प्रदेश सरकार ने वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की जांच शुरू की है, जिससे कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। Bulandshahr में 6 दिसंबर 2025 तक, सुन्नी वक्फ बोर्ड की 3,643 में से 2,664 संपत्तियाँ UMEED पोर्टल पर रजिस्टर्ड की गईं, जबकि शिया वक्फ की सभी 83 संपत्तियाँ दर्ज कर दी गईं। बुलंदशहर के जिला अल्पसंख्यक अधिकारी मानवेंद्र सिंह ने बताया कि वक्फ संपत्तियों का ब्यौरा दर्ज किया जाना है। उन्होंने यह भी कहा कि कई संपत्तियों के मुतवल्ली (कस्टोडियन्स) ने डाटा एंट्री नहीं की है, और अवैध संपत्तियों की सूची शासन को भेजी जाएगी, जिन पर बुलडोजर कार्रवाई हो सकती है।
सुन्नी वक्फ की संपत्तियों का पंजीकरण संकट
बुलंदशहर जिले में सुन्नी वक्फ बोर्ड की कुल 3643 संपत्तियां पंजीकृत हैं, जिनमें से 2664 संपत्तियां पहले ही उम्मीद पोर्टल पर पंजीकृत हो चुकी हैं। हालांकि, 1021 संपत्तियां अब तक पंजीकृत नहीं हो पाई हैं। इन संपत्तियों के डिजिटल दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं हैं और न ही इन संपत्तियों के कस्टोडियन (मुतवल्ली) की जानकारी पोर्टल पर अपलोड की गई है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, कई संपत्तियों पर वर्षों से कोई मुतवल्ली नियुक्त नहीं किया गया है, जबकि कुछ संपत्तियों पर विवाद, पुराने दस्तावेजों की अनुपलब्धता और कब्जे से जुड़े मामले भी समस्याओं का कारण बने हैं। इन कारणों से यह संपत्तियां पोर्टल पर पंजीकरण के लिए सत्यापित नहीं हो पा रही हैं।

शिया वक्फ बोर्ड की सफलता: डिजिटलाइजेशन में एक बेहतर उदाहरण
वहीं, जिले में शिया वक्फ बोर्ड की सभी 83 संपत्तियां उम्मीद पोर्टल पर सफलतापूर्वक पंजीकृत कर दी गई हैं। यह वक्फ बोर्ड के डिजिटलीकरण प्रयासों की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। प्रदेश भर में वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण के लिए वक्फ बोर्ड ने 6 दिसंबर तक अंतिम तिथि निर्धारित की थी, लेकिन बुलंदशहर में 1000 से अधिक सुन्नी वक्फ संपत्तियां पंजीकरण से वंचित रह गई हैं, जो वक्फ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
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