झनियार गांव में धधकी तबाही की आग, 16 घर जलकर खाक
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के बंजार उपमंडल के नोहांडा पंचायत के झनियार गांव में सोमवार दोपहर अचानक लगी भीषण आग ने पूरे गांव को अपनी चपेट में ले लिया। इस अग्निकांड में लगभग 16 घर और चार गोशालाएं राख में हो गईं, जबकि एक बछड़ा भी जिंदा जल गया। आग इतनी तेजी से फैली कि ग्रामीणों को अपने घरों से सामान निकालने तक का मौका नहीं मिला। आग के कारण गांव में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। सर्दी के मौसम में इस तरह की घटना ने न केवल जनजीवन को झकझोर दिया बल्कि काष्ठकुणी ( लकड़ी की कुणी ) शैली के मकानों की ज्वलनशील प्रकृति ने आग को और भड़काने का काम किया।
आग की लपटों ने पूरे गांव को घेरा
जानकारी के अनुसार, सोमवार को दोपहर करीब 1:30 बजे झनियार गांव दो मंजिला गोशाला में अचानक आग भड़क उठी। तेज हवा और सूखी लकड़ियों के कारण लपटें कुछ ही मिनटों में आस-पास के घरों तक पहुंच गईं। गांव के लोग जैसे ही धुआं उठता देखे, तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। लकड़ी के घरों की परंपरागत काष्ठकुणी शैली, जो सर्द इलाकों में गर्माहट बनाए रखने के लिए प्रसिद्ध है, इस हादसे में आग के प्रसार का कारण बन गई। गांव के एक घर से दूसरे घर में आग फैलती चली गई, और कुछ ही देर में पूरा इलाका धुएं और लपटों से घिर गया। कई परिवारों को अपने मवेशी और जरूरी सामान बाहर निकालने का भी समय नहीं मिल पाया। दिन के समय घटना होने से जान का बड़ा नुकसान टल गया, लेकिन संपत्ति की क्षति अपूरणीय है।
ग्रामीणों और दमकल कर्मियों ने पांच घंटे की मेहनत के बाद बुझाई आग
आग को काबू पाने में स्थानीय लोगों और दमकल कर्मियों को करीब पांच घंटे की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। दोपहर 1:30 बजे लगी यह आग शाम करीब 6:30 बजे के आसपास पूरी तरह बुझाई जा सकी। इस दौरान गांव के सैकड़ों लोगों ने बाल्टियों और पाइपों से पानी डालकर आग पर काबू पाने की कोशिश की। दमकल विभाग ने भी पास के इलाकों से मदद जुटाई, लेकिन सड़क न होने के कारण वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाए और कर्मियों को उपकरण लेकर पैदल ही चढ़ाई करनी पड़ी। स्थानीय लोग बताते हैं कि आग इतनी भीषण थी कि लकड़ी के मकान धधकते हुए राख में बदलते चले गए। कई घरों में रखे अनाज, कपड़े, दस्तावेज़ और देवता देवता वीमू नाग व जोगनी माता के मंदिर भी इस आग की भेंट चढ़ गए।
प्रशासन की राहत टीम पैदल पहुंची, जांच के आदेश
आग की सूचना मिलते ही बंजार के एसडीएम पंकज शर्मा अपनी प्रशासनिक टीम के साथ कई किलोमीटर पैदल चलकर गांव पहुंचे। उन्होंने मौके पर आग से हुए नुकसान का जायजा लिया और प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत सामग्री और अस्थायी सहायता राशि प्रदान की। प्रशासन ने बताया कि आग लगने के सटीक कारणों की जांच की जा रही है। एसडीएम ने तहसीलदार बंजार नीरज शर्मा को मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं, जो सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। उन्होंने लोगों से अपील की कि घास या लकड़ी के ‘पड़ाछे’ गांव से दूर बनाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। इस हादसे के बाद झनियार गांव में सन्नाटा छा गया है, और प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे ठंड में रात बिताने को मजबूर हैं। प्रशासन ने अस्थायी आश्रय और भोजन की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।
विधायक शौरी ने किया दौरा
आग की खबर मिलते ही बंजार क्षेत्र के विधायक सुरेंद्र शौरी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की, सांत्वना दी और प्रशासन को त्वरित राहत पहुंचाने के निर्देश दिए। शौरी ने कहा कि झनियार जैसे दुर्गम गांवों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ना अब अत्यंत आवश्यक है ताकि आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंच सके। उन्होंने मुख्यमंत्री से विशेष राहत पैकेज की मांग की है। विधायक ने कहा, “यह घटना सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए चेतावनी है कि हमें अपने गांवों में सुरक्षा व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करना होगा।” ग्रामीणों ने भी सरकार से स्थायी मकानों और सड़क निर्माण की मांग की है। वहीं, प्रशासन ने वादा किया है कि जल्द ही प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।