प्रयागराज से आज एक ऐसी खबर आई है जिसे सुनकर किसी भी पत्थर दिल इंसान की आंखें नम हो जाएं। शहर के नैनी इलाके में सोमवार की सुबह एक मासूम की जिंदगी का चिराग उस वक्त बुझ गया, जब वह बड़े अरमानों के साथ कंधे पर स्कूली बैग टांगे अपने भाई और मामा के साथ स्कूल जा रही थी। हादसा इतना खौफनाक था कि देखने वालों की रूह कांप गई।
नैनी सेंट्रल जेल के ठीक सामने हुए इस हादसे में 10 साल की मासूम फलीशा का सिर धड़ से अलग हो गया। बच्ची का कसूर बस इतना था कि वह पढ़-लिखकर अपनी मां का सहारा बनना चाहती थी, लेकिन सड़क पर दौड़ते मौत के सौदागरों ने उसके सारे सपनों को एक पल में कुचल दिया।
रॉन्ग साइड से आई बाइक और मच गई चीख-पुकार
जानकारी के मुताबिक, फलीशा अपने मामा और छोटे भाई के साथ बाइक पर बैठकर स्कूल जा रही थी। अभी वे नैनी सेंट्रल जेल के पास पहुँचे ही थे कि सामने से गलत दिशा (रॉन्ग साइड) से आ रहे एक बाइक सवार ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही फलीशा सड़क की तरफ गिर पड़ी, जबकि उसका भाई और मामा दूसरी तरफ गिरे।
इसी बीच पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक का पहिया बच्ची के सिर के ऊपर से गुजर गया। हादसा इतना भीषण था कि बच्ची का सिर पूरी तरह सड़क पर चिपक गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। ट्रक चालक मौके का फायदा उठाकर गाड़ी लेकर फरार हो गया।
दो दिन बाद था जन्मदिन, घर में चल रही थी तैयारी
इस हादसे की सबसे दुखद बात यह है कि परसों, यानी 25 फरवरी को फलीशा का 10वां जन्मदिन था। घर में गुब्बारे और केक लाने की बातें हो रही थीं। मामा वलीउल्लाह ने रोते हुए बताया कि फलीशा ही अपनी मां के जीने का इकलौता सहारा थी। तीन साल पहले ही उसके पिता का इंतकाल हो चुका था।
उसकी मां एक प्राइवेट स्कूल में महज 6 हजार रुपये की नौकरी करती हैं और अपनी बेटी के भविष्य के लिए उसमें से 4200 रुपये स्कूल की फीस भरती थीं। जिस मां ने अपनी खुशियां मारकर बेटी को बड़े स्कूल में पढ़ने भेजा, आज उसी मां की गोदी सूनी हो गई।
सड़क पर लगा जाम, पुलिस ने संभाली गंभीर स्थिति
हादसे के बाद प्रयागराज-मिर्जापुर हाईवे पर गुस्साए लोगों और परिजनों ने शव रखकर जाम लगा दिया। करीब एक किलोमीटर लंबा जाम लग गया और गाड़ियों की कतारें लग गईं। मौके पर पहुँची पुलिस ने रोते-बिलखते परिजनों को काफी देर तक समझाया और कार्रवाई का भरोसा देकर जाम खुलवाया। बच्ची का घर महेवा में है और उसका स्कूल हादसे वाली जगह से महज 500 मीटर की दूरी पर था। अगर वह 2 मिनट पहले पहुँच गई होती या वो बाइक सवार गलत दिशा से न आ रहा होता, तो शायद आज फलीशा अपने क्लास में बैठी होती।