नई दिल्ली। लोकतंत्र के महापर्व की तैयारियों को और मजबूत करने के उद्देश्य से चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) का दूसरा चरण शुरू करने की घोषणा की है। सोमवार को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि यह चरण देश के 12 राज्यों में लागू होगा, जहां मतदाता सूची को फिलहाल फ्रीज कर दिया जाएगा। इस प्रक्रिया का मकसद है कि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूचियों में किसी प्रकार की त्रुटि न रहे और हर योग्य नागरिक को मतदान का अधिकार सुनिश्चित हो।
उन्होंने बताया कि इस समीक्षा प्रक्रिया के दौरान सभी नागरिकों को अपने नाम की जांच, सुधार और नई प्रविष्टि का अवसर मिलेगा। आयोग का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रह जाए और कोई अपात्र नाम सूची में न रहे। उन्होंने बताया कि यह अभियान 12 राज्यों में एक साथ शुरू किया गया है और इसके लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
यूपी सहित 12 राज्यों में लागू होगी प्रक्रिया
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि इस चरण में उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, हरियाणा और तेलंगाना जैसे राज्यों को शामिल किया गया है। इन राज्यों में निर्वाचन अधिकारियों को मतदाता सूची के अद्यतन के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति बनी रहे।
उन्होंने कहा, “मैं बिहार के 7.5 करोड़ मतदाताओं को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने पहले चरण में सक्रिय भागीदारी दिखाकर लोकतंत्र को और मजबूत किया।” उन्होंने बताया कि इस बार आयोग ने तकनीकी साधनों और फील्ड वेरिफिकेशन के बीच संतुलन बनाकर प्रक्रिया को और सरल बनाया है। हर बूथ स्तर अधिकारी (BLO) को विशेष एन्यूमरेशन फॉर्म दिए जा रहे हैं, जिनमें मतदाताओं को अपने विवरण की पुष्टि करनी होगी।
इस प्रक्रिया में मतदाताओं से उम्मीद की जा रही है कि वे समय पर अपने दस्तावेज़ प्रस्तुत करें और फॉर्म भरें, ताकि किसी भी तरह की देरी न हो। चुनाव आयोग का उद्देश्य दिसंबर 2025 तक सभी राज्यों की मतदाता सूचियों को पूरी तरह अद्यतन करना है।
फॉर्म 6, 7 और 8 से बदलें या जोड़ें अपना नाम
आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में बदलाव या नाम जोड़ने के लिए तीन अलग-अलग फॉर्म जारी किए गए हैं। फॉर्म 6 के जरिए कोई भी नया मतदाता अपना नाम सूची में जोड़ सकता है। फॉर्म 7 उन लोगों के लिए है जो अपना नाम हटवाना चाहते हैं या जिनके नाम गलत तरीके से सूची में शामिल हो गए हैं। वहीं फॉर्म 8 की मदद से मतदाता अपने मतदान कार्ड में मौजूद गलतियों को सुधार सकते हैं, जैसे पता, नाम या जन्म तिथि।
आयोग ने बताया कि अब नागरिकों को दस्तावेज़ जमा करने में भी सुविधा दी गई है। फॉर्म भरने के लिए 12 तरह के दस्तावेजों को मान्य किया गया है, जिनमें पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र, शैक्षिक प्रमाण पत्र, पेंशन भुगतान आदेश, जाति प्रमाण पत्र, एनआरसी दस्तावेज़, स्थायी निवास प्रमाण पत्र और स्थानीय निकाय द्वारा जारी पारिवारिक रजिस्टर शामिल हैं। यह कदम ग्रामीण इलाकों और सीमावर्ती राज्यों के नागरिकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जहां दस्तावेज़ों की उपलब्धता हमेशा आसान नहीं होती।
पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार पर जोर
ज्ञानेश कुमार ने बताया कि इस बार मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को तकनीकी रूप से और पारदर्शी बनाया गया है। आयोग ने राज्य और जिला स्तर पर डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया है, जिससे फॉर्म की स्थिति और सत्यापन की प्रक्रिया रियल-टाइम में देखी जा सकेगी। इसके अलावा, मोबाइल एप के माध्यम से भी मतदाता अपने आवेदन की स्थिति ट्रैक कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि आयोग का लक्ष्य है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों तक यह जानकारी तेजी से पहुंचे। इसके लिए स्थानीय प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधियों और नागरिक संगठनों की मदद ली जाएगी। विशेष अभियान के तहत घर-घर जाकर भी लोगों को मतदाता सूची के महत्व के बारे में बताया जाएगा। आयोग ने यह भी कहा है कि फर्जी वोटिंग या दोहरे नामों को लेकर अब ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी।
इसके साथ ही, आयोग ने युवा मतदाताओं पर भी विशेष फोकस किया है। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले हर युवा का नाम मतदाता सूची में दर्ज हो सके।
लोकतंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम
चुनाव आयोग का यह निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। देश के कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने इस पहल का स्वागत किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि मतदाता सूची की पारदर्शिता चुनावी निष्पक्षता की पहली शर्त है, और इस तरह के पुनरीक्षण अभियान नागरिकों के प्रति आयोग की जवाबदेही को दर्शाते हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया कि यह केवल तकनीकी अद्यतन नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विश्वास को मजबूत करने की प्रक्रिया है। नागरिकों को अपने मताधिकार के प्रति जागरूक और जिम्मेदार बनाना ही इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है। अगले कुछ महीनों में मतदाता सूचियों के नए संस्करण जारी किए जाएंगे, जिनमें हर परिवर्तन का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाएगा।
देश भर में यह उम्मीद जताई जा रही है कि इस अभियान से न केवल मतदान प्रतिशत बढ़ेगा, बल्कि फर्जी मतदान और त्रुटियों में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। चुनाव आयोग का यह प्रयास एक बार फिर साबित करता है कि भारत का लोकतंत्र निरंतर आत्मसुधार और पारदर्शिता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।







