PM Modi ने बुधवार को भूटान की राजधानी थिम्पू में भूटान के चौथे नरेश जिग्मे सिंग्ये वांगचुक से भेंट की और वैश्विक शांति प्रार्थना महोत्सव में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने नरेश की 70वीं जयंती के उपलक्ष्य में शुभकामनाएं दी और भारत सरकार तथा जनता की ओर से उनके अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण की कामना की। प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच गहरे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि यह संबंध दोनों देशों के लोगों को करीब लाता है।
पीएम मोदी ने नरेश के नेतृत्व, मार्गदर्शन और परामर्श के लिए उनकी सराहना की और भारत-भूटान मैत्री को और सुदृढ़ बनाने में उनके योगदान को विशेष महत्व दिया। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों, साझा हितों और सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा की। इस बैठक में ऊर्जा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, कनेक्टिविटी और रक्षा सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “महामहिम चतुर्थ नरेश के साथ एक अच्छी बैठक हुई। भारत-भूटान संबंधों को और मजबूत करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में उनके व्यापक प्रयासों की सराहना की। ऊर्जा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और कनेक्टिविटी में सहयोग पर चर्चा हुई। गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी परियोजना की प्रगति की सराहना की, जो हमारी एक्ट ईस्ट नीति के अनुरूप है।”
इससे पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी ने भूटान के चौथे नरेश की 70वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में भी भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने भारत और भूटान के बीच स्थायी मित्रता और गहरे आध्यात्मिक संबंधों की पुष्टि की। पीएम मोदी ने समारोह में नरेश के नेतृत्व और योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन ने भूटान को स्थिरता और विकास के रास्ते पर अग्रसर किया।
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PM Modi ने जिग्मे सिंग्ये वांगचुक के योगदान की सराहना की, भूटान के चौथे नरेश ने आधुनिकरण और स्थिर विकास में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
जिग्मे सिंग्ये वांगचुक का जन्म 11 नवंबर 1955 को हुआ। उन्होंने 1972 से 2006 तक भूटान के चौथे नरेश के रूप में शासन किया। उनके नेतृत्व को भूटान में दूरदर्शिता, प्रगति और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। उनके शासनकाल में भूटान ने आधुनिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए और एक अद्वितीय “सुख-आधारित” दर्शन अपनाया, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली। उन्हें भूटान के सबसे प्रिय और प्रभावशाली राजाओं में से एक माना जाता है।
उनके नेतृत्व में भूटान ने शिक्षा, स्वास्थ्य, जलविद्युत और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की। उन्होंने पारंपरिक मूल्य और आधुनिक प्रबंधन के बीच संतुलन स्थापित किया, जिससे भूटान का विकास स्थिर और सतत हुआ। पीएम मोदी ने जिग्मे सिंग्ये वांगचुक के योगदान को विशेष रूप से सराहा और कहा कि उनके मार्गदर्शन से भारत और भूटान के संबंध और अधिक गहरे हुए हैं।
भारत-भूटान सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
प्रधानमंत्री मोदी और भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने ऊर्जा, क्षमता निर्माण, कनेक्टिविटी, प्रौद्योगिकी, रक्षा और सुरक्षा सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग पर व्यापक चर्चा की। दोनों नेताओं ने साझा हितों को आगे बढ़ाने और दोतरफा सहयोग को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया।
इस प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक के बाद, दोनों देशों ने संयुक्त रूप से 1020 मेगावाट की पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना का उद्घाटन किया। यह परियोजना भारत और भूटान के बीच ऊर्जा सहयोग का प्रतीक है और दोनों देशों के बढ़ते संबंधों को उजागर करती है। इस जलविद्युत परियोजना से न केवल दोनों देशों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जाएगा, बल्कि क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सहयोग
पीएम मोदी ने बैठक के दौरान दोनों देशों के साझा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत और भूटान के लोग सदियों से आपसी सहयोग और समझ के साथ जुड़े रहे हैं। शिक्षा, धर्म, कला और संस्कृति के क्षेत्र में यह सहयोग दोनों देशों के सामाजिक और सांस्कृतिक बंधन को मजबूत करता है। पीएम मोदी ने भूटान की आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की सराहना की और कहा कि यह भारत-भूटान संबंधों की स्थायित्व और मजबूती में सहायक है।
भविष्य के लिए रणनीतिक दृष्टि
भूटान के साथ भारत का सहयोग केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। पीएम मोदी और नरेश ने साझा लक्ष्यों और भविष्य की परियोजनाओं पर चर्चा की। उन्होंने दोनों देशों के युवाओं, व्यवसायिक समुदाय और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। इसके साथ ही, उन्होंने दोनों देशों के बीच नई जलविद्युत परियोजनाओं और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के माध्यम से सतत विकास के मार्ग पर काम करने पर सहमति जताई।
Had a wonderful meeting with His Majesty the Fourth Druk Gyalpo. Appreciated his extensive efforts over the years towards further cementing India-Bhutan ties. Discussed cooperation in energy, trade, technology and connectivity. Lauded the progress in the Gelephu Mindfulness City… pic.twitter.com/It8O8TTYbi
— Narendra Modi (@narendramodi) November 12, 2025
