Pariksha Pe Charcha 2026: पीएम मोदी ने रविवार को Pariksha Pe Charcha के नौवें संस्करण के दूसरे एपिसोड में देशभर के विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया। इस दौरान बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को न केवल परीक्षा के तनाव से निपटने के व्यावहारिक तरीके बताए गए, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन, तकनीक, करियर विकल्पों और जीवन के व्यापक उद्देश्यों पर भी खुलकर चर्चा हुई।
यह संवाद केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छात्र जीवन से जुड़े हर उस पहलू को छूता दिखा, जिससे युवा आज जूझ रहे हैं, चाहे वह अपेक्षाओं का दबाव हो, भविष्य की चिंता हो या बदलती तकनीक के साथ खुद को ढालने की चुनौती।
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पढ़ाई को बोझ नहीं, उत्सव की तरह लें
पीएम मोदी ने छात्रों से संवाद करते हुए कहा कि परीक्षा जीवन का अंत नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया का एक हिस्सा है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि पढ़ाई को बोझ की तरह नहीं, बल्कि उत्सव की तरह लें। यदि पढ़ाई को समझकर और आनंद के साथ किया जाए, तो तनाव अपने आप कम हो जाता है।
उन्होंने कहा कि असफलता से डरने के बजाय उससे सीखना चाहिए। असफलताएं जीवन को मजबूत बनाती हैं और आगे बढ़ने की दिशा दिखाती हैं।
तनाव प्रबंधन और संतुलित जीवनशैली पर जोर
पीएम मोदी ने परीक्षा तनाव से निपटने के लिए संतुलित जीवनशैली को बेहद जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि पढ़ाई, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए। खेल और शारीरिक गतिविधियां न केवल शरीर को स्वस्थ रखती हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और एकाग्रता को भी बेहतर बनाती हैं। उन्होंने छात्रों को नींद पूरी लेने, नियमित दिनचर्या अपनाने और खुद पर अनावश्यक दबाव न डालने की सलाह दी।
AI और टेक्नोलॉजी से डरें नहीं, समझदारी से अपनाएं
डिजिटल टूल्स, मोबाइल फोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीक से डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनौती तकनीक नहीं, बल्कि उसका गलत इस्तेमाल है।
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पीएम मोदी ने कहा, “हमें टेक्नोलॉजी का गुलाम नहीं बनना है, बल्कि उसे अपना सहयोगी बनाना है।” आत्मविश्वास के साथ नई तकनीकों को समझना और सही दिशा में उपयोग करना ही भविष्य की सफलता की कुंजी है।
स्टार्टअप और करियर को लेकर बड़ा संदेश
स्टार्टअप से जुड़े सवाल पर प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को अपनी रुचियों और क्षमताओं को पहचानने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप शुरू करने के लिए किसी खास उम्र की जरूरत नहीं होती। छोटे स्तर से भी शुरुआत की जा सकती है।
उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि करियर का चुनाव समाज के दबाव में नहीं, बल्कि अपने भीतर की रुचि और क्षमता के आधार पर करें।
हल्के पल और सांस्कृतिक विविधता की झलक
Pariksha Pe Charcha के दूसरे एपिसोड में कुछ आत्मीय और हल्के पल भी देखने को मिले। छत्तीसगढ़ से आए छात्रों ने पीएम मोदी के लिए अपने राज्य के पारंपरिक स्नैक्स लाए, जिन्हें प्रधानमंत्री ने न केवल चखा बल्कि छात्रों के साथ साझा भी किया। यह दृश्य कार्यक्रम को और मानवीय और भावनात्मक बनाता दिखा।
इसके अलावा, असम के एक छात्र द्वारा डॉ. भूपेन हजारिका का गीत गाए जाने पर पीएम मोदी ने प्रसन्नता व्यक्त की, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है।
यात्रा, अनुभव और जीवन की सीख
एक छात्र द्वारा परीक्षा के बाद छुट्टियों में घूमने की जगहों के बारे में पूछे गए सवाल पर पीएम मोदी ने अनोखी सलाह दी। उन्होंने कहा कि छात्रों को पहले अपने जिले और आसपास की उन जगहों की सूची बनानी चाहिए, जहां वे अभी तक नहीं गए हैं।
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उन्होंने कहा कि ट्रेन से यात्रा करना, साधारण भोजन के साथ सफर करना, लोगों के व्यवहार को देखना—ये सभी अनुभव जीवन के महत्वपूर्ण सबक सिखाते हैं। भारत विविधताओं का देश है और इसे समझने के लिए यात्रा एक सशक्त माध्यम है।
विकसित भारत 2047 में युवाओं की भूमिका
पीएम मोदी ने विकसित भारत 2047 के विजन पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि भारत को विकसित देश बनाने के लिए केवल नीतियां नहीं, बल्कि नागरिकों की आदतों का विकसित होना जरूरी है।
#Watch | मुझे खुशी है कि स्कूल के छात्र #ViksitBharat के बारे में सोच रहे हैं। 2047 तक विकसित भारत बनने के लिए, अगर हमें विकसित देश बनना है, तो हमें सिर्फ बात नहीं करनी है, बल्कि विकसित देशों की आदतें अपनानी होंगी।
उदाहरण के लिए, स्वच्छता बनाए रखना और नियमों का पालन करना। अगर… pic.twitter.com/RQ8dAKHgOd
— DD News UP (@DDNewsUP) February 9, 2026
सिंगापुर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि स्वच्छता, नियमों का पालन और जिम्मेदार व्यवहार—ये सभी छोटे कदम देश को आगे ले जाते हैं। युवाओं को अपने आचरण से बदलाव की शुरुआत करनी होगी।
शिक्षकों और माता-पिता के लिए संदेश
पीएम मोदी ने अपने स्कूल के दिनों को याद करते हुए बताया कि उनके जीवन को आकार देने में शिक्षकों की अहम भूमिका रही। उन्होंने कहा कि उनके शिक्षक छात्रों को लाइब्रेरी जाने, अधिक पढ़ने और खेलों में भाग लेने के लिए प्रेरित करते थे।
माता-पिता को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों की तुलना दूसरों से न करें। न अत्यधिक दबाव डालें और न ही जरूरत से ज्यादा प्रशंसा या आलोचना करें। सहयोग और समझ से ही बच्चे आगे बढ़ते हैं।