उत्तर प्रदेश के Meerut जिले के सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में एक दलित महिला की निर्मम हत्या और उसकी बेटी के कथित अपहरण के मामले ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। इस सनसनीखेज वारदात के बाद गांव में जबरदस्त तनाव फैल गया है। शुक्रवार को स्थिति उस समय और बिगड़ गई, जब पुलिस महिला के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए ले जा रही थी और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई परिजनों को बिना सूचना दिए की जा रही है।
गुस्साए ग्रामीणों ने एंबुलेंस और पुलिस वाहनों को रोक लिया और उनमें तोड़फोड़ की। हालात बेकाबू होते देख प्रशासन को गांव में तीन थानों की पुलिस फोर्स तैनात करनी पड़ी। पूरे क्षेत्र में एहतियात के तौर पर लगातार गश्त की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह घटना गुरुवार सुबह की है। अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाली एक महिला अपनी 20 वर्षीय बेटी के साथ खेत पर गन्ने की छिलाई के लिए जा रही थी। रास्ते में गांव का ही रहने वाला पारस नामक युवक उन्हें मिला। आरोप है कि आरोपी ने दोनों के साथ अभद्रता शुरू कर दी।
महिला ने जब इसका विरोध किया तो आरोपी ने गाली-गलौज करते हुए धारदार हथियार से महिला के सिर पर वार कर दिया। गंभीर रूप से घायल महिला मौके पर ही गिर पड़ी। इसके बाद आरोपी युवती को जबरन अपने साथ ले गया, जिससे मामला हत्या के साथ अपहरण में तब्दील हो गया।
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इलाज के दौरान महिला की मौत
गंभीर हालत में घायल महिला को मोदीपुरम स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान शाम करीब साढ़े चार बजे उसकी मौत हो गई। महिला की मौत की खबर फैलते ही गांव में आक्रोश और भय का माहौल बन गया।
परिजनों का आरोप है कि यह हमला सुनियोजित था और आरोपी ने खुलेआम कानून को चुनौती देते हुए वारदात को अंजाम दिया।
पोस्टमॉर्टम को लेकर क्यों भड़का गुस्सा?
घटना के अगले दिन शुक्रवार को उस वक्त हालात और बिगड़ गए, जब पुलिस शव को पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाने लगी। ग्रामीणों और परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें बिना जानकारी दिए शव एंबुलेंस में रखकर ले जाने की कोशिश की।
इसी बात को लेकर गांव में भारी हंगामा हो गया। गुस्साए लोगों ने एंबुलेंस को घेर लिया और उसके साथ-साथ पुलिस की गाड़ियों में भी तोड़फोड़ कर दी, जिससे कई वाहनों के शीशे टूट गए। करीब दो घंटे तक हंगामा चलता रहा।
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जातिगत एंगल और मामले को दबाने का आरोप
ग्रामीणों और पीड़ित परिवार का आरोप है कि हत्या और अपहरण का आरोपी राजपूत समाज से ताल्लुक रखता है और इसी कारण मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि तुरंत सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो गांव में हालात और बिगड़ सकते हैं। करीब दो घंटे तक चले भारी हंगामे के बाद ,अधिकारियों ने लोगों को समझाने की कोशिश की। तब जाकर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा जा सका।
आरोपी के दादा-दादी हिरासत में, अन्य फरार
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी के दादा-दादी को हिरासत में ले लिया है। वहीं आरोपी के माता-पिता और भाई अभी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। पीड़ित परिवार और ग्रामीणों की एक ही मांग है कि सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और अपहृत बेटी को सुरक्षित बरामद किया जाए।
अंतिम संस्कार से इनकार, बुलडोजर एक्शन की मांग, गांव में भारी पुलिस बल तैनात
पीड़ित परिवार ने साफ कह दिया है कि जब तक बेटी की बरामदगी और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक वे महिला का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। इसके साथ ही ग्रामीण आरोपी के घर पर बुलडोजर कार्रवाई की मांग भी कर रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने कपसाड़ गांव में तीन थानों की पुलिस फोर्स तैनात कर दी है। वरिष्ठ अधिकारी मौके पर डटे हुए हैं और लगातार लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।







