सोमनाथ (गुजरात) | नई दिल्ली ब्यूरो।
गुजरात के ऐतिहासिक सोमनाथ तीर्थ में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अत्यंत भावुक, प्रेरक और ऐतिहासिक संबोधन दिया। इस अवसर पर उन्होंने सोमनाथ मंदिर के हजार वर्षों के संघर्ष, बलिदान, पुनर्निर्माण और भारत की सनातन आस्था की अमर शक्ति का विस्तार से उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत के स्वाभिमान, अस्तित्व और आत्मा का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत “जय सोमनाथ” के उद्घोष से की और कहा कि यह वातावरण, यह उत्सव और यह अवसर अपने आप में अद्भुत है। एक ओर देवाधिदेव महादेव की उपस्थिति, दूसरी ओर समुद्र की विशाल लहरें, सूर्य की किरणें, मंत्रोच्चार और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था—इन सबने इस पर्व को दिव्य और भव्य बना दिया है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में इस आयोजन से जुड़ना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
72 घंटे का मंत्रोच्चार, ड्रोन शो और शौर्य यात्रा
प्रधानमंत्री मोदी ने आयोजन की भव्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि 72 घंटे तक अनवरत ओंकार नाद और मंत्रोच्चार, एक हजार ड्रोन के माध्यम से सोमनाथ के हजार वर्षों के इतिहास का प्रदर्शन और 108 अश्वों के साथ निकली शौर्य यात्रा—यह सब दृश्य शब्दों में व्यक्त नहीं किए जा सकते। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में गर्व, गौरव, अध्यात्म, आत्मीयता और महादेव का आशीर्वाद समाहित है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के सुअवसर पर सोमनाथ मंदिर परिसर में भव्यता और दिव्यता से भरा ड्रोन शो देखने का सौभाग्य मिला। इस अद्भुत शो में हमारी प्राचीन आस्था के साथ आधुनिक टेक्नोलॉजी का तालमेल हर किसी को मंत्रमुग्ध कर गया। सोमनाथ की पावन धरा से निकला यह प्रकाशपुंज पूरे विश्व को भारत की… pic.twitter.com/hwKgJsp33T
— Narendra Modi (@narendramodi) January 10, 2026
“हजार साल पहले भी सोमनाथ नहीं टूटा, आज भी नहीं टूटेगा”
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इतिहास की ओर लौटते हुए कहा कि ठीक एक हजार वर्ष पहले, सन 1026 में जब सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण हुआ, तब आक्रांताओं को लगा कि उन्होंने भारत की आस्था को जीत लिया है। लेकिन हजार साल बाद भी सोमनाथ मंदिर पर लहराती धर्मध्वजा यह उद्घोष कर रही है कि भारत की आस्था और संस्कृति अजेय है।
उन्होंने कहा कि प्रभास पाटन की मिट्टी का कण-कण शौर्य, पराक्रम और बलिदान का साक्षी है। कितने ही वीरों और शिवभक्तों ने सोमनाथ की रक्षा और पुनर्निर्माण के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। प्रधानमंत्री ने ऐसे सभी वीर-वीरांगनाओं को नमन किया।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व, 1,000 साल पहले हुए विध्वंस के स्मरण के लिए ही नहीं है।
ये पर्व हजार साल की यात्रा का पर्व है। साथ ही, ये हमारे भारत के अस्तित्व और अभिमान का पर्व भी है।
– पीएम श्री @narendramodi
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— BJP (@BJP4India) January 11, 2026
सोमनाथ और भारत का संघर्ष एक जैसा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल विध्वंस की स्मृति का पर्व नहीं है, बल्कि यह हजार वर्षों की निरंतर यात्रा और भारत के अस्तित्व के संघर्ष का प्रतीक है। जैसे सोमनाथ को बार-बार तोड़ने का प्रयास हुआ, वैसे ही भारत को भी सदियों तक मिटाने की कोशिशें की गईं। लेकिन न सोमनाथ नष्ट हुआ, न भारत—क्योंकि भारत और उसकी आस्था एक-दूसरे में समाई हुई हैं।
उन्होंने इतिहास के विभिन्न कालखंडों का उल्लेख करते हुए बताया कि गजनी से लेकर अलाउद्दीन खिलजी, मुजफ्फर खान, महमूद बेगड़ा और औरंगजेब तक, कितनी ही बार सोमनाथ पर आक्रमण हुए। लेकिन हर बार मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ। अहिल्याबाई होल्कर से लेकर राजा कुमारपाल तक, अनेक शासकों और भक्तों ने सोमनाथ को फिर से साकार किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह इतिहास पराजय का नहीं, बल्कि विजय, धैर्य और पुनर्निर्माण का इतिहास है।
Somnath stands as a beacon of eternal divinity. Its sacred presence continues to guide people across generations. Here are highlights from yesterday’s programmes, including the Omkar Mantra chanting and drone show.#SomnathSwabhimanParv pic.twitter.com/lCZxiaauMp
— Narendra Modi (@narendramodi) January 11, 2026
“हमें अपने पूर्वजों के पराक्रम को याद रखना चाहिए”
प्रधानमंत्री ने सवालिया अंदाज में कहा कि क्या हमें अपने पूर्वजों के पराक्रम को याद नहीं करना चाहिए? क्या कोई संतान अपने पूर्वजों के बलिदान को भूल सकती है? उन्होंने कहा कि सोमनाथ का इतिहास हमें यह सिखाता है कि सनातन आस्था को तलवार के बल पर नहीं मिटाया जा सकता।
गुलामी की मानसिकता और इतिहास के साथ अन्याय
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य से आज़ादी के बाद भी गुलामी की मानसिकता से ग्रसित लोगों ने भारत की गौरवशाली विरासत से दूरी बनाने की कोशिश की। सोमनाथ जैसे तीर्थों के इतिहास को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया और आक्रमणों को केवल ‘लूट’ बताकर असली क्रूरता को छिपाया गया। उन्होंने कहा कि अगर आक्रमण केवल लूट के लिए होते, तो बार-बार मंदिर को तोड़ा नहीं जाता।
सरदार पटेल और पुनर्निर्माण का संकल्प
प्रधानमंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल का उल्लेख करते हुए कहा कि आज़ादी के बाद उन्होंने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया, जिसका भी विरोध हुआ। 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के सोमनाथ आने पर भी आपत्ति की गई। लेकिन उस समय सौराष्ट्र के जाम साहब महाराजा दिग्विजय सिंह जैसे राष्ट्रभक्त आगे आए और राष्ट्रीय गौरव को सर्वोपरि रखा।
विरासत से विकास की ओर भारत
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज का भारत विरासत से विकास की प्रेरणा लेकर आगे बढ़ रहा है। सोमनाथ में सांस्कृतिक विस्तार, संस्कृत विश्वविद्यालय, माधवपुर मेला, गिर लायन संरक्षण, केशोद एयरपोर्ट का विस्तार और अहमदाबाद-वेरावल वंदे भारत ट्रेन—ये सभी प्रयास आस्था के साथ विकास को जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि आज का भारत आस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।
हजार साल का स्वप्न और विकसित भारत
प्रधानमंत्री ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर दिए गए अपने “हजार साल के विराट स्वप्न” को याद करते हुए कहा कि आज भारत सांस्कृतिक पुनर्जागरण के दौर से गुजर रहा है। 140 करोड़ भारतीय विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत गरीबी के खिलाफ लड़ाई जीतेगा, दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होगा और नई ऊंचाइयों को छुएगा।
मानवता को सोमनाथ का संदेश
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की सभ्यता कभी विनाश की नहीं, बल्कि संतुलन, सृजन और मानवता की रही है। सोमनाथ हमें सिखाता है कि सृजन का मार्ग लंबा होता है, लेकिन वही स्थायी होता है। भारत ने दुनिया को यह सिखाया है कि दिलों को जीतकर कैसे जिया जाता है।
प्रधानमंत्री ने आह्वान किया कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व से प्रेरणा लेकर देश को एकजुट होकर विकसित भारत के मार्ग पर आगे बढ़ाना है, अपनी विरासत से जुड़े रहना है और आधुनिकता के साथ अपनी चेतना को सहेजना है। अंत में उन्होंने “हर हर महादेव” और “जय सोमनाथ” के उद्घोष के साथ देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।
डिस्क्लेमर: प्रधानमंत्री के भाषण का कुछ अंश गुजराती भाषा में था, जिसका यहाँ भावानुवाद प्रस्तुत किया गया है।







