पटना। बिहार की राजनीति ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक पल का साक्षी बना जब जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और एनडीए के मुखिया नीतीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। पटना के गांधी मैदान में आयोजित इस भव्य समारोह ने राज्य की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत की, जहां राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे, जिससे समारोह का महत्व और बढ़ गया।
शपथ समारोह में एक बार फिर पीएम मोदी का बिहारी अंदाज़ और देसी स्टाइल देखने को मिला। जैसे ही शपथ ग्रहण कार्यक्रम समाप्त हुआ, पीएम मोदी ने मंच से उतरते ही हाथ में गमछा लहराया और समारोह में उपस्थित भीड़ की ओर हाथ जोड़कर कई बार झुककर अभिनंदन स्वीकार किया। उनके इस अंदाज से पूरा गांधी मैदान तालियों और नारों से गूंज उठा। बिहार के लोगों ने भी पीएम मोदी के इस खास धन्यवाद और आदर भाव को बड़े उत्साह से स्वीकार किया।
गौरतलब है कि चुनाव प्रचार के दौरान भी प्रधानमंत्री मोदी कई बार बिहारी गमछा लहराते दिखे थे। महिलाओं से संवाद के दौरान उन्होंने कहा था कि “दो भाई—नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार—आपकी सेवा, सुरक्षा और समृद्धि के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं।” जनता ने इस “मोदी–नीतीश भाईचारा” वाली अपील को हाथोंहाथ लिया और 2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को प्रचंड बहुमत दिया।
शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी और नीतीश कुमार कई बार मुस्कुराते हुए बातचीत करते भी नजर आए। इस ऐतिहासिक जीत ने दोनों नेताओं की राजनीतिक साझेदारी को और मजबूत कर दिया है। समारोह में उपस्थित हजारों लोगों के बीच एनडीए की जीत का उत्साह साफ देखा जा सकता था।
शपथ ग्रहण के दौरान सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जबकि कैबिनेट के लिए कुल 26 मंत्रियों ने शपथ ग्रहण किया। इस बार मंत्रिमंडल में तीन महिलाओं को भी जगह दी गई, जो महिला प्रतिनिधित्व को मजबूती देने का संकेत है। साथ ही कई नए चेहरों के शामिल होने से मंत्रिमंडल युवा, अनुभवी और विविधता से परिपूर्ण नजर आ रहा है।
बिहार की जनता ने इस चुनाव में एक बार फिर साबित कर दिया कि “मोदी–नीतीश की जोड़ी” पर उनका भरोसा कायम है। विकास, सुशासन, कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर एनडीए की रणनीति को भारी समर्थन मिला। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कुमार की स्थिर प्रशासनिक छवि और प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता ने मिलकर इस बार भी एनडीए को रिकॉर्ड सीटें दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
गांधी मैदान में उपस्थित भीड़ को देखकर यह साफ झलक रहा था कि बिहार के मतदाताओं ने किसी बदलाव की तलाश नहीं की, बल्कि मौजूदा नेतृत्व पर भरोसा बनाए रखते हुए स्थिरता और विकास के पक्ष में एक मजबूत जनादेश दिया है।
शपथ ग्रहण समारोह के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर भी नीतीश कुमार को बधाई देते हुए लिखा कि “बिहार के विकास को तेज गति देने के लिए केंद्र और राज्य मिलकर काम करते रहेंगे।”
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी चल रही है कि नीतीश कुमार का यह कार्यकाल बिहार की राजनीति में निर्णायक साबित हो सकता है, खासकर तब जब बीजेपी और जेडीयू के रिश्ते पहले से कहीं अधिक मजबूत दिखाई दे रहे हैं।
गांधी मैदान का यह ऐतिहासिक दृश्य न सिर्फ राजनीतिक बदलाव का संकेत है, बल्कि यह साबित करता है कि जनता अब विकास की राजनीति पर भरोसा कर रही है। 10वीं बार नीतीश कुमार की ताजपोशी लोकतंत्र में उनके लंबे और स्थिर प्रभाव का एक बड़ा प्रमाण है।







