बिजनेस के साथ संस्कृति का संगम: मोहाली में संपन्न हुआ ‘प्रोग्रेसिव पंजाब इन्वेस्टर्स समिट 2026’

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अक्सर जब हम किसी ‘इन्वेस्टर्स समिट’ के बारे में सुनते हैं, तो हमारे दिमाग में सिर्फ बड़ी-बड़ी फाइलों, गंभीर मीटिंग्स और अरबों रुपये के समझौतों की तस्वीर आती है। लेकिन पंजाब ने इस बार कुछ अलग कर दिखाया। मोहाली की प्लक्षा यूनिवर्सिटी में 13 से 15 मार्च तक चले तीन दिवसीय ‘प्रोग्रेसिव पंजाब इन्वेस्टर्स समिट 2026’ ने साबित कर दिया कि प्रगति केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि रिश्तों और संस्कृति में भी होती है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान की मौजूदगी में रविवार को इस भव्य कार्यक्रम का समापन हुआ, जहाँ बिजनेस चर्चाओं के बीच पंजाब की मिट्टी की महक और उसकी मेहमाननवाजी ने दुनिया भर से आए निवेशकों का दिल जीत लिया।

निवेशकों का भरोसा और मुख्यमंत्री की प्रतिबद्धता

समिट के आखिरी दिन मुख्यमंत्री भगवंत मान काफी उत्साहित नजर आए। उन्होंने न केवल कार्यक्रम में हिस्सा लिया, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक भावुक पोस्ट के जरिए सभी निवेशकों का आभार भी जताया। उन्होंने कहा कि देश-विदेश से आए उद्योगपतियों ने पंजाब पर जो भरोसा दिखाया है, वह राज्य में औद्योगिक क्रांति और रोजगार के नए अवसरों की शुरुआत करेगा।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर खास जोर दिया कि आज के समय में जब पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई तकनीक की बात कर रही है, तो पंजाब भी पीछे नहीं है। उन्होंने मोहाली को भविष्य के एक बड़े “टेक हब” के तौर पर पेश किया। सरकार का लक्ष्य साफ है—पंजाब के नौजवानों को यहीं पर आधुनिक रोजगार देना और राज्य की आर्थिक स्थिति को नई ऊंचाइयों पर ले जाना।

मोहाली: भविष्य का नया ‘टेक हब’

मोहाली अब सिर्फ चंडीगढ़ का पड़ोसी शहर नहीं रह गया है, बल्कि यह तेजी से उत्तर भारत की आईटी और टेक राजधानी बनता जा रहा है। समिट के दौरान यह बात साफ तौर पर उभर कर आई कि पंजाब सरकार मोहाली को एक बड़े टेक्नोलॉजी सेंटर के रूप में विकसित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, प्लक्षा यूनिवर्सिटी जैसे आधुनिक शैक्षणिक संस्थान और सरकार की फ्रेंडली नीतियां मिलकर इस शहर को निवेशकों की पहली पसंद बना रही हैं।

जब व्यापार के मंच पर गूँजा पंजाब का संगीत

इस समिट की सबसे खास बात इसकी सांस्कृतिक शाम रही, जिसने काम के माहौल को उत्सव में बदल दिया। मोहाली गोल्फ रेंज में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में मशहूर पंजाबी गायक रंजीत बावा और हरजीत हरमन ने अपनी गायकी से समां बांध दिया।

रंजीत बावा ने जब अपने मशहूर गाने “हेवीवेट भांगड़ा,” “शेर,” और “मुकाबला” गाना शुरू किया, तो विदेशी प्रतिनिधि भी खुद को थिरकने से नहीं रोक पाए। वहीं हरजीत हरमन ने पंजाब की रूहानी और आध्यात्मिक जड़ों से मेहमानों को रूबरू कराया। उन्होंने “मित्रां दा ना चलदा” और “पंजाब गुरुआं दी कृपा नाल वसदा” जैसे गानों के जरिए पंजाब की गौरवशाली विरासत की झलक पेश की।

लुड्डी और भांगड़ा: पंजाब की जीवंत परंपराएं

सिर्फ संगीत ही नहीं, बल्कि ‘जुगनी कल्चरल ग्रुप’ द्वारा पेश किए गए पारंपरिक लोक नृत्यों—लुड्डी और भांगड़ा—ने भी खूब तालियां बटोरीं। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों के जोश और ऊर्जा को देखकर हर कोई हैरान था। पंजाब सरकार का मकसद सिर्फ निवेश लाना नहीं था, बल्कि दुनिया को यह दिखाना भी था कि पंजाब के लोग जितने मेहनती हैं, उतने ही जिंदादिल और अपनी जड़ों से जुड़े हुए भी हैं।

मेहमाननवाजी और जायके ने जीता दिल

पंजाब अपनी मेहमाननवाजी के लिए दुनिया भर में मशहूर है और इस समिट में भी यही देखने को मिला। पंजाब के उद्योग और वाणिज्य मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा कि सरकार चाहती थी कि हर निवेशक यहां से केवल बिजनेस डील लेकर न जाए, बल्कि पंजाब की गर्मजोशी और प्यार की एक अमिट छाप भी अपने साथ ले जाए।

समिट में शामिल हुए प्रतिनिधियों ने न केवल व्यवस्थाओं की तारीफ की, बल्कि असली पंजाबी व्यंजनों का लुत्फ भी उठाया। मक्के की रोटी, सरसों का साग और पंजाब के अन्य पारंपरिक स्वादों ने विदेशी मेहमानों को पंजाब का दीवाना बना दिया।

कृषि और उद्योग का अनूठा तालमेल

समिट के दौरान कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां भी मौजूद रहे। पंजाब चूंकि एक कृषि प्रधान राज्य है, इसलिए चर्चा केवल फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रही। एग्रो-प्रोसेसिंग और खेती में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी विस्तार से बातचीत हुई। सरकार का मानना है कि जब खेती और उद्योग साथ मिलकर चलेंगे, तभी पंजाब का असली विकास संभव होगा।

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