उत्तर प्रदेश के बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने इस विजयदशमी पर अपने बेंती महल में पारंपरिक शस्त्र पूजन की परंपरा निभाई। इस बार पूजा में करीब 200 से अधिक देशी-विदेशी हथियारों को सजाया गया, जिन्हें जनता के सामने प्रदर्शित किया गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों और वीडियो में पिस्टल, रिवॉल्वर, 12 बोर बंदूक, राइफल और थर्टी कार्बाइन जैसे हथियारों की चमक साफ नजर आ रही है।
राजा भैया हर वर्ष दशहरे पर अपने शस्त्रागार के हथियारों की पूजा करते हैं, जो क्षत्रिय राजपरंपरा का हिस्सा है। इस बार भी बेंती महल में विशेष रूप से हथियारों को सजाया गया और पूजा के बाद जनता के लिए भी खोला गया। राजा भैया के करीबी कुंवर अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपाल जी ने कहा, “सभी हथियार वैध लाइसेंस वाले हैं। जो देखना चाहे, दशहरे पर आ जाए।” यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, जब क्षत्रिय शासक विजय प्राप्ति के लिए शस्त्रों की आराधना करते थे।
इस बार की पूजा भानवी सिंह द्वारा 18 सितंबर को जारी किए गए वीडियो के जवाब के रूप में देखी जा रही है। वीडियो में उन्होंने राजा भैया पर अवैध हथियार रखने और जन सुरक्षा के लिए खतरा बनने का आरोप लगाया था। भानवी ने अपने वीडियो में हथियारों के साथ एक विवादित तस्वीर भी साझा की थी। इसके अलावा, 3 जून 2025 को उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में शिकायत दर्ज कराई थी।
राजा भैया के भाई अक्षय प्रताप सिंह ने आरोपों को ‘बेबुनियाद और एडिटेड’ बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी हथियार वैध हैं और दशकों से परिवार के नियंत्रण में हैं। उन्होंने कहा, “राजा भैया का कोई नौकर भी बिना लाइसेंस हथियार नहीं रखता। दशहरे पर हम इनकी पूजा करते हैं—सभी लीगल शस्त्र हैं।”
राजा भैया और भानवी सिंह के बीच यह विवाद कई वर्षों से चल रहा है और अब सोशल मीडिया और अदालती हलकों तक पहुंच चुका है। दोनों के दो बेटे—शिवराज प्रताप सिंह और बृजराज प्रताप सिंह—भी इस विवाद में उलझे हुए हैं। वहीं, बेटी राघवी कुमारी ने मां के समर्थन में बयान दिया, जिसमें पिता पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
यह पूजा न केवल दशहरे की परंपरा को दर्शाती है, बल्कि इस परिवार में चल रहे लंबे विवाद और सोशल मीडिया पर बढ़ती बहस की भी झलक देती है।
शस्त्र पूजन का वीडियो वायरल
फिलहाल, इस मामले को लेकर प्रशासन की ओर से किसी तरह की आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है