रामपुर के बहुचर्चित पायल हत्याकांड में आखिरकार आठ साल बाद न्याय की घड़ी आई। मंगलवार को अपर जिला जज प्रथम अजय कुमार दीक्षित की अदालत ने इस जघन्य हत्याकांड में पिता-पुत्र समेत छह दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही सभी दोषियों पर 35-35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। सजा के दौरान सभी आरोपी जेल से न्यायिक अभिरक्षा में अदालत में पेश किए गए।
यह मामला रामपुर जिले के गंज कोतवाली क्षेत्र का है, जिसने वर्ष 2018 में पूरे जिले और प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था।
क्या है पूरा मामला ?
मुहल्ला दरख्त कैथ हमाम वाली गली निवासी शाहनवाज की बेटी जैनब उर्फपायल 1 नवंबर 2018 की शाम अचानक लापता हो गई थी। परिजनों ने शुरुआत में गुमशुदगी दर्ज कराई, लेकिन जब काफी तलाश के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला, तो मामला गंभीर होता चला गया।
मृतका के भाई राहिल ने थाना गंज में मुकदमा दर्ज कराते हुए जहांगीर, इमरोज और प्रभजीत सिंह उर्फ सागर पर पायल के अपहरण का आरोप लगाया था। जांच आगे बढ़ने पर यह मामला अपहरण से हत्या में तब्दील हो गया।
मंगेतर ही निकला कातिल
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि पायल का रिश्ता ताहिर खां के बेटे जहांगीर से तय हुआ था। बाद में जहांगीर ने यह रिश्ता तोड़ दिया और दूसरी जगह शादी तय कर ली। पायल इस फैसले से सहमत नहीं थी और वह जहांगीर से ही शादी करना चाहती थी।
इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। जांच में सामने आया कि जहांगीर किसी दूसरी लड़की के संपर्क में था, जिसकी जानकारी पायल को लग गई थी। इसी कारण उसने पायल को रास्ते से हटाने की साजिश रची।
फार्महाउस में की गई निर्मम हत्या
आरोप है कि जहांगीर ने पायल को अपने फार्महाउस पर बुलाया और अपने साथियों निसार, इमरोज और प्रभजीत उर्फ सागर की मदद से उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को कुल्हाड़ी से तीन टुकड़ों में काटा गया, प्लास्टिक के कट्टों में भरकर जमीन में दबा दिया गया।
इस जघन्य वारदात की जानकारी जहांगीर ने अपने पिता ताहिर खां और ताऊ के बेटे दानिश को भी दी थी, जिसके बाद वे भी इस अपराध में शामिल पाए गए।
11 दिन बाद मिला शव
करीब 11 दिन की तलाश के बाद 27 नवंबर 2018 की रात पुलिस ने कोसी नदी किनारे स्थित जहांगीर के फार्महाउस से पायल का शव तीन टुकड़ों में बरामद किया। इस खुलासे के बाद पुलिस ने हत्या की धाराएं बढ़ाते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
पुलिस ने मामले में ठोस साक्ष्य, वैज्ञानिक प्रमाण और गवाहों के बयान के आधार पर सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद 22 जनवरी को अदालत ने सभी छह आरोपियों को दोषी करार दिया। इसके बाद मंगलवार को सजा पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कड़ा रुख अपनाया और सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अभियोजन पक्ष की दलील
जिला शासकीय अधिवक्ता अमित कुमार सक्सेना और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता प्रताप सिंह मौर्य ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने अदालत में मजबूत सबूत और गवाह पेश किए, जिनके आधार पर दोष सिद्ध हुआ। उन्होंने कहा कि यह फैसला समाज में अपराध के खिलाफ एक सख्त संदेश है।
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