Mathura: बांके बिहारी मंदिर में टूटी वर्षों पुरानी परंपरा

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Mathura के वृन्दाबन में विश्वप्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में वर्षों से चली आ रही एक महत्वपूर्ण परंपरा इस सप्ताह अचानक टूट गई। ठाकुर जी का बाल भोग और शयन भोग तैयार न होने से मंदिर के गोस्वमियों में नारजगी है। मंदिर के सेवायतों ने हाईपावर कमेटी के खिलाफ याचिका दायर की है। जिसमे श्रद्धालुओं के लिए मंदिर दर्शन का समय इस वर्ष ढाई घंटे के लिए बढ़ा दिया था। बांके बिहारिजी मन्दिर के सेवायत गोपी गोस्वामी ने कहा समय बदलने का विरोध इस लिये हो रहा है बाँके बिहारी जी मंदिर में दर्शन-पूजन की समय-सारिणी कोई साधारण व्यवस्थात्मक नियम नहीं, बल्कि यह निधिवन परंपरा, रासलीला और वैष्णव भक्ति-मार्ग से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि ठाकुर जी स्वेच्छा से दर्शन देते हैं, समय में बाँधना उनकी स्वतंत्रता पर रोक है,समय परिवर्तन से पुरानी परंपरा टूटी है।

1.  Mathura में ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में भोग विवाद: भक्तों और सेवायतों में चिंता 

मथुरा-वृंदावन के प्रसिद्ध श्री ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में सोमवार को एक अनहोनी स्थिति सामने आई, जिसने भक्तों और मंदिर से जुड़े सेवायतों को चिंतित कर दिया। मंदिर की वर्षों पुरानी परंपरा के विपरीत, इस बार ठाकुर बांके बिहारी जी के लिए बाल भोग और शयन भोग तैयार नहीं हो सका। बताया जा रहा है कि मंदिर में नियुक्त हलवाई को कई महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण उसने भोग तैयार करने से इंकार कर दिया। इसके परिणामस्वरूप, सोमवार को ठाकुर जी बिना भोग के ही भक्तों को दर्शन दिए। यह घटना मंदिर के संचालन के लिए एक नई चुनौती बन गई है।

2. हाई पावर कमेटी द्वारा मंदिर की व्यवस्थाओं में सुधार की कोशिशें 

मामला इस प्रकार है कि श्री ठाकुर बांके बिहारी मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक हाई पावर कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी का मुख्य उद्देश्य मंदिर की भोग और प्रसाद व्यवस्था को व्यवस्थित और नियमित बनाना था। कमेटी के निर्देश पर मंदिर में एक हलवाई की नियुक्ति की गई थी, जिसे प्रत्येक माह लगभग 80 हजार रुपये वेतन देने का प्रावधान था। हालांकि, पिछले कुछ महीनों से हलवाई को वेतन का भुगतान नहीं किया गया, और इससे वह नाराज हो गया। नाराज होकर उसने ठाकुर जी के लिए बाल भोग और शयन भोग तैयार करने से मना कर दिया।

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3. हलवाई की नाराजगी से मंदिर की व्यवस्था पर असर 

मंदिर के सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, हलवाई ने कई बार संबंधित अधिकारियों और प्रबंधन को वेतन के भुगतान के बारे में सूचित किया था, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। अंततः, वेतन न मिलने के कारण हलवाई ने ठाकुर जी के लिए भोग तैयार करने से मना कर दिया। इस कारण सोमवार को ठाकुर जी को बिना भोग के दर्शन दिए गए।

4. मंदिर की परंपरा को बाधित करने वाली घटना: भोग न चढ़ाने की वजह 

मंदिर के गोस्वामी का कहना है कि श्री ठाकुर बांके बिहारी के भोग प्रबंधन की जिम्मेदारी मयंक गुप्ता के पास है। मयंक के माध्यम से ही ठाकुर जी के लिए भोग तैयार किया जाता है, जिसमें सुबह का बाल भोग, दोपहर का राजभोग, शाम का उत्थापन भोग और रात का शयन भोग शामिल है। इन सभी भोगों में हलवाई का महत्वपूर्ण योगदान रहता है, जो वह तैयार करता है और ठाकुर जी को चढ़ाया जाता है। हालांकि, सोमवार को सेवायतों को भोग नहीं मिला, जिससे मंदिर की व्यवस्था में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई।

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5. भोग की कमी पर कमेटी की जांच: हलवाई से पूछताछ की गई 

कमेटी के एक सदस्य ने कहा कि सोमवार को मंदिर परिसर में ठाकुर जी के लिए बाल भोग और शयन भोग नहीं मिलने की जानकारी मिली। इसके बाद मयंक गुप्ता से पूछताछ की गई, तो उसने स्पष्ट रूप से कहा कि वह भोग तैयार नहीं कर सका क्योंकि उसे भुगतान नहीं हुआ था। मयंक को जल्द ही भुगतान का आदेश दिया गया है, ताकि ऐसी स्थिति फिर से उत्पन्न न हो।

6. मंदिर की व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता: प्रशासन का ध्यान आकृष्ट 

यह घटना मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ी समस्या उत्पन्न करती है। खासकर जब बात ठाकुर जी के भोग की हो, जो भक्तों के लिए एक अहम धार्मिक कृत्य है। मंदिर की परंपरा के अनुसार, ठाकुर जी के लिए हर दिन विशेष भोग तैयार किया जाता है, और भक्त इसे बड़े श्रद्धा भाव से स्वीकार करते हैं। लेकिन जब मंदिर के अंदर ऐसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं, तो भक्तों में नाराजगी और असंतोष फैलना स्वाभाविक है।

7. हाई पावर कमेटी के लिए चुनौती: मंदिर की समस्याओं का समाधान 

यह भी देखा जा रहा है कि मंदिर की व्यवस्था में सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई कमेटी के सामने यह एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। हालांकि, अब इस मुद्दे पर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों द्वारा सख्त कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि मंदिर की व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की रुकावट न हो और भक्तों की श्रद्धा में कोई कमी न आए।

8. मंदिर प्रशासन की जिम्मेदारी: भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए कदम उठाने की जरूरत

मंदिर प्रशासन और हलवाई के बीच के विवाद को लेकर यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही समस्या का समाधान निकल सकेगा और ठाकुर जी को भोग की व्यवस्था पुनः सुचारू रूप से शुरू हो जाएगी। इस घटनाक्रम से यह भी स्पष्ट होता है कि जब तक मंदिर की आंतरिक व्यवस्थाएं मजबूत और नियमित नहीं होतीं, तब तक ऐसी समस्याएं उत्पन्न होती रहेंगी। इसलिए, प्रशासन को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द ही समाधान करना होगा ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।

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