भारतमाला हाइवे पर वायुसेना की ताकत का प्रदर्शन, सांचौर में फाइटर जेट्स की लैंडिंग से गूंजा आसमान

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सरहद से 40 किलोमीटर दूरी पर गूंजी भारतीय वायुसेना की ताकत

राजस्थान के सांचौर जिले के चितलवाना क्षेत्र में मंगलवार को भारतीय वायुसेना ने अपनी जबरदस्त सामरिक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए ‘महा-गजराज’ युद्धाभ्यास आयोजित किया। यह युद्धाभ्यास भारतमाला एक्सप्रेसवे 925A पर बनी लगभग तीन किलोमीटर लंबी इमरजेंसी एयर स्ट्रिप पर हुआ, जो पाकिस्तान बॉर्डर से महज 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
इस अभ्यास के दौरान सुखोई-30, जगुआर और C-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट ने हाईवे पर सफलतापूर्वक लैंडिंग और टेकऑफ कर वायुसेना की तैयारी और तकनीकी दक्षता का शानदार प्रदर्शन किया। अभ्यास के चलते इस मार्ग पर आम यातायात को कुछ घंटों के लिए पूरी तरह रोक दिया गया था। इस अवसर पर बड़ी संख्या में वायुसेना अधिकारी, इंजीनियरिंग स्टाफ और स्थानीय प्रशासन मौजूद रहे।
इस एक्सरसाइज का उद्देश्य यह परखना था कि आपात स्थिति या युद्धकाल में हवाई अड्डों की अनुपलब्धता की दशा में हाईवे का उपयोग सुरक्षित रूप से कैसे किया जा सकता है। यह प्रयोग भारतीय वायुसेना की “मल्टी-डोमेन रेडीनेस” और सीमाई क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का मजबूत प्रमाण है।

 ‘महा-गजराज’ अभ्यास, गूंज उठा भारतमाला एक्सप्रेसवे

मंगलवार सुबह चितलवाना के अगडावा हवाई पट्टी क्षेत्र में ‘महा-गजराज’ नामक यह विशेष युद्धाभ्यास आयोजित किया गया। अभ्यास की शुरुआत C-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के ‘टच एंड गो’ ट्रायल से हुई, जिसके बाद जगुआर फाइटर जेट ने तेज रफ्तार से हाईवे पर उतरकर दुबारा उड़ान भरी। अंत में सुखोई-30 ने जब रनवे पर लैंडिंग की, तो पूरा इलाका गर्जना से गूंज उठा।
विंग कमांडर देवेंद्र पांडे ने बताया कि यह अभ्यास भारतीय वायुसेना की साउथ-वेस्टर्न कमांड के तहत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य ‘इमरजेंसी एयर लैंडिंग फील्ड’ की वैलिडिटी और तत्परता की जांच करना था। उन्होंने कहा, “तीन विमानों में से दो फाइटर प्लेन थे—जगुआर और सुखोई—जबकि तीसरा ट्रांसपोर्ट विमान C-295 था। यह हमारी सामरिक तैयारियों का एक अहम हिस्सा है।”
इस मौके पर वायुसेना के तकनीकी विशेषज्ञों ने स्ट्रिप की क्षमता, विमानों की ग्राउंड हैंडलिंग और आपातकालीन संचार प्रणाली की भी समीक्षा की। इस हाईवे पर पहले भी दो बार ऐसे प्रयोग किए जा चुके हैं, लेकिन इस बार सुखोई और जगुआर की संयुक्त भागीदारी ने इसे ऐतिहासिक बना दिया।

आधुनिक सुविधाओं से लैस हवाई पट्टी, सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण

चितलवाना की यह एयर स्ट्रिप अपने आप में कई विशेषताओं से लैस है। इसके दोनों सिरों पर 40 गुणा 180 मीटर के दो पार्किंग जोन बनाए गए हैं, जहां फाइटर जेट को सुरक्षित रूप से खड़ा किया जा सकता है। इसके साथ ही 25 गुणा 65 मीटर क्षेत्र में एक डबल मंजिला एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टॉवर निर्मित किया गया है, जिसमें आधुनिक उपकरण, कम्युनिकेशन सिस्टम और वॉशरूम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
इसके अलावा, इस पट्टी के समानांतर 3.5 किलोमीटर लंबी और 7 मीटर चौड़ी सर्विस रोड भी तैयार की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में सैन्य वाहनों की त्वरित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस परियोजना पर लगभग 32.95 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कराया है। यह स्ट्रिप भारतमाला परियोजना का हिस्सा है, जिसके तहत देशभर में 25 आपातकालीन एयर स्ट्रिप्स विकसित की जा रही हैं। इनमें से 12 को सार्वजनिक रखा गया है, जबकि 13 को सुरक्षा कारणों से गुप्त रखा गया है।

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