प्रयागराज। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज में आगामी माघ मेला 2026 की तैयारियों का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यह आयोजन केवल आस्था का नहीं बल्कि भारत की सनातन परंपरा, सामाजिक अनुशासन और प्रशासनिक दक्षता का सजीव उदाहरण होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सुरक्षित, स्वच्छ और सुव्यवस्थित वातावरण प्रदान करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने गृह विभाग से कहा कि प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान किसी भी प्रकार का वीआइपी प्रोटोकाल लागू नहीं किया जाए।
माघ मेला 2026: बड़ा और भव्य
इस वर्ष माघ मेला 3 जनवरी से 15 फरवरी तक कुल 44 दिनों में आयोजित होगा। मेला क्षेत्र का विस्तार लगभग 800 हेक्टेयर किया गया है, और सेक्टरों की संख्या पांच से बढ़ाकर सात कर दी गई है। प्रमुख स्नान पर्वों में पौष पूर्णिमा, मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि शामिल हैं। पूरे मेले में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मौनी अमावस्या पर 3.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के स्नान की संभावना को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष तैयारी की जाए।

सुरक्षा और आधुनिक तकनीक का उपयोग
योगी आदित्यनाथ ने मेला क्षेत्र में एआई आधारित सर्विलांस, रीयल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम और लगभग 450 सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया। इसके साथ ही एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की तैनाती, अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई, और ट्रैफिक व भीड़ प्रबंधन के लिए बहुस्तरीय योजना बनाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने पुलिसकार्मिकों के बेहतर व्यवहार के लिए आवश्यक प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। उन्होंने एनएसएस स्वयंसेवकों और एनसीसी कैडेट के सहयोग लेने साथ ही नाविकों के साथ संवाद और समन्वय बनाने, खान-पान व विभिन्न सेवाओं के शुल्क को नियंत्रित रखने के निर्देश भी दिए।
नवाचार और सुविधा, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाएं
इस मेला में पहली बार एप आधारित बाइक टैक्सी सेवा, क्यूआर कोड पहचान प्रणाली, जियो-ट्यूब तकनीक और पूर्व निर्मित सीवेज शोधन संयंत्र लागू किए जा रहे हैं। स्वच्छता पर विशेष ध्यान देते हुए सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध, 16,650 शौचालय, और 3300 सफाई मित्रों की 24 घंटे सातों दिन तैनाती सुनिश्चित की गई है। नगर विकास विभाग को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज माडल लागू करने का निर्देश भी दिया गया है, ताकि गंगा-यमुना की पवित्रता बनी रहे।
मेला क्षेत्र में दो 20-बेड के अस्पताल, 12 प्राथमिक उपचार केंद्र, 50 एंबुलेंस और आयुष चिकित्सा इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की पर्याप्त व्यवस्था होने से श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी।

सांस्कृतिक और लोक कला का समावेश
पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के माध्यम से लोकनृत्य, लोकनाट्य, भजन-कीर्तन, रामलीला और 19वीं-20वीं शताब्दी के माघ मेलों के लोक अभिलेख व दुर्लभ पांडुलिपियों की प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। यह मेला न केवल आस्था का बल्कि संस्कृति और पर्यटन का भी बड़ा आकर्षण होगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सभी विभाग 31 दिसंबर तक तैयारियों को अंतिम रूप दें, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, व्यवस्थित और यादगार अनुभव मिल सके।
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