IEW 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इंडिया एनर्जी वीक (IEW) 2026 के चौथे संस्करण का वर्चुअली उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ (EU) के बीच लगभग पूरा हो चुके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की जमकर सराहना करते हुए इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार दिया। पीएम मोदी ने इसे दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तालमेल और साझा मूल्यों का बेहतरीन उदाहरण बताया।
उद्घाटन के बाद सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इंडिया एनर्जी वीक (IEW) बहुत कम समय में वैश्विक संवाद और कार्रवाई का प्रमुख मंच बनकर उभरा है। उन्होंने कहा, “आप सभी ऊर्जा और सस्टेनेबिलिटी पर चर्चा के लिए भारत आए हैं, मैं आपका स्वागत करता हूं। आज भारत एनर्जी सेक्टर के लिए अपार अवसरों की भूमि बन चुका है।”
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिससे ऊर्जा उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भारत न केवल अपनी जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि वैश्विक मांग के लिए भी बड़े अवसर प्रदान कर रहा है। पीएम मोदी ने बताया कि भारत आज पेट्रोलियम उत्पादों के टॉप-5 वैश्विक उत्पादकों में शामिल है और 150 से अधिक देशों को निर्यात करता है।
भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर पूरी हुई बातचीत
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक बड़े विकास का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत पूरी हो चुकी है और इसकी औपचारिक घोषणा जल्द की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारत के 140 करोड़ लोगों और यूरोप के करोड़ों नागरिकों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
पीएम मोदी के अनुसार, यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग का प्रतीक है, जो दुनिया की कुल GDP का लगभग 25 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार का करीब एक-तिहाई हिस्सा दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह समझौता सिर्फ व्यापार नहीं बढ़ाएगा, बल्कि लोकतंत्र, कानून के शासन और पारदर्शिता के प्रति साझा प्रतिबद्धता को भी मजबूत करेगा। साथ ही यह ब्रिटेन और EFTA देशों के साथ हुए समझौतों को भी पूरा करेगा, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी।
प्रधानमंत्री @narendramodi ने भारत ऊर्जा सप्ताह 2026 के उद्घाटन समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया
प्रधानमंत्री ने कहा, हमारा ऊर्जा क्षेत्र हमारी आकांक्षाओं के केंद्र में है, इसमें 500 अरब डॉलर के निवेश के अवसर मौजूद हैं, इसीलिए ‘मेक इन इंडिया’, ‘इनोवेट इन…
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) January 27, 2026
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को मिलेगा बड़ा फायदा
पीएम मोदी ने कहा कि यह ट्रेड डील मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर दोनों को बड़ा बढ़ावा देगी और भारत में निवेशकों का भरोसा और मजबूत करेगी। उन्होंने टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण, चमड़ा और फुटवियर जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोगों को भी बधाई दी।
ऑयल और गैस सेक्टर में 100 बिलियन डॉलर निवेश का लक्ष्य
एनर्जी सेक्टर पर विस्तार से बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत इस दशक के अंत तक ऑयल और गैस सेक्टर में 100 बिलियन डॉलर तक निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। उन्होंने बताया कि एक्सप्लोरेशन सेक्टर को बड़े पैमाने पर खोला गया है और डीप-सी एक्सप्लोरेशन मिशन पर तेजी से काम हो रहा है। अंडमान और निकोबार बेसिन को भारत का अगला हाइड्रोकार्बन हब बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की एक और बड़ी ताकत उसकी रिफाइनिंग क्षमता है। भारत वर्तमान में रिफाइनिंग क्षमता के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर है और जल्द ही पहले स्थान पर पहुंचने की ओर अग्रसर है। मौजूदा क्षमता लगभग 260 मिलियन टन है, जिसे बढ़ाकर 300 मिलियन टन से अधिक करने का लक्ष्य है।
उन्होंने बताया कि एलएनजी ट्रांसपोर्टेशन, पाइपलाइन नेटवर्क, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन और पेट्रोकेमिकल्स जैसे क्षेत्रों में भी बड़े निवेश के अवसर मौजूद हैं। हाल ही में भारत में 70,000 करोड़ रुपये का शिपबिल्डिंग प्रोग्राम शुरू किया गया है, जिससे ऊर्जा परिवहन को मजबूती मिलेगी।
एनर्जी इंडिपेंडेंस की ओर भारत
अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने कहा कि भारत अब केवल एनर्जी सिक्योरिटी तक सीमित नहीं है, बल्कि एनर्जी इंडिपेंडेंस के मिशन पर तेजी से काम कर रहा है। उन्होंने वैश्विक निवेशकों से अपील करते हुए कहा “मेक इन इंडिया, इनोवेट इन इंडिया, स्केल विद इंडिया और इन्वेस्ट इन इंडिया।”
उद्घाटन समारोह में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, यूएई, कनाडा समेत कई देशों के ऊर्जा मंत्री और वैश्विक प्रतिनिधि मौजूद रहे। तीन दिवसीय इस आयोजन में 120 से अधिक देशों से 75,000 से ज्यादा एनर्जी प्रोफेशनल्स के शामिल होने की उम्मीद है, जो ग्लोबल एनर्जी डिप्लोमेसी में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

