अयोध्या: रामनगरी में विजयदशमी के पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का भव्य पथ संचलन आयोजित किया गया, जिसने नगरवासियों के बीच अनुशासन और संगठन का अद्वितीय प्रदर्शन किया। यह यात्रा राम कथा पार्क से शुरू हुई, जिसमें हजारों स्वयंसेवकों की भगवा ध्वज तले अनुशासित टुकड़ियां शामिल थीं। नगर के मुख्य मार्गों पर उपस्थित नागरिकों ने उत्साह और श्रद्धा के साथ स्वयंसेवकों का स्वागत किया। पथ संचलन का मुख्य उद्देश्य सामाजिक समरसता, देशभक्ति और अनुशासन का संदेश फैलाना था। भगवा झंडे, पारंपरिक संगीत और नारे पूरे नगर में गूंज रहे थे। पथ संचलन में शामिल स्वयंसेवक प्रत्येक मोड़ पर अनुशासित रूप से खड़े रहते और नागरिकों को समरसता और संगठन की भावना से परिचित कराते। नगर भ्रमण के दौरान स्वयंसेवकों ने बच्चों और युवाओं के लिए राष्ट्रभक्ति और सेवा के मूल्यों पर ध्यान केंद्रित किया। यह आयोजन रामनगरी के इतिहास में यादगार क्षण बन गया, क्योंकि यह न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि सामाजिक समरसता का भी प्रतीक रहा।

पथ संचलन के समापन स्थल पर राम मंदिर के मुख्य द्वार, बिरला धर्मशाला के पास, विभिन्न जातियों के संत और महात्माओं की उपस्थिति में सहभोज का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संघ के सरसहकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने उपस्थित स्वयंसेवकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि RSS का मूल उद्देश्य समाज में समानता, अनुशासन और एकजुटता स्थापित करना है। उन्होंने स्वयंसेवकों से अपील की कि वे अपने परिवारों और समुदाय में संघ के संदेश और कार्यों को पहुंचाने का प्रयास करें। दत्तात्रेय होसबोले ने शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की श्रृंखला का उल्लेख करते हुए कहा कि अयोध्या से शुरू हुए इस अभियान को पूरे प्रदेश में विस्तार दिया जाएगा। उन्होंने स्वयंसेवकों को मार्गदर्शन देते हुए कहा कि अनुशासन और संगठन के सिद्धांतों का पालन करते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उनके विचारों ने स्वयंसेवकों को प्रेरित किया और पूरे आयोजन को दिशा दी। इस कार्यशाला और पथ संचलन ने नगरवासियों और स्वयंसेवकों दोनों के लिए उत्साह और गर्व का माहौल तैयार किया।

सुबह आठ बजे राम कथा पार्क में आयोजित कार्यशाला में दत्तात्रेय होसबोले ने हजारों स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए संगठन, राष्ट्रहित और सामाजिक समरसता पर विशेष मार्गदर्शन दिया। उन्होंने स्वयंसेवकों को अनुशासन और सेवा भाव अपनाने की प्रेरणा दी। इस दौरान भगवा झंडे, परंपरागत संगीत और धार्मिक नारे वातावरण को जीवंत बना रहे थे। पथ संचलन में शामिल प्रत्येक स्वयंसेवक ने समाज में समानता, भाईचारा और एकता का संदेश फैलाने का संकल्प लिया। नगर भ्रमण के दौरान रास्ते में उपस्थित नागरिकों ने उत्साहपूर्वक पथ संचलन का स्वागत किया और इसे अपने मोबाइल में कैद किया। इस आयोजन ने स्थानीय लोगों में सामाजिक एकजुटता और राष्ट्रीय भावना को प्रबल किया। स्वयंसेवकों ने अपने कार्यों और अनुशासन के माध्यम से यह संदेश दिया कि सेवा और संगठन की भावना समाज में स्थायी बदलाव लाने में सक्षम है। यह पथ संचलन केवल एक भव्य शोभा यात्रा नहीं थी, बल्कि समाज में अनुशासन, समानता और सहयोग का प्रतीक भी बन गई।

रामनगरी के विभिन्न मार्गों पर पथ संचलन के दौरान भगवा झंडों की चमक, पारंपरिक संगीत और अनुशासित टुकड़ियों का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। नगरवासियों ने स्वयंसेवकों को उत्साहपूर्वक हिलाकर, फूलों की वर्षा कर और नारों के साथ स्वागत किया। बच्चों और युवाओं ने इस आयोजन में शामिल होकर समाज सेवा और राष्ट्रभक्ति के मूल्यों को आत्मसात किया। नगर भ्रमण के दौरान स्वयंसेवकों ने सामाजिक सद्भाव और समरसता का संदेश फैलाया, जिससे नागरिकों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि अनुशासन और संगठन का पालन करते हुए समाज में भाईचारा और समानता स्थापित की जा सकती है। उन्होंने स्वयंसेवकों को निर्देश दिया कि वे शताब्दी वर्ष की गतिविधियों को अपने परिवार और समाज तक पहुंचाने का प्रयास करें। इस आयोजन ने नगरवासियों और स्वयंसेवकों दोनों में उत्साह और गर्व का माहौल उत्पन्न किया।

पथ संचलन के अंतिम चरण में राम मंदिर के मुख्य द्वार पर उपस्थित संतों और महात्माओं ने स्वयंसेवकों के प्रयासों की सराहना की। सहभोज कार्यक्रम ने सभी जातियों और वर्गों के लोगों को एक मंच पर जोड़कर सामाजिक समरसता का सजीव उदाहरण प्रस्तुत किया। संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की श्रृंखला का यह आयोजन न केवल रामनगरी में, बल्कि पूरे प्रदेश में अनुशासन और संगठन का संदेश फैलाने में महत्वपूर्ण साबित हुआ। नगरवासियों और स्वयंसेवकों ने इसे यादगार क्षण के रूप में स्वीकार किया। इस भव्य पथ संचलन ने नगरवासियों को प्रेरित किया कि वे समाज में भाईचारा, अनुशासन और एकजुटता के मूल्यों को अपनाएं। आयोजन की भव्यता, अनुशासन और सामाजिक संदेश ने इसे रामनगरी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और यादगार क्षण बना दिया। यह पथ संचलन न केवल संघ के शताब्दी वर्ष का हिस्सा था, बल्कि समाज में अनुशासन, समानता और सेवा की भावना को फैलाने का भी सशक्त माध्यम साबित हुआ।