलायंस ने बताया कि 40 GWh सालाना क्षमता वाली BESS असेंबली और सेल मैन्युफैक्चरिंग गीगाफैक्ट्री के निर्माण का काम तेज़ी से चल रहा है, जिसे इस साल चरणबद्ध तरीके से चालू करने की योजना है।
क्यों अहम है यह कदम
विशेषज्ञों के मुताबिक, 16 कंपनियों का एकीकृत ढांचे में विलय करने से लागत घटेगी, फैसले तेज़ होंगे और ग्रीन हाइड्रोजन व रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में रिलायंस की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और मजबूत होगी। यह कदम भारत के नेट-ज़ीरो और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।