हरिद्वार (उत्तराखंड)। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को कहा कि भारत आज सांस्कृतिक रूप से खुद को फिर से गढ़ रहा है और इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व को जाता है। उन्होंने कहा कि देश अब गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों और विरासत पर गर्व कर रहा है।
सीएम धामी हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा शांतिकुंज में आयोजित ध्वज वंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम परम वंदनीय माता भगवती देवी शर्मा जी के शताब्दी समारोह 2026 और अखंड दीप शताब्दी वर्ष (1926-2026) के अवसर पर आयोजित किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा, “आज भारत अपने सांस्कृतिक पुनरुत्थान के अमृत काल में है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश अपनी जड़ों से दोबारा जुड़ रहा है और एक बार फिर विश्व गुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।” उन्होंने कहा कि सनातन मूल्यों और भारतीय संस्कृति को लेकर देश में नया आत्मविश्वास देखने को मिल रहा है।
कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में सीएम धामी ने आयोजन के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि यह पूजनीय माता जी की जन्म शताब्दी के साथ-साथ गुरुदेव की तपस्या और साधना के 100 वर्ष पूर्ण होने का भी अवसर है।
“देश-विदेश से 40 हजार से अधिक श्रद्धालु और गायत्री परिवार के सदस्य यहां पहुंच रहे हैं। देवभूमि में सभी का स्वागत है। इस भव्य आयोजन में दिया गया ज्ञान निश्चित रूप से सनातन धर्म और भारत के लिए लाभकारी सिद्ध होगा,” उन्होंने कहा।
समारोह में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र शेखावत, उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और चिन्मय पंड्या भी मौजूद रहे।
इससे पहले, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लखनऊ में पर्वतीय महापरिषद द्वारा आयोजित उत्तरायणी कौथिग में भी भाग लिया था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने उत्तरायणी, मकर संक्रांति और घुघुतिया पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि उत्तरायणी केवल एक लोक पर्व नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और गहरी परंपराओं का सशक्त प्रतीक है।
सीएम धामी ने कहा कि लखनऊ में आयोजित यह कौथिग उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की साझा सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का सशक्त मंच है। लोकगीत, नृत्य, पारंपरिक परिधान, हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों का प्रदर्शन न केवल परंपराओं को जीवित रखता है, बल्कि स्थानीय कारीगरों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देता है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “वोकल फॉर लोकल” विजन को जमीन पर उतारने का सशक्त उदाहरण बताया।



