डमरुओं की गूंज… नगाड़ों की थाप… और गंगा तट पर बसी काशी की पवित्र हवा में घुली आध्यात्म की सुगंध… इन्हीं सबके बीच बनारस एक बार फिर दो प्राचीन संस्कृतियों उत्तर और दक्षिण भारत की अमर साझेदारी का साक्षी बन रहा है... काशी की धरती पर काशी तमिल संगमम् 4 का भव्य आगाज़ हो चुका है
वाराणसी की पवित्र धरती एक बार फिर से सांस्कृतिक एकता और साझी विरासत की मिसाल पेश कर रही है। काशी तमिल संगमम् का चौथा संस्करण 2 दिसंबर से 15 दिसंबर तक आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन काशी और तमिलनाडु की प्राचीन और समृद्ध संस्कृतियों का अद्भुत समागम है, जो भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ों को न केवल समझने का अवसर देता है, बल्कि उसे सम्मानित भी करता है।
काशी तमिल संगमम् का महत्व
काशी तमिल संगमम् का आयोजन हर साल सांस्कृतिक साझा रिश्तों को मजबूत करता है और भारत की एकता को दर्शाता है। इस वर्ष का थीम “चलो तमिल सीखें – तमिल करकलाम” है, जो तमिल भाषा और संस्कृति के प्रति छात्रों और आम जनता में जागरूकता और सम्मान बढ़ाने का प्रयास है। इस आयोजन में काशी और तमिलनाडु की संस्कृतियों के बीच गहरे संबंधों की खोज की जाती है और दोनों के बीच के सांस्कृतिक संबंधों को महसूस किया जाता है।
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काशी तमिल संगमम् की शुरुआत
इस कार्यक्रम का उद्घाटन 2 दिसंबर को हुआ था, जिसमें 1400 प्रतिनिधि शामिल हुए। इस आयोजन में छात्रों, शिक्षकों और व्यवसायियों के लिए विभिन्न व्याख्यान और भ्रमण सत्र आयोजित किए गए हैं। BHU और IIT Madras द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम काशी के घाटों पर विशेष रूप से आयोजित किया जा रहा है, जो इस धार्मिक और सांस्कृतिक शहर की आत्मा को दर्शाता है।
काशी और तमिलनाडु की साझा संस्कृति
बुधवार को जब 200 तमिल छात्रों का दल बीएचयू के ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में पहुंचा, तो यह दृश्य अत्यंत प्रेरणादायक था। इन छात्रों ने पारंपरिक तमिल वस्त्रों में काशी की संस्कृति को सम्मानित करते हुए भारतीय संस्कृति के अद्वितीय संगम को प्रकट किया। छात्रों के उत्साह और काशी के घाटों पर तमिल परंपराओं की खूबसूरती ने एक नया अध्याय लिखा।
काशी तमिल संगमम्… भव्यता का चौथा संस्करण!
पहला संस्करण-2022
16 नवंबर से 15 दिसंबर 2022
थीम – कोई निश्चित थीम नहीं
फोकस – सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंध
दूसरा संस्करण-2023
17 दिसंबर से 30 दिसंबर 2023
थीम – शिक्षा, संस्कृति, व्यवसाय
तीसरा संस्करण-2025
15 फरवरी से 24 फरवरी 2025
थीम – शास्त्रीय तमिल साहित्य में ऋषि अगस्त्य के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश
चौथा संस्करण-2025
2 दिसंबर से 15 दिसंबर 2025
थीम – “चलो तमिल सीखें – तमिल करकलाम”
