लखनऊ में आयोजित एक विशेष गोष्ठी के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक Mohan Bhagwat ने समाज को जोड़ने वाले बुनियादी सिद्धांतों पर चर्चा की। उन्होंने बहुत ही सरल शब्दों में समझाया कि जब हम अपनी जाति या भाषा की पहचान को बड़ा मानने लगते हैं, तो समाज कमजोर होने लगता है। उनके अनुसार, “हम सब हिंदू हैं” – यह भाव ही हमारी असली ताकत है।
Mohan Bhagwat ने कहा कि हिंदू धर्म वास्तव में एक सच्चा मानव धर्म है। अगर दुनिया में कोई समाज वास्तव में पंथ निरपेक्ष (Secular) है, तो वह केवल हिंदू समाज है। उन्होंने आह्वान किया कि हमें अपनी पहचान केवल हिंदू के रूप में ही देखनी चाहिए।

सामाजिक समरसता है समाज में एकता का आधार
समरसता का अर्थ स्पष्ट करते हुए Mohan Bhagwat ने कहा कि समाज में भेदभाव खत्म करना ही विकास का पहला कदम है। उन्होंने बताया कि जाति नाम की पुरानी व्यवस्था अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है, और यह बदलाव देश की युवा पीढ़ी के व्यवहार में साफ़ नज़र आता है।
संघ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ किसी से उसकी जाति नहीं पूछी जाती। सभी स्वयंसेवक ‘हिंदू सहोदर’ के भाव से एक-दूसरे के साथ काम करते हैं। Mohan Bhagwat के मुताबिक, जिस दिन समाज में जाति के आधार पर महत्व मिलना बंद हो जाएगा, उस दिन राजनीति भी अपने आप बदल जाएगी।

हिंदू एकता और सामाजिक सद्भाव
हिंदू एकता और सामाजिक सद्भाव पर बात करते हुए Mohan Bhagwat ने बताया कि संघ का उद्देश्य केवल भाषण देना नहीं, बल्कि व्यक्ति निर्माण करना है। उन्होंने साझा किया कि संघ ने देश के 5,000 गांवों को गोद लिया है, जिनमें से 333 गांव पूरी तरह से आत्मनिर्भर और विवाद मुक्त बन चुके हैं।
इन ‘आदर्श गांवों’ में ग्रामीणों ने खुद के दम पर स्कूल बनाए हैं और वहां कोई भी व्यक्ति बेरोजगार नहीं है। उन्होंने कहा कि जब अच्छे लोग (सज्जन शक्ति) किसी सामाजिक बदलाव के काम से जुड़ते हैं, तभी समाज में बड़ा परिवर्तन आता है।

पारिवारिक मूल्यों और परंपराओं का महत्व
आज के दौर में परिवारों के टूटने पर चिंता जताते हुए Mohan Bhagwat ने कहा कि हमें आधुनिकता को अपनाना चाहिए, लेकिन पश्चिमी सभ्यता की अंधी नकल से बचना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि बच्चों को धर्म और संस्कारों की पहली शिक्षा घर के भीतर मिलनी चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि साल में कम से कम एक बार पूरे खानदान और रिश्तेदारों को एक जगह इकट्ठा होना चाहिए। इससे आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों और कुल परंपरा से जुड़ी रहती हैं। Mohan Bhagwat के अनुसार, संयुक्त परिवार संस्कारों के सबसे बड़े केंद्र होते हैं और यहीं से एक बेहतर समाज की नींव पड़ती है।

मंदिर और राष्ट्रीय कल्याण
मंदिरों के सरकारी नियंत्रण के सवाल पर Mohan Bhagwat ने स्पष्ट किया कि मंदिरों का प्रबंधन भक्तों और समाज के सज्जन लोगों के हाथों में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिरों से आने वाला पैसा राष्ट्र निर्माण और हिंदुओं के कल्याण में खर्च होना चाहिए। विश्व हिंदू परिषद इस दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है।
वैश्विक दक्षिण और भारत की अर्थव्यवस्था
भारत की वैश्विक स्थिति पर Mohan Bhagwat ने कहा कि देश जल्द ही ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) का नेतृत्व करेगा। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी ताकत पूंजीपतियों के पास नहीं, बल्कि हमारे घरों की बचत और संस्कारों में है। भारत इतना समर्थ है कि वह किसी भी देश के दबाव में आए बिना अपना रास्ता खुद बना सकता है।
Mohan Bhagwat ने अंत में अपील की कि जो लोग देश के लिए कुछ करना चाहते हैं, वे संघ की शाखा में आएं या किसी न किसी सामाजिक प्रकल्प से जुड़ें।